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जिला :: बालाघाट
बालाघाट जिले की विशेषता
1/25/2012 9:14:35 AM
 

       म.प्र. राज्य का बालाघाट जिला प्राकतिक संसाधनों से परिपूर्ण जिला है। यह म.प्र. राज्य का सर्वाधिक वन क्षेत्र वाला जिला है। इस जिले के 52 प्रतिशत भाग में घने वन है। बालाघाट जिला बांस के वनों के लिए प्रसिध्द है। भारत में यदि सबसे अधिक गुणवत्ता का बांस मिलता है तो वह बालाघाट जिले में मिलता है। विश्व प्रसिध्द कान्हा राष्ट्रीय उद्यान का एक प्रवेश द्वारा मुक्की बालाघाट जिले में स्थित है। मुक्की जिले के तहसील मुख्यालय बैहर से मात्र 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

       बालाघाट जिले को प्रकृति ने भरपूर खनिज संसाधन भी दिये है। बालाघाट जिला मैंगनीज एवं तांबा के लिए प्रसिध्द है। एशिया महाद्वीप का सबसे बड़ा फेरो मैंगनीज प्लांट भरवेली में लगाया गया है। बालाघाट जिले की भरवेली, उकवा, तिरोड़ी माईस मैंगनीज उत्पादन के लिए प्रसिध्द है। मलाजखंड तांबा खदान के लिए प्रसिध्द है।

       बालाघाट वैनगंगा नदी के किनारे बसा है। वैनगंगा नदी को एशिया महाद्वीप की सबसे साफ-सुथरी नदी कहा जाता है। क्योंकि इस नदी के किनारे कोई बड़ा उद्योग स्थापित नहीं है, जो नदी को प्रदूषित करता हो। वैनगंगा नदी में झींगा पाया जाता है। झींगा मछली समुद्र में पायी जाती है। लेकिन यह समूद्र से उल्टी दिशा में चलकर वैनगंगा नदी में आता है।

       बालाघाट म.प्र. राज्य का सर्वाधिक धान उत्पादक जिला है। वैसे तो चावल का उत्पादन देश के अन्य राज्यों में भी होता है। लेकिन स्वाद एचं सुगंध के मामले में वे बालाघाट के चावल के सामने कहीं नहीं टिकते है। बालाघाट जिले का चिन्नौर चावल अपनी अलग पहचान रखता है।

प्रदेश का सर्वाधिक लिंगानुपात वाला जिला

       वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार इस जिले की जनसंख्या 1701156 (सत्रह लाख एक हजार एक सौ छप्पन) बालाघाट म.प्र. राज्य का सर्वाधिक लिंगानुपात वाला जिला है। बालाघाट जिले में प्रति 1000 पुरूषों पर महिलाओं की संख्या 1022 है। बालाघाट देश के सर्वाधिक लिंगानुपात वाले प्रथम 26 जिलों में शामिल है।
 
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