समाचार
|| जिला विकास समन्वय एवं मूल्यांकन समिति की बैठक 11 अगस्त को आयोजित होगी || जिला पंचायत में कन्ट्रोल रूम स्थापित || कोविड-19 के मद्देनजर मास्‍क नही लगाने वाले 825 व्‍यक्तियों पर लगा अर्थदण्‍ड || जेल में निरूद्ध कैदियों से उनके परिजन कर सकेंगे ई-मुलाकात || जिले में अब तक 337.9 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज || मास्क नहीं लगाने पर चालान के साथ ही दो मास्क भी मिलेंगे || शासकीय भूमियों के प्रबंधन की नीति बनाने के लिय मंत्रि-परिषद समिति गठित || 727 ग्रामों की 15 लाख आबादी को मिलेगा चम्बल नदी का पेयजल || आबकारी मामलों के लिये मंत्रि-परिषद समिति गठित || रक्षाबंधन पर बाहर से आ रहे व्यक्तियों की जाँच सुनिश्चित करायें कलेक्टर रू मुख्यमंत्री श्री चौहान
अन्य ख़बरें
किसानों को फसल कटाई और कृषि एवं सामाजिक
कार्य के दौरान विभिन्न सावधानियां बरतने की सलाह
छिन्दवाड़ा | 23-मई-2020
 
    भारत सरकार के भारतीय मौसम विभाग पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय से संबध्द आंचलिक कृषि अनुसंधान केन्द छिन्दवाड़ा द्वारा आगामी चार दिनों के मौसम को देखते हुये जिले के किसानों को फसल कटाई और अन्य कृषि व सामाजिक कार्यो के दौरान विभिन्न सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है।
      आंचलिक कृषि अनुसंधान केन्द के नोडल अधिकारी डॉ.विजय पराडकर ने बताया कि अगले 96 घंटो के दौरान आगामी 27 मई तक अधिकांश क्षेत्रों में हल्के से साफ बादल रहने और हल्की वर्षा होने की संभावना है। अधिकतम तापमान 42-44 डिग्री.सेन्टीग्रेट और न्यूनतम तापमान 23-25 डिग्री. सेन्टीग्रेट के मध्य रहने तथा अधिकतम सापेक्षित आर्द्रता 30 से 40 प्रतिशत और न्यूनतम सापेक्षित आर्द्रता 14 से 22 प्रतिशत रहने की संभावना है। आने वाले दिनों में हवा उत्तर पश्चिम और पश्चिम दिशा में चलने एवं हवा की गति 17-20 कि.मी. प्रति घंटे की गति से चलने की संभावना है। वर्तमान में उज्जैन, हरदा आदि जिलों में टिड्डी दल आने की सूचना प्राप्त होने पर टिड्डी दल के प्रकोप से बचाव के लिये सभी किसानों को सलाह दी गई है कि अपने स्तर पर अपने-अपने गांव में समूह बनाकर रात्रि कालीन सतत निगरानी रखें। यदि टिड्डी दल के आक्रमण एवं पहचान की जानकारी मिलती है तो स्थानीय प्रशासन, कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केन्द्र से संपर्क कर जानकारी दें। यदि टिड्डी दल का प्रकोप दिखाई देता है तो सभी किसान टोली बनाकर विभिन्न तरह की परम्परागत उपाय जैसे ढोल, डीजे बजाकर, थाली, टीन के डिब्बे से शोर मचाकर, ट्रैक्टर का सायलेंसर निकालकर चलाकर, ध्वनि विस्तारक यंत्रों के माध्यम से आवाज कर खेतों से भगाया जा सकता है। टिड्डी दल की विश्राम अवस्था में प्रात: 3 से 5 बजे के बीच क्लोरपाईरिफॉस 20 ईसी 1000 मि.ली., लेम्डासाहिलोंथ्रिन 5 ईसी 400 मि.ली., डेल्टामेथ्रिन 2.8 ईसी 1000 मि.ली. प्रति हेक्टेयर 500 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें। कीटनाशक ना हो तो ट्रैक्टर चलित पावर स्प्रे द्वारा खेतों में पानी की बौछार करें।
      आंचलिक कृषि अनुसंधान केन्द के नोडल अधिकारी डॉ.विजय पराडकर ने कोरोना वायरस कोविड-19 के संक्रमण से बचाव और नियंत्रण की दृष्टि से जिले के किसानों को सलाह दी है कि मौसम के पूर्वानुमान को देखते हुये सभी किसान और श्रमिक कम से कम एक मीटर की दूरी बनाकर रखें, अलग-अलग क्यारियों में कटाई करें और अपने चेहरे को ढंककर रखें। अपने औजार जैसे दरांती, जेली, खुरपी, फावड़ा, रस्सी आदि अगर किसी से साझा करना भी पड़े तो इन औजारों को नीम या साबुन के पानी या फिनायल आदि से सैनिटाइज करें और उन्हें धूप में रखें। सब्जी/दूध आदि को मंडी/डेयरी में बेचने जाये तो अन्य लोगों से पर्याप्त दूरी बनाकर रखें, मास्क अवश्य लगायें और सैनिटाइजर से हाथ साफ करते रहे। अपने चेहरे को नहीं छुये और साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें। सामाजिक दूरी बनाकर रखें और विभिन्न प्रकार के सामाजिक आयोजन जैसे उद्यापन, सवामणी, जागरण आदि को यथासंभव स्थगित कर दें। धूप और डिहाईड्रेशन से बचने के लिये सिर ढंककर रखें, पर्याप्त पानी पीते रहे और शरीर को स्वस्थ रखें। सरकार द्वारा समय-समय पर जारी एडवायजरी का पूर्णत: पालन करें। यह ध्यान रखें कि सावधानी ही बचाव है।  
      आंचलिक कृषि अनुसंधान केन्द के नोडल अधिकारी डॉ.पराडकर ने किसानों को सलाह दी है कि किसान मृदा परीक्षण आवश्यक रूप से करायें। इसके लिये जिस खेत में नमूना लेना हो, उसमें जिग-जेग प्रकार से घूमकर 10-15 स्थानों पर निशान बना ले जिससे खेत के सभी हिस्से उसमें शामिल हो सके। चुने गये स्थानों पर उपरी सतह से घास-फूस, कूड़ा-करकट आदि हटा लें। इन सभी स्थानों पर 15 से.मी. अर्थात 6 से 9 इंच गहरा व्ही आकार का गड्डा खोदे और गड्डे को साफ कर कुरपी से एक तरफ से ऊपर से नीचे तक 2 से.मी.मोटी मिट्टी की तह को निकाल लें और साफ बाल्टी या ट्रे में डाल लें। एकत्रित की गई पूरी मिट्टी को हाथ से अच्छी तरह से मिला लें और साफ कपड़े में डालकर गोल ढेर बना लें। अंगुली से ढेर को 4 बराकर भागों में बांट लें और आमने सामने के भागों को हटा दें व शेष दो भागों की मिट्टी पुन: अच्छी तरह से मिलाकर फिर गोल बनायें। यह प्रक्रिया तब तक दोहरायें जब तक लगभग आधा किलो मिट्टी शेष रह जायें। यही प्रतिनिधि नमूना मिट्टी होगी। इस सूखे मिट्टी नमूने को साफ प्लास्टिक थैली में रखें और इसे कपड़े के थैले में डाल लें। नमूने के साथ एक सूचना पत्रक जिस पर समस्त जानकारी लिखी हो एक प्लास्टिक थैली के अंदर और एक कपड़े की थैली के बाहर बांध दें एवं इस तैयार नमूने को मिट्टी परीक्षण के लिये प्रयोगशाला भेजे। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि फसल की बुआई से पहले 3 साल में एक बार गहरी जुताई अवश्य करें। इससे मिट्टी हल्की हो जाती है एवं घास और खरपतवार के बीज नष्ट हो जाते है तथा कीड़े, उनके अंडे व बीमारियों के जीवाणु ऊपर आकर तेज धूप से नष्ट हो जाते है। मिट्टी में वायु का संचार बेहतर होता है और मिट्टी की जलधारण क्षमता भी बढ़ जाती है। गहरी जुताई मानसून आने से 45 दिन पहले माह मई व जून में करें जिससे धूप में बहुवर्षीय घास व खरपतवार आसानी से सूख सके और मिट्टी में वायु का प्रवाह आसानी से हो सकें।
      आंचलिक कृषि अनुसंधान केन्द के नोडल अधिकारी डॉ.पराडकर ने किसानों को सलाह दी है कि आगामी सप्ताह में हल्के से साफ बादल रहने व वर्षा नहीं होने के अनुमान को देखते हुये तथा अधिकतम तापमान व वाष्पीकरण की दर में वृध्दि को देखते हुये मक्का, मूंग, उड़द और मूंगफल्ली की फसलों में सिंचाई पर विशेष ध्यान दें एवं दो सिंचाईयों के अंतराल को कम करें। वर्तमान में ग्रीष्मकालीन मूंग और सब्जी की फसलों में थ्रिप्स कीट के प्रकोप से पत्तियां सिकड़ी हुई दिखाई देने पर इमिडाक्लोपिड औसत एक मि.ली. प्रति लीटर पानी में घोलकर दोपहर के बाद छिड़काव करें। उन्होंने उद्यानिकी फसलों के संबंध में किसानों को सलाह दी है कि भिंडी की फसल को देखे। यदि भिंडी की पत्तियों की शिराओं का रंग पीला पड़ रहा हो, तो पीतशिरा मोजेक रोग से बचाव के लिये ऐसे सभी पौधों को उखाड़कर जमीन में गाड़ दें और संक्रमण के प्रारंभिक चरण में रसचूसक कीटों को नियंत्रित करने के लिये इमेडाक्लोरप्रीड 5-7 एम.एल. दवा प्रति पम्प का छिड़काव करें। खीरा, तरबूज, खरबूज और ककड़ी फसलों में सिंचाई व्यवस्था ठीक से करें। कीट फैलने के लिये अनुकूल तापमान को ध्यान में रखते हुये लौकी, करेला, बरबटी, भिंडी, बैगन आदि फसलों में रोज कीटों की निगरानी करें। आम, नीबूवर्गीय फसलों व अन्य फसलों में सिंचाई का प्रबंधन करें तथा केला, पपीता और अन्य फसलों में वाष्पोत्सर्जन की दर को देखते हुये ड्रिप में पानी की मात्रा बढ़ा दें। इस मौसम में बेल वाली फसलों में न्यूनतम नमी बनायें रखें जिससे फसल उत्पादन में कमी नहीं हो। उन्होंने पशु पालक किसानों को भी सलाह दी है कि वर्तमान में बढ़ते तापमान को देखते हुये पशुओं को विशेष रूप से संरक्षित और सुरक्षित पशु शाला में ही बांधे तथा पशुओं को दिन में 3 बार साफ व ताजा पानी दें। पशुओं के अच्छे, स्वस्थ व दुग्ध उत्पादन के लिये चारे के साथ-साथ 50 ग्राम नमक और 50-100 ग्राम खनिज मिश्रण प्रति पशु अवश्य दें।
(73 days ago)
डाउनलोड करे क्रुतीदेव फोन्ट में.
डाउनलोड करे चाणक्य फोन्ट में.
पाठकों की पसंद

संग्रह
जुलाईअगस्त 2020सितम्बर
सोम.मंगल.बुध.गुरु.शुक्र.शनि.रवि.
272829303112
3456789
10111213141516
17181920212223
24252627282930
31123456

© 2012 सर्वाधिकार सुरक्षित जनसम्पर्क विभाग भोपाल, मध्यप्रदेश             Best viewed in IE 7.0 and above with monitor resolution 1024x768.
Onder's Computer