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स्वाइन फ्लू की रोकथाम के लिए सतर्कता बरतें
जिला टास्क फोर्स समिति की बैठक सम्पन्न
नरसिंहपुर | 11-सितम्बर-2017
 
   मौसमी बीमारियों स्वाइन फ्लू, डेंगू, चिकुनगुनिया, मलेरिया के नियंत्रण एवं बचाव के उद्देश्य से कलेक्टर डॉ. आरआर भोंसले की अध्यक्षता में जिला टास्क फोर्स समिति की बैठक कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में सोमवार को सम्पन्न हुई। बैठक में स्वाइन फ्लू, डेंगू, चिकुनगुनिया, मलेरिया की रोकथाम के लिए सतर्कता बरतने और मच्छरों की पैदावार रोकने पर जोर दिया गया। इन बीमारियों से बचाव के लिए सुरक्षात्मक एहतियाती उपाय करने की समझाइश दी गई है।
प्रायवेट अस्पतालों में भी स्वाइन फ्लू की दवाईयां उपलब्ध करायें
   कलेक्टर ने बैठक में निर्देश दिये कि स्वाइन फ्लू की रोकथाम के लिए सभी सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ प्रायवेट अस्पतालों में भी स्वाइन फ्लू के उपचार के लिए आवश्यक दवाईयां उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जावे। डेंगू, चिकुनगुनिया रोग से बचाव के लिए प्रत्येक सोमवार को ड्राय-डे मनाने के निर्देश सभी कार्यालय प्रमुखों को दिये। उन्होंने कहा कि इस दिन सभी कार्यालयों एवं घरों में लार्वा सर्वे कर सभी कंटेनरों, कूलरों आदि की सफाई करने के बाद उन्हें पुन: भरें। डॉ. भोंसले ने झोलाछाप डॉक्टरों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिये। उन्होंने इन रोगों से बचाव के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए ग्रामीण एवं शहरी सभी क्षेत्रों में व्यापक प्रचार-प्रसार कराने पर जोर दिया।
   बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जीसी चौरसिया ने मौसमी बीमारियों एवं डेंगू, चिकुनगुनिया, स्वाइन फ्लू रोगों के नियंत्रण एवं बचाव के लिए आवश्यक उपायों की जानकारी दी और लोगों से एहतियात बरतने के लिए कहा गया।
लक्षण होने पर तुरंत जांच करायें
   बैठक में सिविल सर्जन डॉ. विजय मिश्रा ने बताया कि लोगों को यदि स्वाइन फ्लू के लक्षण जैसे सर्दी, जुकाम, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द और बुखार के साथ सांस लेने में तकलीफ हो, तो तत्काल सरकारी अस्पताल में जाकर तुंरत अपनी जांच करवायें। यदि स्वाइन फ्लू बीमारी पाई जाती है, तो एहतियात बरतते हुए पूर्ण इलाज करवायें।
   स्वाइन फ्लू (एच- 1, एन- 1) वायरस संक्रमण से होने वाली बीमारी है। सामान्यत: इसका संक्रमण संक्रमिक व्यक्ति की छींक, खांसी आदि के सम्पर्क में आने से होता है। स्वाइन फ्लू का संक्रमण जुलाई से फरवरी माह के बीच ज्यादा सक्रिय रहता है। इस अवधि में स्वाइन फ्लू के लक्षण मिलने पर लापरवाही नहीं बरतें और डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
   स्वाइन फ्लू के ए-केटेगिरी के मरीजों को टेमी फ्लू की आवश्यकता नहीं पड़ती है। वे साधारण सर्दी, जुकाम का इलाज ले सकते हैं। बी- केटेगिरी के मरीजों को टेमी फ्लू दी जाना है। इन मरीजों को घर पर ही आराम करने की सलाह दी गई है। सी- केटेगिरी के मरीजों को सांस में तकलीफ होने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कर उनका उपचार किया जायेगा। ए एवं बी- केटेगिरी के मरीजों से संबंधित सेम्पल की जांच अनिवार्य नहीं है, जबकि सी- केटेगिरी के मरीजों के उपचार के पहले सेम्पल लेना जरूरी है। ऐसे रोगियों के थ्रोट श्वाब परीक्षण के लिए मेडिकल कॉलेज जबलपुर की प्रयोग शाला में भेजे जाते हैं।
   लोगों को बताया गया कि 90 प्रतिशत मरीजों को साधारण सर्दी, जुकाम एवं बुखार होता है। दो वर्ष से कम और 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों और गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। ऐसे मरीजों को डॉक्टर से तत्काल सम्पर्क कर इलाज शीघ्रता से शुरू करना चाहिये। स्वाइन फ्लू से बचने के लिए सलाह दी गई है कि लोग भीड़- भाड़ वाले इलाके में जाने से बचें। सर्दी, जुकाम, बुखार से पीड़ित लोगों से हाथ नहीं मिलायें और गले नहीं मिलें। अपने हाथ को मुंह में नहीं लगायें। खाने से पहले अपने हाथ साबुन-पानी से अच्छी तरह से साफ करें। स्वाइन फ्लू से लोगों को डरने की कोई जरूरत नहीं है। इस संबंध में जागरूक रहने से स्वाइन फ्लू से पूरी तरह बचाव किया जा सकता है।
डेंगू, चिकुनगुनिया से बचाव के लिए मच्छरों की पैदावार रोकना जरूरी
   बैठक में जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. विजय कुमार तुरकर ने बताया कि मलेरिया, डेंगू, चिकुनगुनिया से बचाव के लिए मच्छरों की पैदावार एवं फैलाव को रोकना जरूरी है। मच्छरों के काटने से बचकर एवं मच्छरों की पैदावार को रोककर इन रोगों से बचा जा सकता है।
   देश के अनेक राज्यों में मच्छरों से होने वाले रोग बड़ी संख्या में पाये गये हैं। डेंगू के मरीज इन राज्यों में पाये गये हैं। डेंगू प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले लोगों के कारण डेंगू का संक्रमण हो सकता है। डेंगू से बचाव के लिए इसके वाहक एडीज मच्छर की पैदावार को रोकना जरूरी है। मच्छर के काटने से बचने एवं इसके फैलाव को रोकने की सलाह लोगों को दी गई।
   लोगों को बताया गया कि एडीज मच्छर साफ पानी में होता है। टंकी, कूलर, ड्रम, मटका, फूलदान, टायलेट की टंकी, छत पर रखे अनुपयोगी सामान, टायर, अनुपयोगी कंटेनरों आदि में एडीज मच्छर पैदा होता है। इसके लिए टंकी आदि को ढंक कर रखने की सलाह दी गई है, जिससे मच्छर इसमें प्रवेश कर अंडे नहीं दे सकें। सलाह दी गई है कि कूलर की नियमित सफाई करें। पानी का संचय 7 दिवस से अधिक अवधि के लिए नहीं करें। एडीज मच्छर दिन में काटता है। इससे बचने के लिए पूरी बांह के कपड़े पहनें। मच्छरों से बचाव के लिए सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें।
   डेंगू के मुख्य लक्षण तेज बुखार, सिर दर्द, आंखो के पीछे दर्द, जोड़ों एवं शरीर में दर्द, शरीर पर दाने निकलना आदि हैं। ये लक्षण होने पर तुरंत डॉक्टर से सम्पर्क करें। डेंगू एवं चिकुनगुनिया का कोई विशिष्ट उपचार नहीं है, केवल लक्षण आधारित उपचार किया जाता है। लोगों से कहा गया है कि वे स्वयं किसी प्रकार का उपचार नहीं लें, उपचार के लिए डॉक्टर से सम्पर्क करें। अधिकांश मामलों में डेंगू एक सप्ताह में ठीक हो जाता है। कुछ मामलों में यह गंभीर भी हो सकता है। मच्छरों से बचाव एवं उनकी पैदावार को रोककर मलेरिया, डेंगू, चिकुनगुनिया से बचा जा सकता है।
   जिला ऐपिडेमोलॉजिस्ट गुलाब खातरकर ने स्वाइन फ्लू, डेंगू व चिकुनगुनिया से बचाव के लिए इसके रोगों की जानकारी तत्काल उपलब्ध कराने की अपील की, ताकि तत्परता से आवश्यक प्रतिबंधात्मक उपाय किये जा सकें।
   बैठक में अपर कलेक्टर जे समीर लकरा, एसडीएम महेश कुमार बमनहा, डिप्टी कलेक्टर वंदना जाट, प्रायवेट डॉक्टर, विभिन्न विभागों के जिला अधिकारी और अन्य अधिकारी मौजूद थे।
 
(72 days ago)
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