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सिलाई सेंटर बना आजीविका का साधन (सफलता की कहानी)
रेडीमेड कपड़ा सिलकर 30 महिलायें चला रहीं अपनी आजीविका, औसतन 400 रूप्ये प्रतिदिन का मिल रहा मेहनताना
सागर | 30-जुलाई-2020
     विकासखण्ड बण्डा के ग्राम बीजरी में समूह से जुड़ी 30 महिलायें रेडीमेड कपड़ा सिलकर अपनी आजीविका चला रहीं हैं। राधे ग्राम संगठन बीजरी के द्वारा संचालित इस सिलाई केन्द्र में 15 आधुनिक मशीनें रखीं हुई हैं। प्रतिदिन प्रातः 11 से शाम 6 बजे तक समूह की महिलायें यहां आकर कपड़े सिलने का काम करती हैं। इन महिलाओं ने आजीविका मिशन के माध्यम से सिलाई का प्रशिक्षण लिया और अपने अपने स्व. सहायता समूहों से ऋण लेकर गांव में ही तीन हजार रूप्ये प्रतिमाह किराये पर एक भवन ले लिया। इस भवन में सभी ने अपनी निजी मशीनें लाकर रख लीं हैं और वे सिलाई का काम सामुहिक रूप से करती हैं। काम के साथ मनोरंजन, मनोरंजन के साथ काम लोकगीत गाती हुईं ये महिलायें स्कूली यूनिफार्म, बच्चों के कपड़े, ट्राउजर, पेन्ट-शर्ट, पेटीकॉट-ब्लाउज, मास्क सिल रहीं हैं। इन्होंने अपने उत्पादों को बेचने के लिए बकायदा दो व्यक्तियों को नियुक्त किया हुआ है। यद्यपि बाजार प्रभारी इन दोनों व्यक्तियों की पत्नी समूह से जुड़ी हुईं हैं।
नर्मदा समूह की आरती लोधी, लक्ष्मी समूह की पुष्पा अहिरवार, सीता समूह की कलावती लोधी, सुलेखा लोधी, कृष्णा चढ़ार ने बताया कि वे सबसे पहले एक टीम बनाकर बाजार से कच्चा माल खरीद के लाते हैं। उन्होंने आपस में ही काम बांट रखे हैं। जैसे कुछ लोग कपड़ा काटते हैं, कुछ लोग सिलाई करते हैं, कुछ लोग काज-बंटन पैकिंग का काम करते हैं। इससे बहुत स्पीड के साथ काम हो पाता है। इस काम से वे संतुष्ट हैं। 15 ऐसी महिलायें भी हैं जो अपने घरों से ही सिलाई सेंटर के लिए कपड़ा सिलकर देती हैं।
इस काम से प्रत्येक महिला को औसतन 400 रूप्ये का मेहनताना प्रतिदिन मिल जाता है। देवरी विकासखण्ड में भी सिलाई केन्द्र का संचालन महिला समूहों के द्वारा किया जा रहा है जहां वे रेडीमेट गारमेंटर्स के साथ मास्क और पीपीई किट भी तैयार कर रहीं हैं। गोपाल पटैल विकासखण्ड प्रबंधक बण्डा ने बताया कि इन महिलाओं ने निजी शैक्षणिक संस्थाओं को भी स्कूल ड्रेस सिलकर दी है।
लद्यु उद्यमिता विकास के जिला प्रबंधक श्री प्रभाष मुड़ौतिया अनुसार जिले में 2 हजार 817 महिलायें सिलाई के काम से जुड़ी हुई हैं। जो 2 हजार 652 पैडल ऑपरेट्रेड सिलाई मशीनों पर काम कर रही हैं। मोटर वाले पायदान की 632 मशीनें हैं और जिले में 205 आधुनिक ऑटोमेटिक सिलाई मशीनें हैं।
डॉ इच्छित गढ़पाले मुख्यकार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत, सागर ने बताया कि आजीविका मिशन के माध्यम से ग्रामीण गरीब परिवारों को स्व. सहायता समूह से जोड़ते हुए उन्हें स्वावलंबी बनाने का काम किया जाता है। इन परिवारों को कृषि और गैर-कृषि आधारित गतिविधियों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जाता है। इसी श्रखंला में इन महिलाओं को सिलाई का प्रशिक्षण दिया गया है।
(56 days ago)
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