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गुणदोषो के आधार पर हो फैसला, लोभ या दबाव में नहीं- मुख्य न्यायाधिपति श्री मित्तल
उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश श्री मित्तल ने जायजा लिया
विदिशा | 02-फरवरी-2020
 
   
    रविवार को जबलपुर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति एके मित्तल विदिशा पहुंचे। जहां उन्होंने अधिवक्ताओं के सामने न्यायाधीश द्वारा जमानत के मामले में स्पष्ट रूप से कहा कि न्यायाधीश बिना किसी डर, झिझक, लोभ, दबाव की बजाय सिर्फ वास्तविक गुण और दोष के आधार पर जमानत का फैसला लें।
    रविवार को 11 बजे के लगभग जबलपुर उच्च न्यायालय के न्यायाधिपति एके मित्तल सड़क मार्ग से विदिशा पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले निर्माणाधीन न्यायालय भवन का निरीक्षण किया। इसके बाद वे वर्तमान न्यायालय परिसर में पहुंचे। जहां विभिन्न न्यायालयों का अवलोकन करने के बाद अभिभाषक संघ द्वारा आयेजित कार्यक्रम में शामिल हुए।
    अभिभाषक संघ के कार्यक्रम के दौरान एक अधिवक्ता द्वारा भोपाल में मुख्य न्यायाधिपति के बयान पर सवाल किया। कार्यक्रम के दौरान ही उन्होंने उक्त बात का खंडन करते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी न्याय के आदेश को पारित करने या जमानत देने के फैसले को लेने के लिए किसी भी प्रकार के भय, प्रेम, लोभ की बजाय उस घटना और वास्तविक स्थिति के गुण और दोष के आधार पर अपना फैसला निर्भीक होकर देना चाहिए।
    बाद में मीडिया से बात करते हुए मुख्य न्यायाधिपति एके मित्तल ने कहा कि वे प्रदेशभर में अलग.अलग न्यायालयों में भ्रमण कर रहे है। व्यवस्थाओं को सुधारने का प्रयास सतत जारी है। उन्होंने कहा कि मौके पर पहुंचकर समस्याओं को सुनकर उन्हें हल करने का प्रयास किया जा रहा है।
    विदिशा के दौरे के बारे मे उन्होंने कहा कि उन्हें बहुत अच्छा लगा है। यहां की व्यवस्थाएं संतोषजनक हैं। यहां एक ऐप को भी लॉन्च किया गया है, जिससे केस को जानने के लिए मदद मिलेगी। यहां नया भवन बनने के बाद कई प्रकार की समस्याएं खत्म हो जाएंगी। वकीलों के लिए भी काम करना है। चैम्बर्स बनाकर उपलब्ध कराने का प्रयास रहेगी। विधिक सेवा प्राधिकरण के जरिए स्थायी लोक अदालत की प्रक्रिया भी शुरू हुई है। निश्चित रूप से इसमें न्याय की प्रक्रिया सरल और आसान हो जाएगी। प्रदेशभर में प्रक्रिया को सुधारने का प्रयास किया जा रहा है।
ऐप का शुभारंभ
    मुख्य न्यायाधिपति एके मित्तल ने विटनिस हेल्प डेस्क ऐप का शुभारंभ भी किया। बताया गया कि साक्षियों को सुरक्षा प्रदान करनेए उनके बयान किस न्यायालय मे होना हैं, ऐसे ही अन्य विषयों को लेकर एक ऐप तैयार किया गया है। जिसे माननीय न्यायाधिपति द्वारा शुभारंभ कराया गया है। उल्लेखनीय है कि इस प्रकार की व्यवस्था भारत में सिर्फ मध्यप्रदेश में की गई है। मप्र में भी भोपाल संभाग के विदिशा जिला न्यायालय और इसके पहले सिर्फ इंदौर में यह व्यवस्था लागू थी। इस दौरे के दौरान जिला सत्र न्यायाधीश श्री  एससी उपाध्यायए न्यायाधीशगण श्री योगेश गुप्ता, श्री एमपी तिवारी, श्री आईपी मिश्रा, जिला अभियोजक श्री नरेश गुप्ता, श्री मनीष केथोरिया, सुश्री प्रतिभा गौतम,  सुश्री गार्गी झा, सुश्री ज्योति कुजूर, किरण कापसे, दिनेश असैया, गोविंद आर्य आदि मौजूद थे।
(24 days ago)
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