समाचार
|| जिले में उपलब्ध समस्त ऑक्सीजन सिलेण्डर चिकित्सीय कार्य में उपयोग के लिये अधिग्रहित || रविवार को 220 लाभार्थियों को लगाया गया कोविड-19 वैक्सीन || 19 अप्रैल को जिले के 86 केन्द्रों पर लगेगा कोविड-19 का टीका || दयोदय तीर्थ क्षेत्र पहुंचकर कोविड केयर सेन्टर की व्यवस्थाओं का कलेक्टर ने लिया जायजा || "मैं कोरोना वोलेंटियर" अभियान के अन्तर्गत नवांकुर संस्था जामई द्वारा प्रेरित करने पर पात्र व्यक्तियों ने लगवाई वैक्सीन "कहानी सच्ची है" || अभी तक जिले में 180728 व्यक्तियों ने लगवाया टीका || कोविड-19 मीडिया बुलेटिन - जिले में कोरोना वायरस के संक्रमण से 95 नये व्यक्ति हुये स्वस्थ || ट्रेन से आने वाले 10 यात्रियों को किया गया कोरेंटाईन || जिले में कोविड-19 से बचाव एवं नियंत्रण हेतु किया गया सैंपलिंग का कार्य लगातार जारी || जिला कोविड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर द्वारा विगत 24 घण्टे में 110 प्रकरणों का निराकरण
अन्य ख़बरें
इस वर्ष समर्थन मूल्य पर तिवड़ा मिले चना की खरीदी नहीं की जायेगी
किसान चना की फसल से तिवड़ा का पौधा उखाड़कर जरूर अलग कर दें
नरसिंहपुर | 14-फरवरी-2021
      शासन के निर्देशानुसार इस वर्ष न्यूनतम समर्थन मूल्य पर तिवड़ा मिले चना की खरीदी नहीं की जायेगी। इस कारण से किसान चने की खड़ी फसल में से तिवड़ा के पौधे को निकालकर जरूर नष्ट कर दें। यह जानकारी उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास ने दी है।
         उप संचालक कृषि ने बताया कि केन्द्र एवं राज्य शासन के निर्देशानुसार तिवड़ा रहित चना का उत्पादन करने के लिए किसानों को तिवड़ा रहित चना बीज उपलब्ध कराया गया है। कभी- कभी तिवड़ा का बीज मिट्टी में रहता है, जिसके कारण चने की अच्छी फसल में भी तिवड़ा के पौधे उग आते हैं। चने की फसल में तिवड़ा के पौधे स्पष्ट रूप से अलग दिखाई पड़ते हैं। तिवड़ा की फली पकने पर चटक भी जाती है। इससे बीज मिट्टी में मिलकर अगले साल फिर उग सकता है। इसके लिए यह जरूरी है कि तिवड़ा की फली पकने के पहले ही चने की फसल से तिवड़ा के पौधे को उखाड़कर अलग कर दिया जावे। इन पौधों को पशुओं को भी खिलाया जा सकता है। चना एवं मसूर के खेत में तिवड़ा उगने पर उसे अलग से पहचाना जा सकता है। तिवड़ा को जंगली मटर या खेसरी दाल भी कहते हैं। चना एवं मसूर से तिवड़ा एकदम भिन्न होता है। किसान अपनी फसल का निरीक्षण करते रहें। तिवड़ा के पौधे दिखाई देने पर उन्हें तुरंत उखाड़कर नष्ट करते रहें। तिवड़ा के पौधे को उगने से लेकर फली बनने की अवस्था तक उखाड़कर अलग किया जा सकता है। चने की फसल की कटाई से पहले किसान तिवड़ा को आवश्यक रूप से अलग कर दें। क्योंकि गहाई के बाद एक बार तिवड़ा चना फसल में मिलने के बाद उसे अलग करना बहुत कठिन होता है। यह ग्रेडिंग से भी अलग नहीं होता है।
(64 days ago)
डाउनलोड करे क्रुतीदेव फोन्ट में.
डाउनलोड करे चाणक्य फोन्ट में.
पाठकों की पसंद

संग्रह
मार्चअप्रैल 2021मई
सोम.मंगल.बुध.गुरु.शुक्र.शनि.रवि.
2930311234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293012
3456789

© 2012 सर्वाधिकार सुरक्षित जनसम्पर्क विभाग भोपाल, मध्यप्रदेश             Best viewed in IE 7.0 and above with monitor resolution 1024x768.
Onder's Computer