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लॉकडाउन में ग्रामीण महिलाओं ने लिखी हौसलों की नई कहानी (सफलता की कहानी)
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दतिया | 04-जून-2020
    कोरोना के संकट ने अच्छे-अच्छे लोगों के हौसले पस्त कर दिए। लेकिन काम करने का जज्बा और हुनर के दम पर आत्मनिर्भर बनने का उत्साह हो तो कोई मुश्किल आड़े नहीं आ सकती है। लॉकडाउन में यह साबित कर दिया स्वसहायता समूह से जुड़ी ग्राम धमना की रहने वाली चार ग्रामीण महिलाओं ने।
    अपने हुनर का उपयोग कर अनीता, आरती, राजेश्वरी एवं रेखा ने स्वयं का ईंट भट्टा लगाकर लॉकडाउन में भी हौसलों की नई कहानी लिखी है। गंगा स्वसहायता समूह की अनीता, आरती, राजेश्वरी एवं रेखा ने जनवरी के अंत में समूह से ईंट भट्टा लगाने के लिए 40 हजार रूपये का कर्ज लिया था। ईंट भट्टे का काम चल ही रहा था कि इस बीच लॉकडाउन लागू हेा गया। खाने कमाने की चिंता में इन ग्रामीण महिलाओं का परिवार घबराने लगा, लेकिन महिलाएं होते हुए भी इनने हिम्मत नहीं हारी। इन्होंने दिन रात मेहनत कर तीव्र गति से अपने काम को आगे बढ़ाया। अपनी सूझबूझ से कारगर विधि अपनाकर ईंटों को पकाना शुरू कर दिया। परिणाम जल्द सामने आया। पहली बार में ही बीस हजार रूपये में ईंटें बिकीं। फिर यह सिलसिला चल निकला।
    कोरोना के कारण जब तमाम उद्योग धंधों का काम प्रभावित हुआ है, लेकिन ईंट भट्टे का व्यवसाय इस विपरीत समय में भी ग्रामीण महिलाओं के लिए लाभ का धंधा बना हुआ है। मकान बनाने से लेकर तमाम निर्माण कार्यों में काम आने वाली ईंटों के भट्टे का कारोबार एकबार शुरू कर ग्रामीण महिलाएं कई साल तक मुनाफा कमाएंगी। ईंटें बेचने बाजार तलाशने की जरूरत नहीं रहती, लोग खुद ही ईंट भट्टे से ईंटें ले जाते हैं।
    ईंट भट्टे की कमाई से खुश होते हुए अनीता ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान उन्हें ईंट भट्टे के कारण केाई परेशानी नहीं हुई। घर का खर्च अच्छे से चला है। अगर यह काम ना होता, तो परेशानी उठानी पड़ती। इसी ईंट भट्टे की एक और पार्टनर आरती कहती हैं कि ईंट भट्टे में लागत की तुलना में मुनाफा ज्यादा है। लोग जहां अपने उत्पादों को बेचने के लिए परेशान होते हैं, वहीं ईंटों का मोवाइल पर ही सौदा हो जाता है। लॉकडाउन में इसकी वजह से आजीविका चलाने में कोई दिक्कत नहीं हुई। ग्रामीण आजीविका मिशन की जिला परियोजना प्रबंधक श्रीमती संतमती खलको कहती हैं कि स्वसहायता समूहों की महिला सदस्यों ने लॉकडाउन में अपनी मेहनत की बदौलत स्वरोजगार से अच्छी कमाई की है। नतीजतन उन्हें आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ा।

 
(37 days ago)
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