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जिला :: देवास
इतिहास
7/10/2018 6:11:35 AM
   
   
   देवास का इतिहास वास्तव में संधि के फलस्वरूप बने देवास सीनियर तथा जूनियर राज्यों एवं इसको दूसरे अंग जैसे पूर्व होलकर राज्य की कन्नौद और खातेगांव तहसील से सम्बंधित है ।  देवास सीनियर शाखा के संस्थापक तुकोजीराव प्रथम थे जो कि परमार वंश के माने जाते है । इनकी मृत्यु 1753 में हुई । इनके उत्तराधिकारी इनके दत्तक पुत्र कृष्णाजीराव हुए । इन्होने 1761 के पश्चात् 1789 इनके दत्तक पुत्र तुकोजीराव द्वितीय उत्तराधिकारी बने ।
 
  दोनों ही राज्यों को पिण्डारी, सिंधिया तथा होलकर के कारण पतन का सामना करना पड़ा । साथ ही कृष्णाजीराव द्वितीय जो 1860 में   रुकमांगद राव के उत्तराधिकारी हुए थे एक कुशासक सिद्ध हुए जिनके कारण राज्य कर्ज में डूब गया । इनके उत्तराधिकारी तुकोजीराव तृतीय थे जो कि परिवार की अन्य शाखा से दत्तक लिए गए थे । इनकी शिक्षा इंदौर के डेली कॉलेज तथा अजमेर के मेयो कॉलेज में हुई थी तथा इन्हे राजा एवं हिज - हाइनेस की उपाधि तथा 15 तोपो की सलामी का सम्मान प्राप्त था ।
   देवास ने सन 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा की । राघोगढ़ (देवास) के ठाकुर दौलत सिंग ने अंग्रेजो का अत्यंत साहस से सामना किया था उन्हें पकड़ा जाकर गुना छावनी में फांसी पर चढ़ा दिया गया था ।
   जिले के अन्य महत्वपूर्ण भाग में पूर्व होलकर राज्य की कन्नौद एवं खातेगांव तहसील का नेमावर भी है ।   पौराणिक साहित्य में नेमावर का उल्लेख नाभपुर के रूप है ।  नेमावर के समीप ही ग्वाल टेकरी को मणीगिर के नाम से भी जाना जाता है ।
   अकबर के शासनकाल में यह क्षेत्र मालवा सूबा के सरकार हांडिया  में होकर नेमावर पंचमहल के रूप में जाना जाता था , जिसमे पांच परगने, नेमावर , सतवास, राजोर, महाल मुख्यालय थे । यह क्षेत्र पेशवाओ के अधीन भी रहा । 1740-45 के दौरान यह क्षेत्र सिंधिया और होलकर में बंट गया । सिंधिया के पास सतवास तथा होलकर के पास कांटाफोड़ रहा । 1806 के आस पास पिण्डारियों का भी क्षेत्र में रहा । 1904 में हरणगांव नेमावर में एवं सतवास का विलय कांटाफोड़ में हो गया । 1908 में नेमावर को खातेगांव तथा राजोर को कन्नौद नाम दिया गया, कांटाफोड़ को कन्नौद में मिला दिया गया , जिससे की वह नायब तहसीलदार का क्षेत्र मात्र रह गया । 1948 में मध्य भारत के जिले के रूप में आने के पूर्व सोनकच्छ, उज्जैन का तथा नीयनपुर धार का हिस्सा थे । 5 फरवरी 1949 के मध्य - भारत गजट की अधिसूचना के अनुसार जिले को 5 तहसीलो में बांटा गया था । देवास तहसील का गठन देवास सीनियर तथा जूनियर राज्य देवास तहसील का निर्माण देवास सिनियर एवं जूनियर राज्यों के क्षेत्रो को मिलाकर किया गया । देवास सीनियर के खानखेड़ा तथा उमसोद ग्राम को तथा जूनियर के गोयता , टांडा, गुजर बढ़िया को शाजापुर तहसील में मिला दिया गया । सोनकच्छ तहसील पूर्व सोनकच्छ परगना के ग्रामो से बनाई गई । इसके 200 गाँवो को बागली तहसील तथा 26 गाँवो को शाजापुर में मिला दिया गया । इस प्रकार बागली तहसील सोनकच्छ परगने के 200 ग्राम, पूर्व देवास सीनियर के शिवपुर मंडिया, तथा बोरखेड़ा पुरभ्या तथा पूर्व धार राज्य के नियनपुर परगने को मिलाकर बनाई गई । पूर्व होलकर राज्य के कन्नौद एवं खातेगांव तहसील में कोई बदलाव नहीं आया।     
 
मराठा पंवार शासक: देवास सीनियर स्टेट
Sr.No. Name Period
1 Shri Tukoji Rao (Gane Gaonkar) 1732-1754
2 Shri Krishna ji Rao 1754-1789
3 Shri Tukoji Rao ( Baba Sab) 1789-1827
4 Shri Yakmangadrao ( Khase Sab) 1827-1860
5 Shri Krishnaji Rao (Bapu Sab) 1860-1899
6 Shri Tukoji Rao ( Bapu Sab) 1899-1937
7 Shri Vikram Singh Rao ( Nana Sab) 1937-1947
8 Shri Krishna Ji Rao ( Aaba Sab) 1947-till merging of state
 
   
मराठा पंवार शासक: देवास जूनियर स्टेट
Sr.No. Name Period
1 Shri Jiwaji Rao (Tinganikar) 1732-1755
2 Shri Sadashiv Raj 1775-1803
3 Shri Rukmangad Rao 1803-1817
4 Shri Aanand Rao 1817-1840
5 Shri Hebant Rao 1840-1864
6 Shri Narayan Rao ( Dada Sab) 1864-1892
7 Shri Malhar Rao (Khase Sab) 1892-1934
8 Shri Krishna Ji Rao ( Aaba Sab) 1934-1943
8 Shir Yashwant Rao ( Bhau Sab) 1943- till merging of state
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