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उपार्जन केन्द्रों से 30 प्रतिशत धान सीधे कस्टम मिलिंग के लिये उठाव होगा
नई धान कस्टम मिलिंग नीति के संबंध में बैठक सम्पन्न
कटनी | 11-नवम्बर-2020
     खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में समर्थन मूल्य पर उपार्जित धान की नई कस्टम मिलिंग नीति के अनुसार इस वर्ष उपार्जन अवधि के दौरान धान की कस्टम मिलिंग के लिये 30 प्रतिशत धान का उठाव उपार्जन केन्द्रों से सीधे अनुबंधित मिलर्स को किया जायेगा। इस आशय की जानकारी बुधवार को कलेक्टर शशिभूषण सिंह की अध्यक्षता में सम्पन्न कस्टम मिलर्स की बैठक में दी गई। इस मौके पर जिला आपूर्ति अधिकारी प्रमोद श्रीवास्तव, जिला प्रबंधक पीयूष माली, सहायक आयुक्त सहकारिता अरुण मसराम, जिला प्रबंधक वेयर हाउसिंग श्री हवलदार, सहायक आपूर्ति अधिकारी के.एस. भदौरिया सहित खाद्य विभाग के अधिकारी और मिलर्स उपस्थित थे।
   नई धान कस्टम मिलिंग नीति की जानकारी में जिला आपूर्ति अधिकारी ने बताया कि नवीन व्यवस्था के अनुसार उपार्जन अवधि में ही 30 प्रतिशत खरीदी धान को उपार्जन केन्द्रों से सीधे मिलर्स को उठाव किया जायेगा। कस्टम मिलिंग के लिये उपार्जन केन्द्रों से मिलर्स द्वारा उठाव कर मिल प्रांगण एवं उनके स्वयं के भण्डारण एजेन्सी के कैप गोदाम में भण्डारण किया जायेगा। मिलर्स का पोर्टल पर ऑनलाईन पंजीयन किया जाना अनिवार्य होगा। पात्र मिलर्स का निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अनुबंध निष्पादित किया जायेगा। धान को उपार्जन केन्द्र अथवा भण्डारण केन्द्र से मिल तक ले जाने हेतु परिवहन व्यवस्था तथा मिल से चावल जमा करने तक की परिवहन व्यवस्था की जिम्मेदारी मिलर की होगी।
   कलेक्टर श्री सिंह ने कहा कि मिलर्स की उपार्जित धान के शीघ्र प्रदाय की वर्षों पुरानी मांग नई मिलर्स नीति से पूर्ण हुई है। उपार्जन के साथ ही मिलिंग का काम शुरु होने से धान के खराब होने की संभावना नहीं रहेगी। साथ ही भण्डारण के लिये भी समुचित व्यवस्था हो सकेगी। कलेक्टर ने कहा कि मिलर्स आवश्यकता अनुसार खरीदी केन्द्र मिल के नजदीक खोलने के प्रस्ताव भी दे सकते हैं। मिलर्स की बैठक में गतवर्ष की उपार्जित धान की कस्टम मिलिंग कार्य की समीक्षा भी की गई। कलेक्टर ने मिलिंग कार्य में और अधिक गति लाने के निर्देश दिये। मिलर्स ने बताया कि जिले में केवल एक गुणवत्ता नियंत्रक (क्यू. आई.) होने से मिलिंग में गति नहीं आ रही है। कलेक्टर श्री सिंह ने नागरिक आपूर्ति निगम को गुणवत्ता नियंत्रण के लिये वैकल्पिक व्यवस्था के तहत विभागीय अधिकारियों को दायित्व देने के निर्देश दिये। उन्होने मिलर्स को अपग्रेडेशन के कार्य में गति लाकर शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिये।
   जिला आपूर्ति अधिकारी प्रमोद श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में अनुमानित 3 लाख 50 हजार एमटी धान की खरीदी होने पर 17 हजार 500 गठान वारदानों की आवश्यकता होगी। जिसमें से 70 प्रतिशत अर्थात सिंगल यूज्ड 12 हजार 250 गठाने वारदानों की पूर्ति मिलर्स और पीडीएस दुकानों से की जायेगी। जिले के मिलर्स द्वारा 7500 गठानें वारदानें उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया। उन्होने बताया कि मिलर्स को उपार्जित धान के खरीदी केन्द्रों से सीधे उठाव के लिये मैपिंग की जा रही है।
 
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