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जिला :: बालाघाट
बालाघाट जिले का इतिहास
1/25/2012 8:44:23 AM
 

      लार्ड डलहौजी ने 1845 में गोद लेने की प्रथा समाप्त कर भारतीय राज्यों को ब्रिटिश राज्यों में शामिल करना प्रारंभ किया तो उससे गोंडवाना राज्य भी अछूता नहीं रहा। गोंडवाना राज्य भी अंग्रेजों के अधीन आ गया। आज का बालाघाट जिले उस समय गोंडवाना राज्य में शामिल था। ब्रिटिश राज्य के समय इस स्थान का मूल नाम बराहघाट था। उस समय इस क्षेत्र के पहाड़ी ईलाकों को कंजई घाट, सालेटेकरी घाट, भैसानघाट, डोंगरीघाट, रमरमा घाट, टीपागढ़ घाट, कव्हरगढ़ घाट, डोंगरिया घाट के नाम से ही जाना जाता था। देश की तत्कालीन राजधानी कोलकाता में इस स्थान के नामकरण के लिए बराहघाट शब्द ही भेजा गया था। कोलकाता में यह शब्द बदलकर बाराघाट हो गया और जब वहां से इस स्थान का नाम भेजा गया तो अंग्रेजी के आर के स्थान पर एल शब्द आ गया। जिसके कारण इसका नाम बराहघाट के स्थान पर बालाघाट हो गया।

      बालाघाट अंग्रेजों के समय में तत्कानील सेन्ट्रल प्राविन्स का हिस्सा था। जिसकी राजधानी नागपुर थी। 1867 ई. में सेन्ट्रल प्राविन्स के भंडारा, सिवनी एवं मंडला जिले के हिस्सों को मिलाकर बालाघाट जिले का गठन किया गया। इस जिले के मुख्यालय का नाम उस समय बूढ़ा या बुरहा था। जो कालांतर में बालाघाट में तब्दील हो गया। जिस समय इस जिले का गठन किया गया था उस समय इसमें केवल दो तहसील बालाघाट और बैहर थी।

      कहा जाता है कि बालाघाट जिले में पहाड़ी घाटों की संख्या अधिक होने के कारण इसका नाम बालाघाट हो गया है। बालाघाट का अंग्रेजों के पूर्व मराठा शासकों से भी संबंध रहा है। मराठी भाषा में बाला शब्द का अर्थ होता है श्रेष्ठ। यहां पर श्रेष्ठ लोगों(बालाओं) के रहने के कारण इसे बालाओं का घाट बालाघाट कहा गया।

 
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