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जैविक खेती अपनाकर नगला निनामा आत्मनिर्भर बना (सफलता की कहानी)
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झाबुआ | 28-फरवरी-2021
      झाबुआ जिले के पेटलावद तहसील के ग्राम सेमलकुडिया (मोहनकोट) के किसान श्री नगला पिता नाथा निनामा पहले परम्परागत फसलों की खेती करते थे - जैसे कपास, मक्का, गेहूँ, सोयाबिन इत्यादि। जिससे फसलों की लागत भी निकाल पाना कठिन था। वे रेडियों पर नंदाजी, भेराजी समाचार सुनते रहते थे। जिससे उन्हें जैविक खेती के लिए प्रेरणा मिली। जडीबुटि औषधी पौधों के नाम लिखकर रखते थे और उसके अनुसार जैविक खेती करने लगे। सबसे पहले इंदौर में 5 दिन का प्रशिक्षण प्राप्त किया। ऑलविन कम्पनी में जैविक खेती के लिए प्रचार-प्रसार का कार्य किया। प्रशिक्षण प्राप्त कर जैविक खेती के संबंध में अच्छी खासी जानकारी हासिल की। 5 वर्ष किसान मित्र के रूप में जैविक खेती के क्षेत्र में कार्य किया। कृषि विभाग द्वारा उन्नत किसान के रूप में उनका चयन किया गया। वह पेटलावद तहसील में जैविक खेती के लिए किसानों को प्रेरित करने का कार्य किया।
    झाबुआ जिला मुख्यालय पर आयोजित प्रशिक्षण में भाग लिया। जिसमें भोपाल के अधिकारी ने जैविक खेती के लिए फार्म भरवाया। उसके बाद उनके खेत तथा फसल का निरीक्षण किया गया तत्पश्चात उन्हें जैविक खेती का प्रमाण पत्र प्रदाय किया गया। वह भोपाल में आयोजित 5 दिवसिय प्रशिक्षण में भाग लिया। एक बार शासन के खर्चे से प्रशिक्षण प्राप्त किया।
     उद्यानिकी विभाग की सलाह पर वर्ष 2015-16 में वर्मी कम्पोस्ट युनिट स्थापित की और अमरूद के पौधे लगाए। विभाग से अनुदान पर इलाहाबादी सफेद, लखनउ - 49 अमरूद की जैविक खेती ड्रिप के साथ शुरू की। जिससे 1 एकड़ क्षेत्र से 25 हजार से 30 हजार रूपये की आमदनी प्राप्त होती थी। साथ ही पपीता, गोभी, मिर्च, गेंदा, हल्दी की अन्तरवर्तीय (इंटरक्रोपिंग) फसल ली। जिस पर 20 से 25 हजार रूपये की लागत आ जाती है और उससे 1 लाख से 1 लाख 20 हजार रूपये की अतिरिक्त आमदनी प्राप्त कर लेते हैं। खेती में घर के ही सदस्य कार्य करते हैं। वे वर्षभर में 3 फसलें लेते हैं और 70 हजार रूपये खेती की लागत आती है। उन्हें 2 लाख रूपये की शुद्ध आय प्राप्त हो जाती है। अब उनके परिवार की आर्थिक स्थति एवं जीवन स्तर में बदलाव आया है और परिवार के लालन-पालन अच्छी तरह से करने के साथ ही बच्चों की पढ़ाई पर भी ध्यान दे पा रहे हैं।
 
(44 days ago)
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