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किसानों को उन्नत तकनीकी के साथ औषधीय खेती भी जानकारी दें - मंत्री डॉ. मिश्र
दतिया में 12 वर्षो के अंदर कृषि उपत्पादन में हुई बढ़ोत्तरी
दतिया | 28-फरवरी-2021
      मध्यप्रदेश शासन के गृह, जेल, संसदीय कार्य एवं विधि विधायी कार्य विभाग के मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने किसानों से कहा कि कृषि विज्ञान केन्द्र के माध्यम से कृषि की उन्नत एवं आधुनिक तकनीकी की जानकारी प्राप्त करें। कृषि विज्ञान केन्द्र की भी जबावदारी है कि केन्द्र के कृषि वैज्ञानिक एवं अधिकारी गांव-गांव में जाकर कृषकों को परम्परागत फसलों के साथ औषधी पौधों की खेती के रूप में सफेद मूसली, अश्वगंधा एवं मशरूम आदि फसले लेने हेतु उन्हें प्रोत्साहित करें। जिससे खेती लाभ का धंधा बन सके।
    गृह मंत्री डॉ. मिश्र शनिवार को कृषि विज्ञान केन्द्र दतिया में अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत् किसान संगोष्ठी एवं बीज भण्ड़ार के लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। गृह मंत्री ने इस मौके पर कृषकों का सम्मान कर कृषि उपकरण प्रदाय किए।
    कार्यक्रम में राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर के कुलपति प्रोफेसर डॉ. एसके राव, अनुसंधान सेवा के निर्देशक डॉ. एनपी जैन, कृषि महाविद्यालय ग्वालियर की डीन डॉ. रीति सिंह, कृषि महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. उमेश सिंह, कृषि विज्ञान केन्द्र दतिया के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं केन्द्र प्रमुख डॉ. पुनीत कुमार सहित कृषि विज्ञान केन्द्र दतिय एवं अन्य केन्द्रों के वैज्ञानिक, अधिकारी एवं जनप्रतिनधि उपिस्थत थे।  
गृह मंत्री डॉ. मिश्र ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि 12 वर्ष पूर्व दतिया कृषि उपज मंडी में गेंहूॅ दो हजार क्विंटल आता था जो अब बड़कर 50 हजार क्विंटल हो गया है। जबकि धान की आवक 60 से 70 हजार क्विंटल हो गई है। इसके पीछे कृषि की आधुनिक पद्धति के साथ किसानों की मेहनत एवं कृषि वैज्ञानिकों की सलाह रही है। उन्होंने कहा कि कृषि अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिकों की टीम द्वारा कृषि विज्ञान केन्द्र के कार्यो का मूल्यांकन कर उत्कृष्ट पाए जाने पर दतिया का केन्द्र देश में प्रथम स्थान पर रहा हैं यह केन्द्र मध्यप्रदेश के सबसे अच्छे केन्द्रों में से एक केन्द्र है।
मंत्री डॉ. मिश्र ने कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों से कहा कि किसानों को केन्द्र पर प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन देने के साथ गांव-गांव में जाकर शिविर एवं संगोष्ठियों के माध्यम से कम लागत में अधिक उत्पादन लेने तथा किसानों की आय दोगुनी करने तथा खेती लाभ का धंधा बने इसके लिए कृषकों को जानकारी देनी होगी। उन्होंने कहा कि कृषकों को परम्परागत फसलांे के साथ फलोद्यान, फ्लिोरीकल्चर औषधी पौधों की खेती के रूप में सफेद मूसली, अश्वगंधा की खेती लेने हेतु भी प्रेरित करना होगा। औषधीय खेती की मांग को देखते हुए किसानों को इस दिशा में रूझान बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा कि इन औषधी फसलों पर मौसम का भी प्रतिकूल असर नहीं पड़ता है।
मंत्री डॉ. मिश्र ने किसानों से कहा कि वह सब्जी की खेती के रूप में ब्रोकली एवं मशरूम की खेती करें इस खेती से अन्य सब्जियों की अपेक्षा अधिक दाम प्राप्त कर सकते है।  कृषि वैज्ञानिक इन सब्जियों के उत्पादन हेतु तकनीकी सलाह देकर कृषकों को भी प्रेरित करें।
मंत्री डॉ. मिश्र ने कहा कि कृषि विज्ञान केन्द्र जो अव्वल बना हुआ है। उसे केन्द्र के वैज्ञानिक एवं अधिकारी वरकरार रखते हुए केन्द्र द्वारा किए गए कार्यो को किसानों के बीच में प्रचार-प्रसार भी करें। जिससे किसान लाभ लेकर अधिक उत्पादन ले सके।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. एसके राव ने कहा कि 15 वर्षो के दौरान कृषि के क्षेत्र में काफी बदलाव देखने को मिला है। कृषकों ने उन्नत एवं आधुनिक तकनीकी तथा फसलों के बेहतर किस्म के बीजों का उपयोग कर कृषि का पैर्टन भी बदला है। किसान अब परम्परागत फसलांे के स्थान पर फल, सब्जी, मसाले एवं औषधी पौधों तथा बागवानी फसले लगाकर अधिक उत्पादन एवं दोगुनी आय ले रहे है।  
प्रोफसर राव ने कहा कि कृषि विज्ञान केन्द्र के माध्यम से किसानों को खेती में कम लागत में अधिक आय लेने, जैविक खेती, उद्यानिकी फसले लेने, वरमीकल्चर, सही बीजों का चयन आदि की भी जानकारी भी समय-समय पर विभिन्न माध्यमों से दी गई है।
कार्यक्रम के तहत् तकनीकी सत्र के दौरान डॉ. एपी जैन, डॉ. एसएन उपाध्याय, डॉ. एके भार्गव, श्री जीएस गोरख, श्री सर्वेश तिवारी आदि ने भी संबोधित किया।
इस अवसर भाजपा जिलाध्यक्ष श्री सुरेन्द्र बुद्यौलिया, पूर्व विधायक डॉ. आशाराम अहिरवार सर्वश्री पंकज शुक्ला, विपिन गोस्वामी, योगेश सक्सैना, प्रशांत ढेंगुला, श्रीमती रजनी पुष्पेन्द्र रावत, पंकज गुप्ता, अतुल भूरे चौधरी सहित अन्य जनप्रतिनिधि, कृषि वैज्ञानिक, अधिकारी, किसान व गणमान्यजन उपस्थित थे।  
 
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