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औद्योगिक यात्रा शकर के कारखाने में हानि नहीं होती, डिग्री से ज्यादा महत्व है ज्ञान का
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बड़वानी | 02-फरवरी-2020
    सरकारी नौकरियां बहुत कम हैं। सुरक्षित भविष्य के लिए निजी क्षेत्र अधिक अच्छा है। आप थोड़ा प्रशिक्षण लेकर व्यापार, व्यवसाय, उद्योग आदि प्रारंभ कर सकते हैं। जहां तक शकर इंडस्ट्री का सवाल है, तो यह लाभदायक है। इस उद्योग के परिसर में आने के बाद गन्ने का हर अंश धन कमाने का साधन है। उसके ज्यूस से शुगर बन ही जाती है। उसके पत्ते तथा ज्यूस निकलने के बाद बचे अवशेष सबके खरीददार होते हैं। सामान्यतया शकर के कारखाने में हानि नहीं होती है। डिग्री का अपनी उपयोगिता है, लेकिन उसे ज्यादा महत्व ज्ञान का है। आप वास्तविक ज्ञान प्राप्त करें। स्वयं को अपडेट रखें। ये बातें ओलम एग्रो इंडिया प्रायवेट लिमिटेड, घटवा के मानव संसाधन प्रबंधक ओंकार यादव, डिप्टी प्रोसेस मेनेजर अंबिकेश्वर मिश्रा और सिक्यूरिटी प्रभारी मोहन लाल मीणा तथा अन्य विशय विशेषज्ञों ने शहीद भीमा नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बड़वानी के स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्षन प्रकोष्ठ द्वारा संपन्न औद्योगिक यात्रा के दूसरे चरण में 45 से अधिक युवा विद्यार्थियों को अपने उद्योग को विजिट करवाते हुए दीं। यह यात्रा प्राचार्य डॉ. आर. एन. शुक्ल के मार्गदर्षन में की गई। श्री ओंकार यादव ने बताया कि ओलम कंपनी में लगभग सात सौ लोगों को रोजगार मिलता है। उन्होंने इसमें भर्ती होने की प्रक्रिया भी समझाई।
बहुत विस्तार से मिली जानकारी
    कार्यकर्ता प्रीति गुलवानिया ने बताया कि औद्योगिक क्षेत्र को समझने तथा उससे युवाओं को अधिक से अधिक जोड़ने के उद्देश्य के लिए की गई इस यात्रा में ओलम कंपनी ने बहुत विस्तार से जानकारी दी। हमें गन्ने की खरीदी से लेकर शकर के निर्माण और फिर उसके विपणन की पूरी जानकारी प्राप्त हुई। कॅरियर काउंसलर डॉ. मधुसूदन चौबे ने बताया कि वाकई उद्योग जगत अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।यात्रा में शामिल राहुल मालवीया, अंशुल सुलिया, अविचल शर्मा, दीवानसिंह भुगवाड़े, कैलाश वास्केल, जयदेव धनगर, शांतिलाल खराड़ी, अजय सिसोदिया, नमिता जाधव, अंकिता जाधव, सुनिता बंडोड, राकेश कवासे, छगन जमरा, संदीप चौहान, रोहित चौहान, अजय अलावे, अनिल निंगवाल, शैलेंद्र वास्कले, लखन प्रजापति, विधी लोनारे, आवेश खान, चेतना पंचोले, रागिनी सोनी, नंदिनी अत्रे, जितेंद्र चौहान, वर्षा मालवीया, राहुल वर्मा, मगाराम जाट, राहुल सैंदाणे, विनोद मकवाने, दीक्षा कलोशिया, दीक्षा चौहान, कुलदीप चौहान, कोमल सोनगड़े, नंदिनी मालवीया, सुनिल धनगर, राहुल भंडोले, सूरज सूल्या, अजय पाटीदार, दीपांशु भावसार, राहुल मालवीया, दीपनिशा मुजाल्दा ग्यानारायण शर्मा, नेहा शर्मा, सावन शर्मा, किरण वर्मा आदि ने कहा कि हमें उद्योगों को समझने का अवसर मिला है, जो हमारे बहुत काम आयेगा। इन विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से अनेक प्रश्न भी किये, जिनके आत्मीयता से उत्तर दिये गये। विद्यार्थियों ने कहा कि कंपनी के जिम्मेदारों ने जो अपनत्व दिया वह सदैव यादगार रहेगा।
 
(24 days ago)
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