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बबिता चौहान आजीविका मिशन से जुडकर आत्मनिर्भर बनी "सफलता की कहानी"
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झाबुआ | 26-फरवरी-2021
    झाबुआ जिले की मेघनगर विकास खण्ड के ग्राम फुटतालाब की रहने वाली बबिता चौहान कक्षा 12 वीं तक शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद वह घर पर रहकर कृषि कार्य करती थी। जिसमें उन्होंने सब्जी भाजी का कार्य हाथ में लिया। घर की स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी कि वह अपना घर का खर्चा अच्छी तरह से चला सकें। वह मध्य प्रदेश डे राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के परियोजना के अधिकारी व कर्मचारी द्वारा गांव में महिला स्व सहायता समूह बनाने की बैठक रखी और उन्हें स्व सहायता समूह के बारे में समझाईस दी। बबिता ने महिलाओं का एक स्वयं सहायता समूह का गठन किया और बचत करना चालू किया। परियोजना से आरएफ राशि 13 हजार रूपये प्राप्त किए। उसमें से उन्होंने 7 हजार रूपये ऋण के रूप में सिलाई की गतिविधि हेतु लिए। इस राशि से सिलाई मशिन खरीद कर सिलाई का कार्य प्रारम्भ किया। जिससे उनकी मासिक आमदनी 3 हजार रूपये तक होने लगी और ऋण की भरपाई भी की गई।
   वह अपने गांव से अन्य गांव में स्वयं सहायता समूह का गठन किया और ग्राम स्तर पर ग्राम संगठनों का गठन किया। जिससे उन्हें सीआरपी के रूप में मानदेय भी प्राप्त होता था। उसके बाद वह गंाव में गठित ग्राम संगठन में परियोजना से सीआईएफ 1 लाख रूपये की राशि प्राप्त की और ग्राम संगठन से भी 40 हजार रूपये का ऋण प्राप्त किया और किराने की दुकान आरम्भ की। जिससे 8 हजार रूपये माह में कमा लेती है। किराने की दुकान की कमाई से ग्राम संगठन से लिए गए ऋण की राशि भी चुका दी है। बबिता ने बीसी कार्य के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। परियोजना से कार्य में रूचि को देखते हुए उन्हें बीसी की आईडी प्राप्त हुई और बैंक का कार्य आरम्भ किया। जिससे उन्हें प्रतिमाह 15 हजार रूपये तक आमदनी हो जाती है।
   बबिता ने परियोजना से प्राप्त ऋण का लाभ लेकर आर्थिक रू से आत्मनिर्भर बनी। वह अपने 3 बच्चों को पढ़ा रही है। 2 पुत्र प्राईवेट स्कूल में अध्ययन  कर रहे हैं और एक बालिका जवाहर नवोदय विद्यालय में अध्ययनरत है। वर्तमान में वह बीसी कार्य, सिलाई कार्य, किराना दुकान आदि सभी गतिविधियों से प्रतिमाह 30 हजार रूपये कमा लेती है और पूरा परिवार खुशहाल है। इसके लिए बबिता ने आजीविका मिशन के प्रति आभार व्यक्त किया है।

 
(49 days ago)
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