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अलर्ट : "चमकी बुखार" सावधानी ही दूसरा उपचार है
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इन्दौर | 25-जून-2019
 
   
    मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रवीण जाड़िया ने बताया कि चमकी बुखार एईस (एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम) है। इसमें मरीज के शरीर में खून में ग्लूकोज एवं सोडियम की कमी हो जाती है। यह सिंड्रोम वायरस, बैक्टीरिया या फंगस के कारण हो सकता है। यह हाइपोग्लाइसीमिया कुपोषण और पौष्टिक आहार की कमी के कारण होता है।
चमकी बुखार के लक्षण
    लगातार तेज बुखार चढ़े रहना, बदन में लगातार ऐठन होना, दांत पर दांत दबाए रहना, सुस्ती चढ़ना, कमजोरी की वजह से बेहोशी, चिकोटी काटने पर शरीर में कोई गतिविधि न होना, उल्टी आने की समस्या चमकी बुखार के लक्षण हैं।
उपचार    
    चमकी बुखार से पीड़ित व्यक्ति के शरीर में पानी की कमी न होने दें। बच्चों को सिर्फ हेल्दी फूड ही दें। रात को खाना खाने के बाद हल्का फुल्का मीठा जरूर दें। मरीज को थोड़ी-थोड़ी देर बाद तरल पदार्थ देते रहें, ताकि उनके शरीर में पानी की कमी न हो। तेज बुखार होने पर पूरे शरीर को ताजे पानी से पोछें एवं पंखा से हवा करें ताकि बुखार कम हो सके। बच्चे के शरीर से कपड़े हटा लें एवं गर्दन सीधा रखें। पेरासिटामोल की गोली व अन्य सीरप डॉक्टर की सलाह के बाद ही दें। अगर मुंह से लार या झाग निकल रहा है तो उसे साफ कपड़े से पोछें, जिससे साँस लेने में कोई दिक्कत न हो। बच्चों को लगातार ओआरएस का घोल पिलाते रहें। तेज रोशनी से बचाने के लिये मरीज की आँखों को पट्टी से ढंके। बेहोशी व मिर्गी आने की अवस्था में मरीज को हवादार स्थान पर लिटाएं। उसे रात में भरपेट भोजन कराएं। चमकी आने की दशा में मरीज को बाएं या दाएं करवट लिटाकर चिकित्सालय ले जायें।
सावधानी
    बच्चों को झूठे व सड़े हुए फल न खाने दें, भोजन करने के पूर्व हाथ अवश्य धोएं, खाने से पहले और बाद में साबुन से हाथ धुलवाएं, पीने का पानी स्वच्छ रखें, बच्चों के नाखून न बढ़ने दें, गंदगी भरे इलाकों से दूर रखें, चमकी के लक्षण दिखने पर तेज धूप में जाने से बचें। दिन में दो बार स्नान करायें। बच्चे को कंबल अथवा गर्म कपड़ों में न लपेटें। बच्चे की नाक न बंद करें। बच्चे की गर्दन झुकाकर न रखें। मरीज के बिस्तर पर न बैठें।
(29 days ago)
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