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मानवाधिकार विषय पर संगोष्ठी का किया गया आयोजन
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शहडोल | 13-सितम्बर-2017
 
   
 
   ‘‘म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार तथा जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण शहडोल श्री आर.के. सिंह के निर्देशानुसार आज जिला न्यायालय परिसर शहडोल में स्थित ए.डी.आर. सेन्टर भवन में मानव अधिकार एवं म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के संबंध में विचार गोष्ठी का अयोजन किया गया जिसमें न्यायाधीशगण प्रशासनिक अधिकारी जिला अधिवक्ता संघ की कार्यकारणी के सदस्य, म.प्र. राज्य अधिवक्ता परिषद के उपाध्यक्ष मानव अधिकार कार्यकर्ता पैनल अधिवक्ता प्रशिक्षित मध्यस्थ पैरालीगल वालेंटियर एवं अधिवक्तागण भाग लिये। कार्यक्रम को अधिवक्ता श्री अनुपम श्रीवास्तव श्रीमती उर्मिला मिश्रा राज्य अधिवक्ता परिषद के उपाध्यक्ष श्री डी.एन. पाठक मुख्य न्यायिक मजिस्टेट श्री आर. प्रजापति प्रथम अति. जिला न्यायाधीश श्री अविनाश चंद्र तिवारी ने संबोधित किया। राज्य अधिवक्ता परिषद के उपाध्यक्ष श्री डी.एन. पाठक ने गोष्ठी में अपने विचार व्यक्त करते हुये कहा कि मानव को मानव होने के नाते जो अधिकार प्राप्त हैं वो मानव अधिकार हैं। भारतीय संविधान के भाग 3 में जो मौलिक अधिकार उपबंधित किये गये है वे वास्तव में मानव अधिकार ही हैं। मानव अधिकारों के पश्चिमी देशों की संकल्पना मुस्लिम देशों की संकल्पना तीन तलाक निजता के अधिकार जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करते हुये मानव अधिकारों के संरक्षण में न्यायिक व्यवस्था का उल्लेख किया। उन्होंने कहा यदि संविधान के भाग 3 में उपबंधित मानव के किसी मौलिक अधिकार का उल्लंघन होता है तो वह अनुच्छेद 32 के अंतर्गत सवोच्च न्यायालय से और अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालयों से अपने अधिकारों का प्रवर्तन करा सकता है।
    मुख्य वक्ता के रूप में अति. जिला न्यायाधीश श्री अविनाशचंद्र तिवारी ने मानवाधिकार पर उसके जन्म विकास और वर्तमान स्थिति तक तथा मानवाधिकारों के संरक्षण में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा मानव अधिकार आज दुनिया में अत्यंत प्रचलित अवधारणा है किन्तु इसके अर्थ और उद्देश्य के बारे में विभिन्न लोग विभिन्न मत रखते हैं कौन सा अधिकार मानव अधिकार है अथवा नही यह उस देश का संविधान और कानून निर्धारित करते हैं।
    प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के आधार पर मानव को मानव होने के नाते जो अधिकार प्राप्त हैं वह मानव अधिकार हैं। सन 1914 के प्रथम विश्व युद्ध में हुये नर संहार ने मानवता को विश्व शांति एवं मानव कल्याण के लिये सोचने पर विवश किया और उसका परिणाम हुआ कि वर्ष 1920 में लीग ऑफ नेशंस नाम की संस्था का जन्म हुआ। किन्तु विश्व शांति मानव  अधिकारों के संरक्षण में यह संस्था कोई विशेष भूमिका नहीं अदा कर सकी और दो दशक पश्चात ही द्वितीय विश्व युद्ध छिड़ गया। 6 और 9 अगस्त 1945 को क्रमशः जापान के हिरोशिमा और नागासाकी मे गिराए गए परमाणु बम से विश्व शांति मानव कल्याण और मानव अधिकारों की संकल्पना पुनः तार-तार हुई। द्वितीय विश्व युद्ध की घटना ने विश्व के उद्देश्यों को इस दिशा में सोचने पर मजबूर किया और 24 अक्टूबर 1945 को एक अंतराष्टीय संस्था संयुक्त राष्ट संघ अस्तित्व में आई। संयुक्त राष्ट संभा के पेरिस अधिवेशन में 10 दिसम्बर 1948 को मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा हुई। मानव अधिकारों के सार्वभौमिक घोषणा की उद्देशिका मानव गरिमा, स्वतंत्रता, न्याय और विश्व शांति स्थापित करने का संकल्प उदघोषित करती है। मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा 1948 के अनुच्छेद 2 से 21 तक सिविल और पोलिटिकल राईटस की बात कही गई जिसके अंतर्गत जीवन जीने का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, समता का अधिकार, निजता का अधिकार आदि से संबंधित अधिकार वर्णित किये गये। इसी प्रकार अनुच्छेद 22 से लेकर 27 तक आर्थिक और सामाजिक अधिकारों का वर्णन किया गया। जिसके अंतर्गत सामाजिक सुरक्षा का अधिकार कार्य करने का अधिकार शिक्षा का अधिकार सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने का अधिकार शामिल है।
    भारतीय परिप्रेक्ष्य में भारतीय संविधान का भाग 3 जोकि मूल अधिकार के रूप में जाना जाता है। मानवाधिकार की सार्वभौमिक घोषणा 1948  में वर्णित सिविल और पोलिटिकल राईटस को संनिहित करता है। इसी प्रकार भारतीय संविधान का भाग 4 मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा 1948 के इकोनामिक सोशल और कल्चरल राईटस को राज्य के नीति निदेशक तत्वों के रूप में वर्णित करता है। भारतीय संविधान की उद्देशिका भारत के नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय विचार अभिव्यक्ति और विश्वास की स्वतंत्रता सामानता और बंधुत्व की भावना सुनिश्चित करने की बाध्य करती है। हर एक व्यक्ति समान मानवीय गरिमा के साथ पैदा हुआ है और हर एक मानव को इस प्रकार से आचरण करना चाहिए कि जिससे भाईचारा और समरसता पैदा हो। भारत में मानव अधिकारों के संरक्षण में न्यायालयों राष्टीय मानव अधिकार आयोग एवं राज्य मानव अधिकार आयोगों की महत्वपूर्ण भूमिका है । वर्ष 1993 में बारह अक्टूबर को राष्टीय मानव अधिकार आयोग जो कि नई दिल्ली में स्थित है अस्तित्व में आया । मानव अधिकारों का संरक्षण अधिनियम 1993 के अंतर्गत 13 सितम्बर 1995 को मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग स्थापित हुआ जो कि भोपाल में स्थित है।
    आज की गोष्ठी का विषय है मान अधिकारों के संरक्षण में मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की भूमिका म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 की धारा 6 के अंतर्गत 9 नवम्बर 1995 को अस्तित्व में आया। जिसका मुख्य कार्यालय साउथ सिविल लाईन्स जबलपुर में स्थित है। विधिक सेवा अधिनियम की प्रस्तावना समाज के कमजोर वर्गों को यह सुनिश्चित करती है कि आर्थिक या अन्य निर्योग्यता के कारण कोई नागरिक न्याय प्राप्त करने के अवसर से वंचित न रह जाये। इसलिये निःशुक्ल और सक्षम विधिक सहायता उपलब्ध कराने के लिये विधिक सेवा प्राधिकरण का गठन किया जाये और यह सुनिश्चित किया जाये कि विधिक प्रणाली का प्रवर्तन समान अवसर के आधार पर न्याय का सर्वधन करे।
    म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण राज्य के 50 जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों एवं विधिक सेवा समितियों के माध्यम से राष्टीय विधिक सेवा प्राधिकरण एवं म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं का क्रियान्वयन कर न केवल जरूरतमंद लोगों को विधिक सलाह एवं सहायता प्रदान करता है बल्कि समाज में लोगों को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक कर उन्हें मानवीय गरिमा के साथ जीवन में प्रगति करने के लिये विधिक रूप से जागरूक बनाता है। म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण विधिक साक्षरता शिविरों लोक अदालतों, लीगल एड क्लीनिक्स एवं अन्य संचालित योजनाओं के माध्यम से तथा पैनल लायर्स मध्यस्थों ओर पैरालीगल वालेंटियर्स के सहयोग से न्याय सबके लिये की संकल्पना को साकार करते हुये मानव अधिकारों के संरक्षण में अपनी महती भूमिका अदा कर रहा है।
    कार्यक्रम के अंत में जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री बी.डी. दीक्षित ने गोष्ठी में उपस्थित न्यायाधीशगण राज्य अधिवक्ता परिषद के उपाध्यक्ष जिला अधिवक्ता संघ के सचिव एवं कार्यकारिणी के सदस्यों पैनल अधिवक्ताओं प्रशिक्षित मध्यस्थों पैनल अधिवक्ताओं मानव अधिकार कार्यकर्ताओं और पैरालीगल वालेंटियर्स का धन्यवाद ज्ञापित किया।
(67 days ago)
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