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दीदी कैफे का संचालन कर स्व-सहायता समूह की महिलाओं की बदली तकदीर (कहानी सच्ची है)
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मुरैना | 17-जून-2020
      मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मार्गदर्शन में मां शीतला स्व-सहायता समूह 89 से जुड़ी 12 महिलायें आत्मनिर्भर बन गई है। यह सपना नहीं, हकीकत है। ग्राम नूरावाद की वे गरीब महिलाओं की जो घर-गृहस्थी के छोटे-बड़े खर्च को चलाने के लिये साहुकार से पैसा लेकर गुजारा करती थी। आज उनकी तकदीर और तस्वीर दोंनो बदल गई है।
    समूह की अध्यक्ष श्रीमती द्रोपती बाथम ने बताया कि पारिवारिक स्थिति अच्छी नहीं थी, इस कारण मन में तरह-तरह के ख्याल आते थे कि क्यों न कुछ रोजगार खोलकर पति के साथ सहयोगी बनूं। मुझे आजीविका मिशन के माध्यम से मार्गदर्शन मिला तो मेरे द्वारा 12 सदस्यीय ’’मां शीतला स्व-सहायता समूह 89’’ का गठन किया। धीरे-धीरे 10 रूपये की रूई लाकर दीपक-बाती बनाई। जिससे 100 रूपये की आय होना शुरू हुई। कोरोना वायरस के दौरान 1 लाख 50 हजार मास्क बनाये। उन्हें बेचकर समूह की महिलाओं को 90 हजार रूपये की आय प्राप्त हुई।
    मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत द्वारा मां शीतला स्व- सहायता समूह 89 के कार्यों को देखकर जिला पंचायत कार्यालय मुरैना में दीदी कैफे (कैन्टीन) संचालन करने हेतु आदेशित किया। स्व सहायता समूह द्वारा 15 हजार रूपये का ऋण लेकर कच्ची सामग्री खरीदकर समूह की अध्यक्ष श्रीमती द्रोपती बाथम ने दीदी कैफे (कैन्टीन) का संचालन किया। समूह को प्रतिदिन 300-400 रूपये की आय होना शुरू हो गई। समूह की अध्यक्ष श्रीमती द्रोपती बाथम ने बताया कि गठन से पहले ये गरीब परिवार की महिलाएं अपनी आवश्यकताओं की पूर्ती के लिये गांव के साहूकारो से कर्ज लेकर अपनी जीवन यापन कर रही थी। समूह में रेखा, मीना, भारती, रामवती, बादामी, रानी, सीमा, हसना बानो, सीमा बानो, मनीषा जाटव आदि सभी महिलाओं की तकदीर बदल गई और अपने-अपने पतियों के साथ घर-गृहस्थी के खर्च में सहयोगी बन गई है।        
अध्यक्ष द्रोपती बाथम का मोबा. नं. 7489550293       
डी.डी.शाक्यवार  
(22 days ago)
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