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तेज गर्मी में पशुओं को हो सकता है हीट-स्ट्रोक, रखें सावधानी
पशुपालकों के लिए आवश्यक सलाह जारी
आगर-मालवा | 14-मई-2020
 
  
        मई एवं जून माह में तापमान अत्यधिक होता है, जिसका सीधा असर पशुओं पर पड़ता है। गर्मी में पशु अपने शरीर का तापमान सामान्य बनाए रखने में यदि विफल रहता है, तो इसे तपघात यानी हीट स्ट्रोक हो सकता है। ऐसी स्थिति में पशु का तापमान बड़ जाता है वह दुग्ध उत्पादन कम हो जाता है और पशु बीमार हो जाता है।
        उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवाएं डॉ. एस.व्ही. कोसरवाल ने बताया कि हीट स्ट्रोक होने से पशु सुस्त हो जाते हैं, पशु सिर नीचा रखते तथा मुंह खोलकर सांस लेते हैं। मुंह से लार गिरती है, पशु की श्वास गति एवं शरीर का तापमान बढ़ जाता है। पशु का दुग्ध उत्पादन अचानक कम हो जाता है, पेशाब की मात्रा कम हो जाती है और नाक व नथुने सुख जाते हैं। पशुओं में हिट स्ट्रीक से बचाव के लिए पशुओं को चारा दाना रात्रि में या देर शाम को 7 से 8 बजे के आस-पास एवं सुबह जल्दी 5 से 6 बजे दे, क्योंकि चारा खाने के बाद पशु के शरीर में ऊष्मा पैदा होती है। दिन में विशेषकर दोपहर में दाना चारा कतई ना देवे पशुओं को हरा चारा ज्यादा देवे,  इससे जरूरी खनिज तत्व एवं पानी की पूर्ति होती रहेगी। पशु आहार में सूखे चारे की मात्रा कम रखें, क्योंकि इसके पाचन से जो वाष्पशील वसा अम्ल बनते हैं उनसे अधिक ऊष्मा पैदा होती है। पशु आहार में दाने की मात्रा अधिक रखें। पशु आहार में 40 से 50 ग्राम नमक एवं 40 से 50 ग्राम खनिज लवण व विटामिन अवश्य दें। पीने का पानी साफ व ठडा होना चाहिए। पशु को दिन में कम से कम तीन चार बार पानी पिलाएं।
    उप संचालक ने बताया कि पशुओं को रखने का स्थान खुला वह हवादार हो। इस समय मैं अधिकांश हवाएं पश्चिम की ओर से चलती है, जिस पर अपने पशु की आवाज को पश्चिम दिशा से ढंक दें। तापघात का सबसे अधिक असर आर्द्रता अधिक होने पर होता है। इसलिए पशुशाला की छत के पास का भाग खुला रखें। पशुशाला में टाट बोरिया आदि भिगोकर लगाएं। पंखो व पानी के फव्वारे का उपयोग भी कर सकते हैं। दुधारू पशुओं का घर बनाते समय कपड़ा कोरूगेटेड आईरन या टीबर, एल्युमीनियम गेलवेनाइज्ड स्टील का प्रयोग छत बनाने के लिए करें। पशुओं को सुबह-शाम नहलाएं। भार वाहक पशुओं को दिन में 12 बजे से 04 बजे तक छांव में विश्राम करने दें ।पानी के ठेल को पशुओं के नजदीक रखें। ऐसी जगह रखें जहां पशु आसानी से पानी पी सके। घोड़े के पैरों में पानी का छिड़काव करते हुए शरीर पर पानी का छिड़काव करें। छह माह के ऊपर ग्याभिन गोवंश एवं भैंसवंश को अतिरिक्त खाद्यान्न प्रदान करें।  सूअर प्रजाति के लिए पर्याप्त पानी और कीचड़ के गड्ढों की व्यवस्था करें। मुर्गी के शेड में पर्याप्त हवा एवं छांव की व्यवस्था हो इसके लिए पश्चिमी भाग पर टाट डालकर छांव करें। पालतू पक्षियों के शेड में तापमान कंट्रोल सिस्टम का प्रयोग करें। पालतू पशु जैसे कुत्ते एवं बिल्लियों को घर पर ही रखें। मृत पशुओं को पानी के स्त्रोतों एवं सार्वजनिक स्थानों से दूर गढ्डा कर गडवाए। पशु को सूर्य की धूप में बाहर खुला ना छोड़ें। पशु शेड में पशुओं को एक निश्चित दूरी पर बांधे एवं पशुओं को पशु शेड में भीड़-भाड़ से बचाएं। दुधारू पशुओं का दूध ठंडे समय में सुबह एवं देर शाम को ही निकाले। किसी भी प्रकार के रोग के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत अपने नजदीकी पशु चिकित्सा संस्था में उपचार कराएं।
(19 days ago)
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