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अच्छी खबर - बुन्देलखंड से देशभर में जायेगा र्पावरण के अनूकूल भवन निर्माण में उपयोगी फ्लाई ऐश
ऐशटेक ने एनसीआर से किया संपर्क, ललितपुर-खजुराहो रेलखंड में यातायात के साथ बढ़ेगी अर्निंग, जिले सहित क्षेत्र का भी होगा विकास
टीकमगढ़ | 18-अक्तूबर-2020
      बुंदेलखंड के लिये अच्छी खबर है। उदयपुरा पावर प्लांट की फ्लाई ऐश देशभर में पर्यावरण के अनुकूल भवन निर्माण में प्रयोग की जायेगी। ललितपुर-खजुराहो रेलखंड स्थित उदपुरा पावर प्लांट साइडिंग से देश के विभिन्न हिस्सों में फ्लाई ऐश भेजे जायेंगे। मे. ऐशटेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने इसके लिये उत्तर मध्य रेलवे से संपर्क किया है। इससे यातायात के साथ रेलवे की आय बढ़ेगी। अर्निंग से ललितपुर-खजुराहो रेलखंड में डेवलपमेंट होगा। टीकमगढ़ से लगा उदयपुरा पावर प्लांट अब ललितपुर-खजुराहो रेलखंड के डवलपमेंट को गति देगा।
    एनसीआर झांसी से प्राप्त जानकारी के अनुसार उदयपुरा पावर प्लांट साइडिंग से देश के विभिन्न हिस्सों को फ्लाई ऐश भेजने के लिये मे. ऐशटेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने उत्तर मध्य रेलवे से संपर्क किया है। सब कुछ योजना के मुताबिक रहा तो टीकमगढ़ और ललितपुर के मध्य स्थित उदयपुरा रेलवे स्टेशन से फ्लाई ऐश देश के अलग-अलग प्रांतों में भेजा जायेगा। एनसीआर झांसी पीआरओ मनोज कुमार सिंह ने बताया कि उदयपुरा पावर प्लांट साइडिंग से फ्लाई ऐश का परिवहन रेलवे के लिये अतिरिक्त यातायात लायेगा। इससे रेलवे की अर्निंग बढ़ेगी। अर्निंग बढ़ने से रेलखंड का डेवलपमेंट होगा। लोडिंग-अनलोडिंग बढ़ने से क्षेत्र के लोगों को रोजगार मिलेगा। उन्होंने बताया कि बिजनेस डेवलपमेंट यूनिट्स के प्रयासों से अक्टूबर में कई नये फ्रेट ट्रेफिक प्राप्त किये गये हैं। झांसी डिवीजन में भी बीडीयू के प्रयासों में तेजी आई है।
पर्यावरण संरक्षण और लागत कम करता है फ्लाई ऐश
      फ्लाई ऐश एक बारीक पाउडर है, जो पावर प्लांट में कोयले के जलने से उप-उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है। इसमें भारी धातु, पीएम 2.5 और ब्लैक कार्बन होते हैं। उदयपुरा पावर प्लांट से फ्लाई ऐश का परिवहन ललितपुर-खजुराहो रेलखंड में यातायात और रेलवे की अर्निंग बढ़ायेगा। इसके साथ ही देशभर में पर्यावरण के अनुकूल भवन निर्माण में प्रयोग होगा। मिट्टी का खनन रोकने और पर्यावरण संरक्षण के लिये फ्लाई ऐश से बनी ईंटें इस्तेमाल में लाई जाती है। इंजीनियरों की मानें तो फ्लाई ऐश ईंट के प्रयोग से भवन निर्माण की लागत में 30 प्रतिशत की बचत होती है तथा इसके निर्माण में प्रदूषण नहीं होता है। मजबूती के मामले में भी यह लाल ईंट के प्रयोग से बेहतर है। इससे सरकार के खजाने पर योजनाओं को लागू करने में लागत कम आती है। फ्लाई ऐश ईंट से मकान बनाने में पानी का उपयोग कम होता है। ईंट को जोड़ने में सीमेंट-बालू की खपत कम होती है और भवन निर्माण का खर्च कम होता है।
 
(2 days ago)
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