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काले गेहूँ से किस्मत बदलेंगे किसान श्री ईश्वर मेवाड़ा - खुशियों की दास्ताँ
प्रयोग के तौर पर एक हेक्टेयर में बोया है काला गेंहूँ
शाजापुर | 04-मार्च-2021
   जिले की गुलाना तहसील के ग्राम सलसलाई निवासी किसान श्री ईश्वर मेवाड़ा ने परम्परा से हटकर सोने जैसे दिखने वाले गेहूँ के स्थान पर काले गेहूँ की खेती कर किस्मत बदलने का निश्चय किया है। प्रायोगिक तौर पर उन्होंने इस रबी सीजन में एक हेक्टेयर में काला गेहूँ बोया है। इस वर्ष यदि उन्हें इससे अच्छा फायदा होगा तो वे अगले वर्ष अपनी पूरी जमीन पर रबी सीजन में काले गेहूँ की खेती करेंगे। 
   श्री मेवाड़ा ने बताया कि उन्हें काले गेहूँ की खेती की प्रेरणा क्षेत्र के ग्राम मण्डावल के प्रगतिशील कृषक श्री शरद भण्डावत से प्रेरणा मिली है और बीज भी उनसे ही प्राप्त किया था। साथ ही खास बात है कि वे काले गेहूँ के लिए किसी तरह के रासायनिक खाद या दवाई का उपयोग नहीं कर रहे है। उत्पादकता बढ़ाने के लिए उन्होंने केचुँआ खाद एवं जैव अमृत (गौ-मूत्र, छाछ एवं निम्बोंली) घोल का प्रयोग कर फसल की कीट व्याधि दूर कर रहे है। इस तरह रासायनिक खाद एवं दवाईयों के उपयोग नहीं करने के कारण उनकी फसल की लागत भी कम हो गई है। उन्होंने एक हैक्टेयर क्षेत्रफल में 80 किलोग्राम बीज की बुआई की है। श्री मेवाड़ा ने बताया कि एक हैक्टेयर क्षेत्र में लगभग 60 क्विंटल के उत्पादन का अनुमान है। जबकि साधारण गेंहू औसतन 40 से 45 क्विंटल ही निकल पाता है। ऐसे में जहां इस काले गेहूँ की पैदावार अधिक है वहीं इसकी कीमत भी लगभग दोगुनी है। इस प्रकार आमदनी दो गुनी करने के लिए भी यह बेहतर विकल्प है।
पौष्टिक होते हैं
      साधारण गेहूँ की तुलना में काला गेहूं चार गुना ज्यादा गुणवत्ता वाला है। खास बात है कि यह गेहूं पौष्टिक होने के साथ-साथ इसमें कई औषधीय गुणयुक्त हैं, जो कैंसर, ब्लड प्रेशर, मोटापा, शुगर समेत कई बीमारियों से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है। इस गेहूं में जिंक एवं आयरन, एन्थ्रो ऑक्सीजन की मात्रा साधारण गेहूं से 15 से 20 गुना अधिक होती है। यह शरीर में उपस्थित विषैले तत्वों को बाहर करता है। शुगर की मात्रा कम होने से यह शुगर के रोगियों के लिए लाभदायक है।
काले रंग की वजह एंथोसाएनिन
   फलों, सब्जियों और अनाजों के रंग उनमें मौजूद प्लांट पिगमेंट या रजक कणों की मात्रा पर निर्भर होते हैं। काले गेहूं में एंथोसाएनिन नाम के पिगमेंट होते हैं। एंथोसाएनिन की अधिकता से फलों, सब्जियों, अनाजों का रंग नीला, बैगनी या काला हो जाता है। एंथोसाएनिन नेचुरल एंटीऑक्सीडेंट भी है। इसी वजह से यह सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। आम गेहूं में एंथोसाएनिन महज पांच पीपीएम होता है, लेकिन काले गेहूं में यह 100 से 140 पीपीएम के आसपास होता है। एंथोसाएनिन के अलावा काले गेहूं में ङ्क्षजक और आयरन की मात्रा में भी अंतर होता है। काले गेहूं में आम गेहूं की तुलना में 60 फीसदी आयरन अधिक है। हालांकि, प्रोटीन, स्टार्च और दूसरे पोषक तत्व समान मात्रा में होते हैं।
(46 days ago)
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