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जिले के 53 स्वसहायता समूहों के 175 सदस्यों द्वारा 1 लाख 85 हजार 995 राखियां बनाई ओर बेची जा चुकी है "सफलता की कहानी"
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धार | 02-अगस्त-2020
 
     स्वदेशी वस्तुओं को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं ने पहल की है। इस राखी भाइयो की कलाई पर स्वदेशी राखियां सजे इसलिए स्वयं सहायता समूह (एनआरएलएम) की महिलाओं ने घर पर ही राखियां बनाने के साथ थाली और चूड़ियां भी डिजाइन की है। धार, बदनावर, निसरपुर ब्लॉक में तीन समूह की 17 महिलाओं ने यह शुरुआत की है। इन महिलाओं द्वारा बनाई गई राखियां धार में बिक भी रही है। ये महिलाएं इस काम मे दक्ष है। ऐसे में इनकी मदद से एनआरएलएम जिले के शेष 12 हजार 350 समूह की महिलाओं को भी हस्तशिल्प कला जोड़ते हुए प्रशिक्षित करेगा। ताकि महिलाए विभिन्न गतिविधियों में हस्तशिल्प कला को शामिल कर अपनी आय का स्त्रोत बड़ा सके।
         कोरोना महामारी के बीच रक्षाबंधन त्यौहार महिला स्वसहायता समूहों के लिए वरदान साबित हो रहा है। जहाँ अन्य कामकाज ठप पड़े है वही महिला स्वसहायता समूह रक्षाबंधन के लिए राखियां, थाली और स्पेशल मास्क राखी तैयार कर अच्छी आमदनी अर्जित कर रहे है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत ग्रामीण आजीविका परियोजना से जुड़े महिला स्वसहायता समूह पूरे प्रदेशभर में विशेष रूप से कोरोना से जुड़ी राखियां तैयार कर रहे है। धार विकासखंड के सादलपुर सकूल के गांव के सुर में नवजीवन एवं नव जाग्रति स्व सहायता समूह द्वारा रालही निर्माण कार्य कर रखी विक्रय करने का भी कार्य किया जा रहा है। अब तक धार में समूहों द्वारा 44 हजार की राखी बेची जा चुकी है। धार में 53 स्वसहायता समूहों के 175 सदस्यों द्वारा 1 लाख 85 हजार 995 राखियां बनाई ओर बेची जा चुकी है।
       स्वदेशी वस्तुओं की मांग उठने के पश्चात महिलाओं ने निश्चित किया कि वे इस बार बड़े पैमाने पर राखियां बनाएगी और चूड़ियां आदि डिजाइन करेंगी। महिलाए इंदौर, रतलाम में रॉ मटेरियल लाई। दो महीनों में थालियां, राखियां व चूड़ियां डिजाइन की। महिलाएं इस कला से जुड़कर घर पर ही सामग्रिया तैयार करती है, लेकिन मार्केटिंग के अभाव में महिलाओं को लाभ नही मिल पाता। ऐसे में एनआरएलएम ने हस्तशिल्पी वस्तुओं की बिक्री करने की पहल की। विभाग ने जिला प्रशासन की मदद से कलेक्टोरेट परिसर स्थित नया जिला पंचायत कार्यालय के पास दुकान लगाकर इन सामग्रियों की बिक्री शुरू कर दी है।
 
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