समाचार
|| प्रत्येक जिले में शुरू होगा कोविड केयर सेंटर - मंत्री श्री सारंग || शिवराज की जान, खुशहाल किसान: कमल पटेल (विशेष लेख) || मुख्यमंत्री कोविड-19 योद्धा कल्याण योजना पुन: लागू || आंगनवाड़ी सेवाओं में प्रदाय की जा रही सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए वेबीनार आयोजित || वन विहार राष्ट्रीय उद्यान प्रत्येक शनिवार-रविवार को बंद रहेगा || स्वास्थ्य कर्मी जान जोखिम में डालकर लोगों की जान बचा रहे हैं- मुख्यमंत्री श्री चौहान || कोरोना उपचार के लिए बिस्तरों, ऑक्सीजन आदि की पर्याप्त व्यवस्था || संस्कृति विभाग द्वारा कथा अंबेडकर का आयोजन 13 अप्रैल को || सोमवार प्रातः 10 बजे खुलेंगे शासकीय कार्यालय || एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय शिक्षण कर्मचारी चयन परीक्षा
अन्य ख़बरें
रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुति से समाप्त हुआ 47वां खजुराहो नृत्य समारोह मणिपुरी, ओडिसी एवं भरतनाट्यम की हुई प्रस्तुति
मणिपुरी नृत्य में बसंत, वैष्णों और ढोलचोलक रासलीला की प्रस्तुति
छतरपुर | 26-फरवरी-2021
    47वें खजुराहो महोत्सव के समापन के अवसर पर शुक्रवार को मां जगदंबा और कंदरिया महादेव मंदिर के प्रांगण में मणिपुरी, ओडिसी और भरतनाट्यम की प्रस्तुति हुई। पहली प्रस्तुति जवाहरलाल नेहरू मणिपुरी डांस अकादमी-मणिपुरी समूह द्वारा प्रस्तुत की गई। इस प्रस्तुति में मणिपुरी संकीर्तन रखी गई, जिसमें बसंतरास, वैष्णों संप्रदाय  में रासलीला तथा ढोलचोलक (पुंगचोलक) की प्रस्तुति की गई।
आर्या नंदे द्वारा मंगलाचरण एवं पल्लवी नृत्य की प्रस्तुति
    दूसरी प्रस्तुति आर्या नंदे द्वारा ओडिसी एकल नृत्य के संदर्भ में दी गई। जिसमें मंगलाचरण और पल्लवी नृत्य और किरवानी पल्लवी की प्रस्तुति हुई। पल्लवी नृत्य मुख्यतः टेक्नीकल फार्म पर आधारित है। इसे किरवानी पल्लवी भी  कहते हैं। इस प्रस्तुति में महानाटक रामायण एवं उससे जुड़े कुछ संदर्भ एवं कहानी की सहायता से सभी नौ रसों के आधार पर प्रस्तुति की गई इस प्रस्तुति में रामायण के पात्र से जुड़े प्रसंग समाहित है।
खजुराहो की महत्ता प्रतिपादित करने ब्रम्ह अर्पणा की प्रस्तुति
    तीसरी एवं अंतिम प्रस्तुति पूर्णिमा अशोक एवं साथियों द्वारा भरतनाट्यम के संदर्भ में दी गई। इस नृत्य की थीम खजुराहो नृत्य के महोत्सव के संदर्भ में विशेष रूप से बनाया गया है जिसे ब्रम्ह अर्पणा कहते हैं। ब्रम्ह्ा जी चारों वेदों के रचयिता हैं। पांचवी प्रस्तुति ब्रम्ह अर्पणा के मुख्य भाव के इर्द गिर्द घूमती है। ब्रम्ह अर्पणा में प्रेम, भक्ति और मुक्ति के भाव समाहित हैं।
    ब्रम्ह अर्पणा में तीन अलग-अलग प्रस्तुति दी गई। जहां प्रेम रस में रामजी सीता से मिलते हैं की प्रस्तुति दी गई है। इस प्रेम श्रृंगार की प्रस्तुति को दो व्यक्तित्व ही महसूस कर सकते हैं। इसमें रामजी एवं सीता जी के स्नेही मिलन का भाव समाहित है।
    मुक्ति के भाव में मीरा के पात्र का चित्रण है मुक्ति के भाव में मीरा के संदर्भ से जुड़ी सामाजिक भावना है कि मीरा पात्र के भाव हमें मुक्ति की ओर ले जाते है और स्त्रियों का यह भाव (पात्र) जो हमें जीवन को जीने की प्रेरणा देते हैं।
    भक्ति के भाव शिवजी की स्तुति में शिव शंभो शिव शंभो स्वयंभू समाहित है, जो हमें यह सिखलाता है कि शिवजी की भक्ति से हमें क्या-क्या प्राप्त हो सकता है।
    समारोह के समापन अवसर पर पूर्व राज्यमंत्री ललिता यादव, कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह सहित पर्यटन एवं संस्कृति विभाग भोपाल के अधिकारी उपस्थित रहे। कलाकारों की प्रस्तुति के बाद ललिता यादव ने पूर्णिमा अशोक एवं साथियों का कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह ने जवाहरलाल नेहरू मणिपुरी डांस अकादमी की आर्या नंदे एवं सदस्यों को सम्मानित किया। 

 
(44 days ago)
डाउनलोड करे क्रुतीदेव फोन्ट में.
डाउनलोड करे चाणक्य फोन्ट में.
पाठकों की पसंद

संग्रह
मार्चअप्रैल 2021मई
सोम.मंगल.बुध.गुरु.शुक्र.शनि.रवि.
2930311234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293012
3456789

© 2012 सर्वाधिकार सुरक्षित जनसम्पर्क विभाग भोपाल, मध्यप्रदेश             Best viewed in IE 7.0 and above with monitor resolution 1024x768.
Onder's Computer