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डीपीओ एवं सीडीपीओ केवल कुपोषण के आंकड़े भेजने एवं एकत्रित करने में न लगे रहें -संभागायुक्त
टेकहोम राशन आंगनवाड़ी के माध्यम से घर-घर पहुंच रहा कि नहीं, इसकी मॉनीटरिंग पर्यवेक्षक करेंगे -संभागायुक्त श्री शर्मा, बैठक में न आकर बैठक कक्ष के बाहर मंडराने वाली सीडीपीओ की संभागायुक्त ने 2 वेतन वृद्धि रोकी
उज्जैन | 06-अक्तूबर-2020
    संभागायुक्त श्री आनन्द कुमार शर्मा ने मंगलवार को महिला एवं बाल विकास विभाग की संभाग स्तरीय समीक्षा बैठक सह कार्यशाला एवं कार्य योजना की समीक्षा की। उन्होंने मंदसौर, नीमच एवं रतलाम जिले की कार्य योजना एवं विभाग द्वारा अब तक किये गये कार्यों की अद्यतन समीक्षा की। संभागायुक्त ने सभी डीपीओ एवं सीडीपीओ को हिदायत दी कि वे कुपोषित बच्चों की जानकारी भेजने एवं जानकारी एकत्रित करने में ही न लगे रहें, अपितु कुपोषित बच्चे कुपोषित क्यों हैं, इसकी खोज करें। कुपोषण की स्थिति बच्चों में क्यों बन रही है, इसका अध्ययन कर कुपोषण को जड़ से मिटायें। उन्होंने कहा कि सभी डीपीओ और सीडीपीओ अपनी यह धारण बदलें कि बच्चे पोषण पुनर्वास केन्द्र में नहीं गये, इसलिये वे कुपोषण से बाहर नहीं आ पा रहे हैं। संभागायुक्त ने कहा कि सभी अधिकारी यह देखें कि बच्चों में कुपोषण के वास्तविक कारण क्या हैं। उन्होंने इस धारणा का खण्डन किया कि ट्रायबल क्षेत्र में पोषण पर ध्यान नहीं दिया जाता है। उन्होंने कहा कि बल्कि ट्रायबल प्रकृति के करीब होते हैं, जीवन एवं स्वास्थ्य के प्रति सजग एवं सक्रिय रहते हैं। अत: अधिकारी बहानेबाजी न करें। संभागायुक्त श्री शर्मा ने कहा कि कुछ जिलों ने आंचल अभियान चलाकर कुपोषण मिटाने का प्रयास किया लेकिन यह नाकाफी रहा, क्योंकि अधिकारियों के पास इस बात के जवाब नहीं हैं कि कितने बच्चे कुपोषित थे और इस अभियान से वे स्वस्थ बच्चों की श्रेणी में आ गये। संभागायुक्त ने सभी अधिकारियों को चेतावनी दी कि उज्जैन संभाग में कुपोषित बच्चों का पर्याप्त उपचार कर उन्हें स्वस्थ बच्चों की श्रेणी में लाया जाये, अन्यथा अधिकारियों के प्रति जवाबदेही तय की जायेगी।
    बताया गया कि बाजना, सैलाना, भानपुरा, सीतामऊ में स्थिति गंभीर है। संभागायुक्त ने सभी डीपीओ एवं सीडीपीओ को निर्देशित किया कि वे टेकहोम राशन आंगनवाड़ी के माध्यम से घर-घर बंट रहा है कि नहीं, इसकी निरन्तर मॉनीटरिंग करें। सुपरवाइजर दो से पांच प्रतिशत तक इसे चैक करें कि राशन पहुंचा है कि नहीं। जिला अधिकारियों की यह जवाबदेही होगी कि वे तय करेंगे कि कौन-सा सुपरवाइजर कितनी आंगनवाड़ी रेंडमली चैक करेगा। बताया गया कि पोषण आहार नियमित रूप से बांटा जा रहा है। माह जून, जुलाई, अगस्त का पेमेंट न होने से कुछ जगहों पर दिक्कतें आ रही हैं।
    संभागायुक्त ने बैठक कक्ष में न आकर बैठक कक्ष के बाहर मंडराने वाली नीमच ग्रामीण की सीडीपीओ श्रीमती शीला असोदिया की दो वेतन वृद्धि तत्काल प्रभाव से रोकने के निर्देश दिये। उल्लेखनीय है कि श्रीमती शीला असोदिया बैठक में न आकर बैठक कक्ष के बाहर घूम रही थी। फिर उन्हें दूरभाष पर सूचना देकर बुलाया गया, तब वे बैठक कक्ष में आईं।
    संभागायुक्त ने बच्चों में पोषण स्तर की निगरानी की समीक्षा करते हुए निर्देश दिये कि रतलाम में 7, मंदसौर में 7, नीमच में 4 पोषण पुनर्वास केन्द्र हैं। इन सब केन्द्रों में 70 से 80 तक बेड हैं। सभी कुपोषित बच्चों का उपचार इन केन्द्रों में कराया जाये। उन्होंने इस बात पर नाराजगी व्यक्त की कि रतलाम, मंदसौर एवं नीमच में कुपोषित बच्चों की बढ़ती हुई संख्या को देखते हुए भी पोषण पुनर्वास केन्द्र में लक्ष्य के अनुसार बच्चों को भर्ती कर उपचार कराने में अनावश्यक विलम्ब किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि पोषण पुनर्वास केन्द्र का पूरा-पूरा उपयोग किया जाये तथा मंगल दिवस कार्यक्रम में सभी मंगलवार को आयोजित होने वाले कार्यक्रम में गर्भवती माताओं को अपनी देखभाल के लिये समझाईश दी जाये। श्री शर्मा ने कहा कि बच्चों में अतिकुपोषण के कुछ कारण हैं, जैसे यदि उन्हें समय पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा विभिन्न रोगों के बचाव के लिये टीके नहीं लगाये गये, बच्चों को भोजन में प्रोटीन एवं फल, सब्जियां न मिले, पेयजल ठीक न हो जिससे डायरिया की संभावना बनी रहे, घर में साफ-सफाई न हो आदि कारण हैं। बताया गया कि रतलाम में 244, मंदसौर में 2559, नीमच में 1327 नये कुपोषित बच्चे चिन्हांकित हुए हैं। इस स्थिति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए श्री शर्मा ने कहा कि कुपोषित बच्चों में सुधार होने की बजाय नये कुपोषित बच्चों में वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी अपने कलेक्टर से निर्देश प्राप्त करें और आयुष विभाग से ट्रेनिंग लें, ताकि कुपोषित गर्भवती महिला एवं शिशुओं का समय रहते उपचार हो जाये। जिला आयुष अधिकारी डॉ.प्रदीप कटियार ने बताया कि सभी गर्भवती महिलाओं में हीमोग्लोबिन की मात्रा अच्छी रहनी चाहिये। समय पर उसका टीकाकरण एवं उसे भोजन में क्या खाना है, इसकी काउंसलिंग की जानी चाहिये। माता अपने शिशुओं को दो वर्ष तक स्तनपान कराये तथा शिशुओं को सपुष्टि योग दवा खिलायें एवं बला तेल की मालिश कराये तो बच्चों का कुपोषण दूर हो जायेगा। सपुष्टि योग चूर्ण की खीर बनाकर भी बच्चों को खिलाई जा सकती है। अगर यह उपाय 21 दिन तक कर लिये जायें तो अच्छा रिजल्ट मिलेगा। डॉ.पालीवाल ने बताया कि मार्केट में सपुष्टि योग के बिस्किट भी मिलते हैं, इसका सेवन भी शिशुओं को कराया जाये तो उनमें कुपोषण दूर किया जा सकता है।
    संभागायुक्त ने आंगनवाड़ी भवन निर्माण, लाड़ली लक्ष्मी योजना, वनस्टाप सेन्टर, प्रधानमंत्री मातृ वन्दना योजना, सीएम हेल्पलाइन, आंगनवाड़ी केन्द्रों में शौचालय एवं पेयजल की‍ स्थिति आदि की समीक्षा की। संभागायुक्त ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिये कि वे अपने-अपने क्षेत्र में गर्भवती महिलाओं का चिन्हांकन एवं उसकी डिलेवरी की स्थिति का चार्ट बनायें और उसकी निरन्तर मॉनीटरिंग करते रहें। सभी आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के मन में यह भाव आये कि मेरे गांव या वार्ड में जो भी डिलेवरी हो रही है उसका आंकड़ा रखूंगी तो लक्ष्य पूरा हो जायेगा और एक भी कुपोषित माता या शिशु नहीं रहेगा।
    संभागायुक्त ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिये कि वे गर्भवती महिलाओं के पंजीयन, उनके चार एएनसी चैकअप, जटिल गर्भवती महिलाओं का चिन्हांकन एवं प्रबंधन तथा संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहित करें। शिशु स्वास्थ्य के अन्तर्गत कम वजन एवं बीमार नवजात शिशुओं का फॉलोअप लें। नवदम्पत्तियों का चिन्हांकन करें तथा गर्भवती माताओं की प्रसव-पूर्व जांच अवश्य करवायें। संभागायुक्त ने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जो कार्य योजना बनाई गई है, उसका मुख्य उद्देश्य गर्भवती माताओं का शत-प्रतिशत पंजीयन एवं हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं का चिन्हांकन कर उन्हें स्वास्थ्य एवं पोषण परामर्श देना है। इसके अलावा अतिकम वजन के बच्चों के कुपोषण के निवारण के हरसंभव प्रयास करने हैं। यह सब स्वास्थ्य विभाग तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त प्रयासों से ही संभव हो पायेगा।
    बैठक में संयुक्त संचालक श्री एनएस तोमर, उप संचालक डॉ.मंजुला तिवारी सहित तीनों जिलों के डीपीओ, सीडीपीओ एवं सुपरवाइजर उपस्थित थे।               



 
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