समाचार
|| जिले के गैर डिफॉल्टर किसानों को ऋण मुहैया कराने के निर्देश || 378 स्थानों पर किसान बाजार बनेगें || सबका यही हो सपना, स्मार्ट सिटी हो उज्जैन अपना || कलेक्टर के निर्देश पर मगाए 50 ट्रांसफार्मर व 200 खंबे || जनसंपर्क मंत्री रोजा अफ्तार में सम्मिलित हुए || जनसंपर्क मंत्री ने पब्लिक स्कूल का फीता काटकर शुभारंभ किया || रथ दोज पर भगवान जगन्नाथ का वित्तमंत्री श्री मलैया ने किया पूजन || रेडक्रास ने बहुत उल्लेखनीय कार्य किये हैं, चाहे वृद्धाश्रम का काम हो, दीनदयाल रसोई का काम हो-वित्तमंत्री जयंत मलैया || ग्राम कछौआ में किसान सम्मेलन || सच्ची लगन, मेहनत और मार्गदर्शन से प्रतिभायें उभरती हैं – श्री पवैया
अन्य ख़बरें
पवित्र नदियों के शुद्धिकरण के लिये जागरूकता आवश्यक
नर्मदा को प्रदूषण से मुक्त कराना जरूरी - पर्यावरणविद् डॉ.शर्मा
इन्दौर | 17-फरवरी-2017
    राज्य शासन द्वारा नमामि देवि नर्मदे अभियान के तहत विशेष आमंत्रित विद्वान और अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरणविद् डॉ.सुबोध कुमार शर्मा (नेपाल) ने आज रेसीडेंसी सभाकक्ष में पत्रकारों से चर्चा करते हुये बताया कि हमारे देश में पवित्र नदियों को शुद्ध करने के लिये दृढ़ इच्छाशक्ति जरूरी है। पवित्र नदी जिन्हें हम माता और देवी के रूप में पूजते हैं, उसमें शहरों का गन्दा पानी मिला रहे हैं। यह पानी भूमि और वायु दोनों तरह का प्रदूषण पैदा कर रहा है। या तो हम नदियों की पूजा करना छोड़ दें या फिर उन्हें प्रदूषित करना बंद कर दें। बढ़ती हुई आबादी और बढ़ता हुआ शहरीकरण ही नदियों को प्रदूषण के लिये पूरी तरह जिम्मेदार है। उन्होंने पत्रकारों से चर्चा करते हुये कहा कि एशियाई देशों में बढ़ती हुई आबादी के कारण छोटी-मोटी नदियों का अस्तित्व समाप्त हो गया है, उसमें इंदौर की खान नदी भी शामिल है। हम शहरी लोग अपने निहित स्वार्थ के खातिर नदियों को गंदे नाले के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन का संबंधी सीधा मनुष्य के अस्तित्व से संबंधित है। मनुष्य के अस्तित्व को बनाये रखने के लिये भूमि,जल और वायु प्रदूषण को रोकना होगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में धरती का तापक्रम बढ़ेगा जिसके कारण गंगा सदृश बर्फ पोषित नदियों में पानी बढ़ेगा मगर झरना पोषित नर्मदा जैसी नदियों में जल स्तर घटेगा। उन्होंने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण और धरती के बढ़ते तापमान के कारण वर्षा अनियमित होगी। पहाड़ों पर वर्षा ज्यादा होगी और मैदानों पर कम होगी। पहाड़ी क्षेत्रों के लोग बाढ़ और भू-स्खलन के कारण मैदानी इलाकों में पलायन करने लगे हैं।
    उन्होंने कहा कि नर्मदा जैसी पवित्र नदियों से प्रदूषण से मुक्त करने के लिये दोनों किनारों पर सघन वृक्षारोपण जरूरी है। इसके अलावा नर्मदा नदी और उसकी सहायक नदियों के किनारे पर बसे नगर अपना कचरा नदियों में छोड़ने के बजाय सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाकर उसे शुद्ध करें और उस पानी का सिंचाई में इस्तेमाल करें। नदियों के प्रदूषण से जीव-जंतु भी मर रहे हैं। जीव-जंतुओं के अस्तित्व के लिये नर्मदा नदी में रेत उत्खनन के लिये रोक लगाना जरूरी है। बढ़ती हुई आबादी को देखते हुये मैदानी इलाकों में छोटी-छोटी नदियों पर छोटे-छोटे बांध बनाने की जरूरत है। नदियों का पानी रेत और मछली से शुद्ध होता है। मछली कीड़े-मकोड़ों को खाती है और रेत भी पानी शुद्धिकरण का काम करता है। उन्होंने कहा कि सभी सरकारों को निश्चित रूप से नदियों को प्रदूषण से बचाना होगा। पिछले 30 साल में शोध के बाद यह निष्कर्ष निकला है कि धरती का तापमान 0.6 प्रतिशत बढ़ा है, जिसके कारण जल और धरती के लगभग 10 प्रतिशत जीव समाप्त हो चुके हैं। पर्यावरण शुद्ध के लिये जीव जंतुओं का अस्तित्व बनाये रखना जरूरी है। इसके अलावा लोगों को मंसाहारी होने के बजाय शाकाहारी होना जरूरी है।
    एक प्रश्न के उत्तर में "अलनीनो" की व्याख्या करते हुये कहा कि समुद्र का पानी गर्म होकर भाप बनता है और वह भाप बादल बनकर मैदानी इलाकों में वर्षा करती है। मगर बढ़ती हुई आबादी और बिगड़ते हुये पर्यावरण के कारण धरती का वातावरण गर्म होता जा रहा है, जिसके कारण भारी वर्षा, बाढ़ और अनियमित वर्षा की स्थिति निर्मित हो गयी है। समुद्र का पानी समुद्र में ही बरस रहा है। संतुलित वर्षा के लिये आबादी और जंगल का अनुपात ठीक होना जरूरी है। वृक्षारोपण के लिये सरकारों द्वारा जनजागरूकता अभियान चलाना जरूरी है।
 
(129 days ago)
डाउनलोड करे क्रुतीदेव फोन्ट में.
डाउनलोड करे चाणक्य फोन्ट में.
पाठकों की पसंद

संग्रह
मईजून 2017जुलाई
सोम.मंगल.बुध.गुरु.शुक्र.शनि.रवि.
2930311234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293012
3456789

© 2012 सर्वाधिकार सुरक्षित जनसम्पर्क विभाग भोपाल, मध्यप्रदेश             Best viewed in IE 7.0 and above with monitor resolution 1024x768.
Onder's Computer