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कृषि विभाग की आत्मा योजना से एकदिवसीय प्रशिक्षण प्राप्त कर कृषक कप्तान सिंह धाकड़ हुआ आत्मनिर्भर "(खुशियों की दास्तां)"
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मुरैना | 09-जनवरी-2020
 
   
 
    विकासखंड कैलारस के ग्राम बूढसिरथरा निवासी कप्तान सिंह धाकड़ ने परंपरागत खेती को छोड़कर कृषि विभाग की आत्मा योजना से एक दिवसीय प्रशिक्षण प्राप्त कर खेती को घाटे की बजाय दुगना लाभकारी सिद्ध कर दिया।
    ग्राम बूढसिरथरा निवासी श्री कप्तान सिंह पुत्र स्वर्गीय लालाराम धाकड़ अपनी पूवर्जों की तर्ज पर परंपरागत खेती किया करते थे। खेती से जो आय प्राप्त होती थी उससे उनके घर का गुजारा चलाने में काफी कठिनाई होती थी। कप्तान सिंह धाकड़ आये दिन सोचते थे कि इसी प्रकार हम परंपरागत खेती करते रहेंगे तो खेती हमारे लिये सदा घाटे का सौदा साबित होती रहेगी। जब खेती घटे का सौदा सबित होती रहेगी तो घर-गृहस्थी के अन्य खर्चो की पूर्ती कैसे होगी। घर गृहस्थी में खर्च के अलावा बच्चों की पढाई लिखाई, शादी, मकान निर्माण, भात, पक्ष आदि खेती पर ही निर्भर है और खेती हमेशा घाटे का सौदा सबित हो रही है।
    कप्तान सिंह धाकड़ के ग्राम बूढ सिरथरा में कृषि विभाग की आत्मा योजना से एक दिवसीय कृषि प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें कृषि वैज्ञानिकों द्वारा गेंहू की विधि (एसडब्ल्यूआई) पद्धति के बारे में बताया गया और बीटीएम एवं एटीएम आत्मा अधिकारियों ने एसडब्ल्यूआई गेंहू बीज की नवीन पद्धति को समझाया,  जिसमें 100 किलो बीज के बजाय मात्र 25 किलो प्रतिहेक्टेयर बीज बोने की विधि एवं कम पानी देने की जानकारी प्रदान की। इस पर आत्मा के अधिकारियों एवं वैज्ञनिकों ने तकनीकि सलाह प्रदान की।
    कप्तान सिंह ने कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर खेती को तकनीकि विधि से अपनाया जिसमें परंपरागत खेती से मात्र प्रतिहेक्टेयर में 60 हजार 150 रूपये के स्थान पर तकनीकि विधि से खेती अपनाने से 1 लाख 65000 रूपये का लाभ प्राप्त हुआ। जब खेती से दोहरा लाभ प्राप्त होने लगा। धीरे धीरे कप्तान सिंह के परिवार के अन्य खर्चों में भी राशि खर्च होने लगी और कप्तान सिंह के परिवार में खुशहाली आने लगी तब कप्तान सिंह ने कहा कि कृषि विभाग की आत्मा के प्रशिक्षिण ने मेरी किस्मत बदल दी नहीं तो मैं परंपरागत ख्ेाती अपनाकर जिंदगी भर कर्ज में डूबा रहता। मेरे अन्य खर्चे की पूर्ती करना मेरे लिये नामुमकिन था। मेरे जीवन में कृषि विभाग का आत्मा द्वारा प्रशक्षण सिद्ध हुआ और मैं आत्मनिर्भर बना।


-डी.डी.शाक्यवार
(17 days ago)
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