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वर्षाकाल में सम्भावित बाढ़,अतिवृष्टी से बचाव के पुख्ता इंतजाम करें-श्री राजे
बाढ़ राहत संबंधी बैठक में कलेक्टर ने दिए निर्देश
नीमच | 27-मई-2020
    वर्षाकाल में बाढ़ एवं अतिवृष्टि से उत्पन्न समस्याओं से निपटने और जन सुरक्षा हेतु किए जाने वाले उपायों के संबंध में कलेक्टर श्री जितेन्‍द्र सिंह राजे की अध्यक्षता में बुधवार को बैठक आयोजित की गई।बैठक में अतिवर्षा एवं बाढ़ की स्थिति से निपटने की तैयारी के संबंध में शासन से प्राप्त निर्देशों पर बिंदुवार विचार विमर्श किया गया तथा बाढ़ प्रभावित होने वाले ग्रामों ओर वहां की जाने व्‍यवस्‍थाओं की तैयारियो की विस्‍तार से समीक्षा की गई। बैठक में एस.पी.श्री मनोज कुमार राय, जिला पंचायत सीईओ सुश्री भव्‍या मित्‍तल अन्‍य अधिकारी उपस्थित थे।
संभावित ग्राम एवं सावधानीः-बैठक में बताया गया, कि गांधीसागर बांध का जलस्तर 1312 से 1326 फिट होने की स्थिति में तहसील मनासा रामपुरा के प्रभावित होने वाले ग्राम, मगरदा, बुरावन, देवरान, आंत्रीबुजुर्ग, रामपुरा, जमालपुरा, सेमलीआंतरी, मेल्कीबुजुर्ग, मेरिया खेड़ी, के प्रभावित क्षेत्र में सतत निगरानी रखी जावे व रेडअर्लट जारी कराया जावे। गांधीसागर जलाशय का जल स्तर 1326 से 1330 होने पर मनासा तहसील के ग्राम सालरमाला एवं सोनड़ी  के कुछ मकान प्रभावित होना संभावित हैं।
   तहसील जावद में ब्राह्मणी गुंजाली एवं गंभीरी नदी से सिंगोली की पिंजारपट्टी जराड, पटियाल, रतनगढ, अठाना, तारापुर, बावल, रुपपुरा, आंतरी तथा मनासा तहसील के चम्बलेश्वर बांध के पानी से कंजार्डा गांव प्रभावित हो सकते हैं। बाढ़ की स्थिति में इन ग्रामों के प्रभावित व्यक्तियों को ठहराने के सुरक्षित स्थान जैसे स्कूल धर्मशाला आदि का चयन पूर्व से ही करने के निर्देश कलेक्टर ने दिए। प्रभावित लोगों को कैंप लगाकर ठहराने तथा शासन के निर्देशानुसार स्थानीय सेवा संस्थान उदार एवं संपन्न लोगों के सहयोग से भोजन आदि आवश्यक सामग्री की व्यवस्था की जावे।
   पुल रपटों की स्थिति एवं मरम्मतः-बैठक में कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिले की पुरानी क्षतिग्रस्त पुलिया को चिन्हित किया जाए एवं क्षतिग्रस्त पुलिया रेलिंग की मरम्मत कराई जावे।ऐसे पुल पुलिया जो बाढ़ एवं अतिवृष्टि में डूब जाते हैं,उन पर निगाह रखी जावे।सभी पुलो एवं रपटों पर रेलिंग पिलर आदि ठीक हालत में लगे हो, जहां आवश्यक हो मरम्मत भी कराई जावे।
   जलमग्न सड़कों पर से वाहन चालक अपनी जोखिम वाहन ले जाने का प्रयास करते हैं।पुलों पर बाढ़ का पानी बढ़ने पर यातायात को नियंत्रित किया जावे व ऐसे स्थानों को चिन्हित कर चेतावनी बोर्ड लगाया जाए तथा पुल पुलिया पर बाढ राहत के अन्तर्गत क्रय किये गये बैरिकेड लगाए। अतिवृष्टि होने से पुल पुलिया के ऊपर पानी बहने की स्थिति होने पर लोक निर्माण विभाग के कर्मचारी व होमगार्ड की ड्यूटी लगाएं।पुल पुलिया पर चिन्हित खतरे वाली स्थिति में कोई वाहन पार न हो। उल्‍लघंन करने पर दोषी वाहन चालकों के विरूद्ध समुचित कार्रवाई की जावे। मार्ग में यदि कोई वाहन क्षतिग्रस्त हो जाए, तो उसे निकालने हेतु जहां तक संभव हो क्रेन की तत्काल व्यवस्था की जाए।
   बाढ़ प्रभावित गांवों में पेयजल व्यवस्थाः-कलेक्टर ने निर्देश दिए कि गांधी सागर बांध एवं अन्य संभावित डूब प्रभावित गांवों में बंद पड़े हैंडपंप का निरीक्षण कर एक सप्ताह में अनिवार्य रुप से चालू कराया जावे एवं जिन क्षेत्रों में पेय जल स्त्रोत बाढ़ के पानी से घिर जाएं ऐसे क्षेत्र में पेयजल  उपलब्ध कराने हेतु वैकल्पिक स्त्रोंतों को चिन्हांकित कर लिया जावे बाढ़ एवं वर्षा का पानी भर जाने से प्रभावित होने से बीमारियों का प्रकोप होने की संभावना रहती है अतः ऐसे क्षेत्रों के कुओं आदि में ब्लीचिंग पाउडर क्लोरीन डलवाने की व्यवस्था की जावे।संपर्क विहीन ग्रामों की पंचायतों में आवश्‍यक, पर्याप्‍त खाद्य सामग्री प्राथमिकता से उपलब्ध कराई जाना सुनिश्चित करें। वर्षाकाल में स्वच्छ पेयजल उपलब्धता पर विशेष ध्यान दिया जाए।                             
   मोटरबोट एवं नावों की व्यवस्थाः-कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जल संसाधन विभाग व मत्स्य पालन विभाग के पास  उपलब्ध मोटरबोट का परीक्षण कर चालू स्थिति में रखा जावे।जल संसाधन विभाग एवं होमगार्ड मोटरबोट व अन्य बचाव सामग्री आवश्यकता अनुसार क्रय करने मांग पत्र प्रस्तुत करें। एवं मांग अनुसार आपूर्ति राहत शाखा के प्रभारी अधिकारी द्वारा की जावेगी। आवश्यकता होने पर मत्स्य महासंघ रामपुरा के मोटरबोट एवं नावों को उपयोग में लिया जावे। बाढ़ नियंत्रण हेतु उपलब्ध शासकीय अर्द्धशासकीय एवं निजी स्त्रोंतों से उपलब्ध होने वाली समस्त बाढ़ बचाव सामग्री की सूची तैयार की जावें, किसके आधिपत्य में हैं उनसे संपर्क हेतु नाम पता दूरभाष क्रमांक आदि की जानकारी भी तैयार की जाए।
   बचाव सामग्री की व्यवस्थाः-बैठक में निर्देश दिए गए कि बाढ़ से बचाव एवं राहत सामग्री तथा लालटेन, खाली ड्रम, रस्सियां, बांस, वल्ली, टांर्च, टयूब, केरोसीन एवं अन्य राहत सामग्री की अग्रिम व्यवस्था प्रत्येक नियंत्रण कक्ष पर की जावे। सभी अनुविभागीय अधिकारी इसकी समीक्षा कर पता लगाएं की उपलब्ध सामग्री पर्याप्त है या नहीं आवश्यकता होने पर सामग्री की मांग की जावे ।
   पहुंच विहीन ग्रामों में खाद्य सामग्री आदि की व्यवस्था:-वर्षा काल में अतिवृष्टि एवं बाढ़ से जिले के ऐसे ग्राम जिनका वर्षा काल में मुख्यालय के पहुंच मार्ग से सड़क संपर्क टूट जाता है उन्हें चिन्हित किया जावे तथा ऐसे गांवों में आवश्यक खाद्य सामग्री,मिट्टी का तेल, दवाइयां आदि की पर्याप्त व्यवस्था अविलंब वर्षा प्रारंभ होने से पूर्व की जा रहे माह जून एवं जुलाई का कोटा अग्रिम देने की व्यवस्था की जाए।
   वर्षाकाल में संक्रामक रोगों से बचाव एवं रोकथामः-वर्षा से संक्रामक बीमारियां जैसे हैजा आंखों की बीमारी आदि अन्य बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकरण किया जावे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिविल डिस्पेंसरी आयुर्वेदिक औषधि पर हेजे के टीके एवं अन्य संभावित संक्रामक बीमारियों से सुरक्षा के लिए आवश्यक जीवन रक्षक औषधियां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराई जाए। सभी गांव में डिपो होल्डर एवं जन स्वास्थ्य रक्षक आदि को भी आवश्यक जीवन रक्षक दवाइयां उपलब्ध कराई जावें।
   पशुओं की बीमारियों से बचावः-बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामों में पशुओं की बीमारी से रोकथाम के लिए सभी पशु चिकित्सकों को पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन की डोज व अन्य आवश्यक दवाइयां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराई जाए। पशुओं का टीकाकरण प्रारंभ किया जाए। बाढ प्रभावित क्षैत्रों में प्रशिक्षण शिविर लगाये तथा आवश्यक होने पर उप संचालक पशु चिकित्सा अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के सहयोग से आवश्यक कार्रवाई करें।
   शहरों मे नालियों की सफाईः- बैठक में कलेक्टर ने निर्देश दिए कि बाढ़ की स्थिति में शहरों अथवा आबादी से लगे नदी नाले, घरों की सफाई वर्षा पूर्व करवाई जाये। यह सुनिश्चित कर लिया जाए कि नालियों के चोक होने से आवासीय बस्ती में बाढ़ का पानी घुसने की संभावना नहीं है। ऐसी बस्तियां जो नदी नालों के किनारे तथा निचले क्षेत्रों में अनाधिकृत रूप से बस्ती है, वहां जल स्तर बढ़ने पर बाढ़ आने की संभावना ना रहे, ऐसी बस्तियों को आवश्यकता होने पर अन्यत्र वैकल्पिक स्थान पर बसाने संबंधी स्थान को चिन्हित करने संबंधी कार्यवाही पूर्व से की जाना सुनिश्चित करें।
   बाधों व जलाशयों की मरम्मतः-कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिले में स्थित सभी पुराने बांधों तालाबों की पालों का निरीक्षण कर आवश्यकतानुसार मरम्मत तत्काल करें। नव निर्मित बाध तलाब पर भी निगरानी रखी जावे।
   नियंत्रण कक्षः- बैठक में जिला स्तर पर बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापना का निर्णय लिया गया  नीमच जिले का नियंत्रण कक्ष पुलिस कंट्रोल रूम फोन नंबर 228000 व 100 रहेगा। तहसील नीमच का नियंत्रण कक्ष तहसील कार्यालय पर होगा। जिसका दूरभाष नम्बर 227316 रहेगा। नियंत्रण कक्ष कार्यालयीन समय में कार्यशील रहेगा एवं बाढ़ एवं तथा अतिवृष्टि की स्थिति अनुसार नियंत्रण कक्ष को 24 घंटे क्रियाशील रहेगा। प्रभारी अधिकारी बाढ़ संबंधित जानकारी से पूर्ण रहेंगे। बाढ़ की स्थिति में प्राप्त सूचना तत्काल कलेक्टर पुलिस अधीक्षक अपर कलेक्टर  अनुभाग अधिकारी  तथा भू-अभिलेख अधीक्षक नीमच को देंगे। मनासा एवं जावद उपखंड एवं तहसील स्तरीय बाढ़ नियंत्रणकक्ष 15 जून 2017 से क्रियाशील रहेगें।
   जिले में सूचना प्रसारणः- बाढ़ एवं अतिवृष्टि की सूचना जिला नियंत्रण कक्ष द्वारा  संबंधित क्षेत्र के पुलिस स्टेशन  एवं राजस्व अधिकारियों को सूचना दी जावेगी एवं जनसंपर्क अधिकारी के माध्यम से स्थानीय समाचार पत्रों में प्रकाशित भी कराई जावेगी।
वर्षा की जानकारीः-जिले में सभी पुलिस स्टेशनों पर वायरलेस सुविधा उपलब्ध है सभी वायरलेस सेट निरंतर चालू रहे ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। सभी थाना प्रभारियों को निर्देशित किया गया कि वर्षा बाढ़ संबंधी जानकारी प्राप्त होने पर तत्काल कलेक्टर कार्यालय व कंट्रोल रुम पर सूचना दें।
   सभी तहसीलदार तहसील में स्थापित वर्षा मापक केंद्र पर प्रतिदिन की वर्षा का माप प्रातः 8 बजे पर करवाकर भू-अभिलेख शाखा कलेक्टर कार्यालय नीमच को भेजने की व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि प्रातः 10.00 बजे तक आयुक्त उज्जैन संभाग उज्जैन व अन्य कार्यलयों को जिले की वर्षा की जानकारी भेजी जा सके। बिलंब से वर्षा जानकारी भेजने की स्थिति में तहसीलदार व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी रहेंगे। तहसीलदार मनासा, जावद एवं नीमच अपने-अपने क्षेत्र के अंतर्गत जिन नदी नालों में बाढ़ उफान पर आ जाते हैं, उन क्षेत्रों में पूर्वानुमान से राहत कार्यों में जुट जाएगी। सभी विभागों के अधिकारी-कर्मचारीगण अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक पालन करेगें।

 
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