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ग्राम पंचायत देवगढ़ संतरे के बगीचों के विकास के क्षेत्र में भी बना रही है अपनी अलग पहचान "कहानी सच्ची है"
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छिन्दवाड़ा | 20-जून-2020
    छिन्दवाड़ा जिला मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत देवगढ़ गोंड राजाओं के किले और बावलियों से प्रदेश और देश में अपनी पहचान बनाने के बाद अब संतरे के बगीचों के विकास और इससे किसानों के आत्म-निर्भर बनने के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बनाने लगी है। कलेक्टर श्री सौरभ कुमार सुमन और मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री गजेंद्र सिंग नागेश के मार्गदर्शन में इस ग्राम पंचायत के 59 किसानों ने मनरेगा की नंदन फलोद्यान उप योजना के अंतर्गत 76.92 लाख रूपये की लागत से संतरे के बगीचों का विकास किया है। कृषकों का यह संतरा महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के व्यापारियों द्वारा खरीदा जाता है जिससे इस योजना से लाभान्वित कृषकों को प्रति वर्ष लगभग 50 लाख रूपये की आय हो रही है। उद्यानिकी फसलों से मिल रहे आर्थिक लाभ से अब इस क्षेत्र के किसान आर्थिक रूप से आत्म-निर्भर होते जा रहे है और समाज में भी उनका सम्मान बढ़ा है।
      जिले की जनपद पंचायत मोहखेड़ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अरविंद कुमार बोरकर ने बताया कि ग्राम देवगढ़ के किसान पहले मक्का अथवा गेहूं की फसल लेते थे जिससे उनकी आय कम होती थी। इन किसानों को मनरेगा योजना के अंतर्गत नंदन फलोद्यान उप योजना में पौधारोपण के प्रति प्रोत्साहित कर संतरे के बगीचे लगाने के लिये प्रेरित किया गया। साथ ही गुणवत्तायुक्त पौधे और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदाय कर संतरे के पौधो का रोपण कराया गया। साथ ही कार्यशाला आयोजित कर उन्हें फलो के साथ ही अन्य उद्यानिकी फसलों से कृषि को लाभ का धंधा बनाने के लिये भी प्रेरित किया गया। संतरे के पौधो के रोपण के लिये किसानों को पौधे और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने के साथ ही संतरे के बगीचों को विकसित करने के लिये किसानों को मजदूरी का भुगतान भी किया गया जिसके सुखद परिणाम अब दिखने लगे है। संतरा बगीचों में संतरे की उपज के साथ ही किसान अन्य उद्यानिकी फसले जैसे मिर्ची, बरबटी, मूंग आदि की उपज लेकर अब अतिरिक्त आय भी अर्जित करने के लगे है। उन्होंने बताया कि देवगढ़ ग्राम पंचायत के कृषकों की आय में वृध्दि से प्रेरित होकर अन्य ग्रामों के कृषक भी नंदन फलोद्यान उपयोजना से लाभान्वित होने के लिये अग्रसर हो रहे है तथा इस उपयोजना के अंतर्गत ग्राम पंचायत मैनीखापा, हीरावाड़ी, चूड़ाबोह, डोडिया और गोविंदवाड़ी को संतरे के क्लस्टर के रूप में विकसित करने के साथ ही ग्राम पंचायत देवगढ़, मैनीखापा, हीरावाड़ी, डोडिया और गोविंदवाड़ी में संतरे, आम और कटहल के पौधो से बगीचे विकसित कर हितग्राहियों को रोजगार के अवसर प्रदान किये जा रहे है जिससे उनकी आय में वृध्दि होगी। 
      ग्राम पंचायत देवगढ़ के सरपंच श्री केशवराव घाघरे ने बताया कि इस ग्राम पंचायत में किसानों को मनरेगा योजना की नंदन फलोद्यान उपयोजना के अंतर्गत नि:शुल्क संतरे के पौधे उपलब्ध कराकर बगीचे तैयार करके दिये जा रहे है और बगीचों को तैयार करने में स्वयं किसानों को रोजगार प्रदाय कर मनरेगा से मजदूरी का भुगतान किया जा रहा है। ग्राम देवगढ़ के कृषक श्री अंतराम पिता बिरू ने बताया कि मनरेगा योजना की कपिल धारा उपयोजना से उन्हें खेत में सिंचाई के लिये कुंआ खुदवाया गया और मेढ़ बंधान कराने के बाद नंदन फलोद्यान उपयोजना से 280 संतरे के पौधे रोपित कराये गये और मजदूरी की राशि का भुगतान किया गया। पूर्व में जहां प्रतिवर्ष 40 से 50 हजार रूपये की आय होती थी, वहीं अब संतरे के बगीचे से उन्हें 2 से 3 लाख रूपये की आय होती है। इसी प्रकार कृषक श्री डीबू पिता विपतलाल का कहना है कि मनरेगा योजना की नंदन फलोद्यान उपयोजना से उन्हें 400 संतरे के पौधे नि:शुल्क प्रदान किये गये थे और इन पौधो को रोपित करने और देख-रेख के लिये जनपद पंचायत से मजदूरी की राशि मिलती रही। अब संतरा बगीचा तैयार हो जाने के बाद उन्हें लगभग 3 से 4 लाख रूपये की आय हो सकेगी। मनरेगा योजना की नंदन फलोद्यान उपयोजना से इस क्षेत्र के किसानों की तस्वीर और तकदीर बदल रही है जिससे ग्रामवासियों में हर्ष की लहर दिखाई दे रही है और वे अधिक से अधिक उद्यानिकी फसलों से लाभ लेने के लिये हर संभव प्रयास कर रहे है।    
 
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