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जिले के ग्राम तिगांव के कृषक श्री नरेन्द्र ठाकरे जैविक संतरे के उत्पादन से कमा रहे अच्छा मुनाफा "कहानी सच्ची है"
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छिन्दवाड़ा | 13-फरवरी-2021
    खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने के लिए शासन निरंतर प्रयासरत है। विशेषकर जैविक खेती के लाभ को देखते हुए शासन द्वारा इसे बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए अनेकों योजनाएं भी चलाई जा रही हैं। छिन्दवाड़ा जिले के कृषक भी इन योजनाओं से परिचित होकर इनका लाभ उठा रहे हैं और जैविक खेती कर अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। इन्हीं जागरूक कृषकों में छिंदवाड़ा जिले के पांढुर्णा विकासखंड के ग्राम तिगांव के कृषक भी शामिल हैं, जो आत्मा परियोजना के अन्तर्गत समूह का गठन कर संतरे की जैविक खेती कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। साथ ही इनके जैविक संतरे की अच्छी गुणवत्ता के कारण इसे एक नई पहचान मिली है।
      इसी समूह के एक कृषक  ग्राम तिगांव के श्री नरेन्द्र ठाकरे पिता शामराव ठाकरे है जो संतरा, मक्का, तुअर, कपास, मिर्च, शिमला आदि फसलों की खेती करते हैं। उनके पास कृषि योग्य कुल 5.188 हेक्टेयर रकबा और 35 पशु हैं। कृषक श्री ठाकरे कृषि विभाग के अंतर्गत आत्मा परियोजना के मार्गदर्शन में कई वर्षों से जैविक खेती कर रहे हैं। वे अपने खेतों में  किसी भी प्रकार का रसायन, उर्वरक आदि का उपयोग नहीं करते हैं। कृषक श्री ठाकरे ने बताया कि उनके खेत में 30 से अधिक वर्मी पिट है, जिनकी वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग मेरे द्वारा खेती में किया जाता है। इसके अलावा मेरे द्वारा एजोला के 4 टांको का निर्माण किया गया है जिसका उपयोग पशुचारे के रूप में और उसके पानी का उपयोग वृद्धि उत्प्रेरक के रूप में किया जाता है। नेपियर घास का उपयोग भी पशुचारा के रूप में किया जा रहा है। वे कीट प्रबंधन के लिये गौमूत्र, नीम काढा, सड़ा हुआ छाछ, पत्तियां आदि का उपयोग करते हैं।
      उनके खेत में लगभग 2 हजार संतरे के पौधे हैं, जिससे कृषक श्री ठाकरे को लगभग 15 लाख रुपये तक की शुद्व आय प्राप्त होती है। इसके अलावा मक्का, तुअर, सब्जी आदि से लगभग 2.5 लाख की आय प्राप्त हो रही है। कृषक श्री ठाकरे ने बताया कि जैविक संतरे की गुणवत्ता के कारण मुझे इन्हें बेचने के लिये मंडी में नहीं ले जाना पड़ता बल्कि खेत में ही व्यापारियों द्वारा बिक्री हो जाती है। संतरो का आकार, टेक्चर, स्वाद और उच्च गुणवत्ता का होने के कारण 20 प्रतिशत तक अधिक रेट प्राप्त होता है। साथ ही जैविक खेती करने के कारण उर्वरक, कीटनाशक, टॉनिक आदि का उपयोग न करने से लगभग 3 लाख रुपए तक की प्रतिवर्ष बचत होती है।
         उन्होंने बताया कि वर्ष 2015-16 में आत्मा परियोजना अंतर्गत संचालित परंपरागत कृषि विकास योजना अंतर्गत 1 एकड या अधिक क्षेत्र में जैविक खेती करने वाले ग्राम तिगांव के 50 कृषकों द्वारा तिगांव जैविक समिति का गठन किया गया है जिसके द्वारा उत्पादन के साथ ही अब जैविक संतरा विपणन का कार्य भी शुरू किया गया है। योजना के अंतर्गत पैकिंग, मटेरियल एवं पंजीयन प्राप्त होने से मार्केट में हमारे समूह के जैविक संतरे की अच्छी पहचान बन गई है। आगामी वर्षो में वृहद स्तर पर विपणन का कार्य किया जाएगा। भविष्य में मेरे द्वारा जैविक सतरे से दोगुनी तक आय प्राप्त करने की योजना है। हमारा समूह जल्दी ही कृषक कंपनी बनाकर जैविक संतरा जूस का उत्पादन का कार्य शुरू करेगा।
 
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