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किसानों की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिये अधिकारी उन्हें उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य विभाग की योजनाओं से जोड़ने के लिये प्रोत्साहित अधिकारी करें - चंबल कमिश्नर श्री मिश्रा
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मुरैना | 17-जून-2020
      किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने, उनकी आय में दोगुना इजाफा हो, इसके लिये किसानों को उन्नत खेती अपनाने के साथ-साथ उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य विभाग की योजनाओं से जोड़ने के लिये प्रेरित किया जाये। उन्होंने कहा कि उद्यानिकी के क्षेत्र में किसानों की आर्थिक सम्पन्नता की अपार संभावनायें है। अगर वे उन्नत खेती के साथ-साथ अपने खेतों में उद्यानिकी रकवे में वृद्धि करके क्लस्टर फार्मिक एवं खाद्य प्रसंस्करण की संभावनाओं को बढ़ावा देंगे तो उनकी आय में दोगुना इजाफा हो सकता है। यह बात चंबल संभाग के कमिश्नर श्री रवीन्द्र कुमार मिश्रा ने बुधवार को अपने सभाकक्ष में आयोजित कृषि, उद्यानिकी पशुपालन, मत्स्य विभाग की संभागीय बैठक को संबोधित करते हुये कही। इस अवसर पर अपर आयुक्त श्री अशोक कुमार चौहान, संयुक्त आयुक्त विकास श्री राजेन्द्र सिंह सहित इन सभी विभागों के संयुक्त संचालक, जिलाधिकारियों सहित अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद थे।  
    चंबल कमिश्नर श्री रवीन्द्र कुमार मिश्रा ने किसान कल्याण तथा कृषि विकास की समीक्षा करते हुये कहा कि खरीफ लक्ष्यों की पूर्ति के अनुरूप खाद्य बीज का भण्डारण 50 प्रतिशत हुआ है, इसे लक्ष्य के अनुरूप शत्प्रतिशत किया जाये। उन्होंने कहा कि किसानों को उन्नत और अच्छी किस्म का ही बीज वितरण किया जाये। किसी भी किसान को खाद्य, बीज, कीटनाशक दवाईयों को प्राप्त करने में कहीं कोई परेशानी नहीं होना चाहिये। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग के अधिकारियों और मैदानी अमले की किसानों तक मात्र 20 प्रतिशत ही पहुंच है। उन्होंने कहा कि विभाग के यह प्रयास रहे कि वे गांव-गांव जाकर किसानों को उन्नत आधुनिक कृषि को अपनाने की सलाह दे। हर आर.ई.ओ. की पहुंच किसानों तक रहे। उन्होंने कहा कि प्रायवेट कम्पनियों द्वारा बेची जा रही बीजोपचार औषधियों की जांच हो, इसके लिये कृषि राजस्व अधिकारियों के दल तैनात किये जाये, जो इन औषधियों की क्वालिटी की जांच करें, ऐसी कीटनाशक दवायें जो सरकार से ऐपुअल नहीं है वे दवाईयां नहीं बिकना चाहिये। ऐसे उर्वरकों का वितरण हो, जिससे उत्पादन बढ़े। जांच की रिपोर्ट भी शीघ्र आना चाहिये। जांच बारिकी से हो, जांच गलत निकलने पर सीधे एफ.आई.आर. दर्ज की जाये, संबंधित संस्था का लायसेन्स भी निरस्त किया जाये। कृषि आदान बेचने वाली सभी कम्पनियां स्टेंडर्ड होना चाहिये।
    उद्यानिकी विभाग की समीक्षा करते हुये कमिश्नर ने कहा कि उद्यानिकी फसलों की खेती को बढ़ावा देकर कृषकों की आय में 2 से 5 गुनी वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने किसानों को उन्नत पारंपरिक खेती के साथ फलों, मसाले, मिर्च, आयुर्वेदिक दवाईयों का उत्पादन कराये। जिससे उनकी आर्थिक एवं सामाजिक स्तर सुधर सके। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि फूड्स बेजीटेबिल में कई प्रकार की बैरायटियां है, इसी तरह ब्रोकल सेजना की पत्तियां आयुर्वेद दवाईयों की प्रोसेसिंग करालें तो इनका कई गुना वेल्यू बढ़ जाती है। उन्होंने बेजीटेबिल सहित फल-फूल की बिन्डोसोपिंग को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।
    कमिश्नर ने कहा कि माइक्रो इरीगेशन पद्धति के उपयोग को बढ़ावा देकर कम पानी से अधिक उत्पादन कर आय में वृद्धि की जा सकती है।
    उन्होंने उद्यानिकी के क्षेत्र में संरक्षित खेती, शोभायमान, पुष्प लीची, काजू, स्टावेरी जैसे केश, क्रोप पर ध्यान देने के साथ अन्य उद्यानिकी फसलों की खेती को बढ़ावा देकर उद्यानिकी को उद्योग के रूप में स्थापित करने पर भी जोर दिया। कमिश्नर ने कृषि से जुड़ी रोपडि़यों के विस्तार करने, इनमें सोलर लाइट, पानी की व्यवस्था के लिये स्टॉप डेम सहित अन्य समुचित व्यवस्थायें करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि भिण्ड जिले में पहली बार डच रोज की खेती कृषकों द्वारा पॉलीहाउस में प्रारंभ की है। उन्होंने पॉलीहाउस स्थापित करने वाले कृषकों की मदद करने पर भी जोर दिया।  
    पशुपालन विभाग की समीक्षा करते हुये कमिश्नर ने कहा कि जरूरत मंद किसानों को उन्नत नस्ल के पशु उपलब्ध करायें, ताकि उन्हें कृषि के अतिरिक्त आमदनी प्राप्त हो। उन्होंने पशुओं के उचित उपचार उनके वेक्सीनेशन करने पर जोर दिया।  
    कमिश्नर ने मौके पर कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन और मत्स्य विभाग के अधिकारियों से कहा कि आपसी समन्वय बनाकर प्रत्येक ब्लॉक के एक-एक गांव में अपनी समस्त विभागीय योजनाओं का क्रियान्वयन करके आइडियल मॉडल गांव बनाये। इन गांव में आयुक्त कृषि उत्पादन की समस्त एक्टीविटीज हो, पूरे कम्पोनेन्ट लागू हो।
    मत्स्य विभाग की योजनाओं की समीक्षा करते हुये कमिश्नर ने कहा कि किसानों को उद्यानिकी, पशुपालन के साथ-साथ मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिये भी प्रेरित किया जाये। उन्होंने बड़ी-बड़ी माईन्स से बन रहे तालाबों को राजस्व दस्तावेजों में इन्द्राज कराने के लिये कलेक्टरों को पत्र लिखने के भी निर्देश दिये ताकि इन माइन्स के तालाबों में स्थानीय स्तर पर मत्स्य पालन किया जा सके। कमिश्नर ने ब्रोन मछली के पैदावार करने पर भी जोर दिया।  
    समीक्षा के दौरान बताया गया कि जिले में 727 ग्रामीण तालाबा और 20 सिंचाई के जलाशय है, इन सभी का जल क्षेत्र 6 हजार 392 हेक्टेयर क्षेत्र है। इनमें से 607 ग्रामीण तालाबों में और 20 सिंचाई तालाबों में जिनका जल क्षेत्र 6 हजार 267 है, में मत्स्य पालन किया जा रहा है। जिले में इस वर्ष 4 हजार 113 मैट्रिक टन मछली का उत्पादन लक्ष्य प्रस्तावित है। इसमें से अभी तक 657.57 मैट्रिक टन मछली का उत्पादन हुआ है। बैठक में उचित मूल्य दुकानों से प्रदाय किये जाने वाले खाद्यान्न की भी समीक्षा की गई।  
 
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