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जिला :: मुरैना
मुरैना का इतिहास
1/9/2012 8:39:55 AM

 
          मुरैना मयूरवन का विकसित रूप है इस अंचल मे मयूर पंक्षियों का बाहुल्य था, इस कारण इसे मयूरवन कहते थे मयूरवन विकसित होकर मोरवन मोरोन मोरोना मोरेना मुरैना हो गया मुरैना नगर से 5 कि.मी. दूर मुरैना गांव है यहि वास्तविक मुरैना है यह गांव आज भी कृष्ण की नागलीला की स्मृति को तरोताजा बनाये हुए है यहां पर कार्तिक सुदी प्रतिपदा को नागलीला का मेला लगता है

          जी.आई.पी. रेल्वेलाइन के कारण सन् 1876 में बर्तमान मुरैना नगर की नींव पडी थी श्रीमंत माधवराव सिंधिया प्रथम ने विडला कोटन मिल ग्वालियर के लिए रूई की आपूर्ति हेतु इस क्षेत्र में कपास की कृषि को प्रोत्साहित किया था कपास से रूई निकालने के लिए रेल्वे स्टेशन के समीप भी पेंच (रूई तथा विनोले अलग-अलग करने के यंत्र) लगवाये गए थे इसी कारण रेल्वे स्टेशन के समीप वस्ती को पेंच मुरैना कहने लगे सन् 1904 में ग्वालियर राज्य के सिकरवारी जिले को तंवरघार जिले में मिला दिया गया और उसका जिला मुख्यालय जौरा अलापुर बनाया सन् 1923 में तंवरघार जिले का मुख्यालय मुरैना कर दिया गया सन् 1937 में तंवरघार जिले का नाम परिवर्तित कर मुरैना जिला कर दिया गया 11 फरवरी 1974 को चंबल संभाग के गठित होने पर मुरैना संभाग मुख्यालय हो गया।

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