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बेसहारा माँ की मदद को आगे आये दमोह के कोरोना वारियर्स (कहानी सच्ची है)
शव का कराया अंतिम संस्कार, लापरवाह कर्मचारी पर होगी कार्यवाही
दमोह | 23-मई-2020
जीवित बीमार लोगो को इलाज से ठीक करने वाले डॉक्टर्स ने मृत्योपरान्त अपने कर्तव्यों से परे जाकर नि:शक्त व्यक्ति के अंतिम संस्कार को अंजाम देकर सच्ची मानवीयता की एक मिसाल कायम की है।
यह वाक्या है जिला अस्पताल में इलाजरत हल्कू पुत्र भूरा अहिरवार निवासी चंद पिपरिया, बटियागढ़ नामक निश:क्त मरीज का। हल्कू की मृत्यु 22 मई 2020 को हो गई थी। गम्भीर स्थिति को देखते हुये इलाज के दौरान ही उसका कोरोना सैंपल भी ले लिया गया था,  इलाज के दौरान व्यक्ति की मृत्यु हो गई थी, परन्तु गाइडलाइन के अनुसार जब तक कोरोना की रिपोर्ट नही आ जाती ,तक शव परिजनों को नही दिया जा सकता था। अतः शव मोर्चरी में रखवा दिया गया।
आज 23 मई 2020 को कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आने पर सिविल सर्जन डॉ ममता तिमोरी द्वारा व्यक्ति के शवदाह हेतु परिजनों को सौपने की कार्यवाही करते हुये जिम्मेदारी डॉ विशाल शुक्ला को दी गई।  बाद में यह जानकारी लगी कि व्यक्ति के साथ उसकी बूढ़ी माँ अकेली है। तब डॉ तिमोरी ,डॉ शुक्ला एवम डॉ सचिन मलैया ने तय किया कि उक्त व्यक्ति का क्रियाकर्म वो स्वयं कराएंगे, जो भी खर्च होगा,वह स्वयं वहन करेंगे। तीनो डॉक्टर्स ने अस्पताल के कर्मी छोटू चौरसिया को वह शववाहन चलाने और मृतक को सम्मान पूर्वक मुक्तिधाम ले जाने कहा गया, पीछे पीछे तीनो डॉक्टर भी उस शव को सम्मान पूर्वक विदा करने एवं कोरोना संबंधी समस्त भ्रांतियां खत्म करने संबंधी मिसाल पेश करने मुक्तिधाम जा पहुँचे और शव दहन को अंजाम दिया। मृत व्यक्ति की वृद्ध माँ को उसके गांव तक छुड़वाने की व्यवस्था भी की गई।
इस पूरी प्रक्रिया में डंमु रजक,दयालु,कृष्ण  कांत, राजेश राज आदि कर्मचारी भी अपने अधिकारियों के नेतृत्व को साकार करने आगे आये और अंतिम संस्कार को अंजाम देने में अपनी सहभागिता निभाई।
 
(3 days ago)
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