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मानव अधिकार के संरक्षण हेतु जन जागरूकता फैलाएं
संविधान में प्राप्त अधिकार से वंचित करना मानव अधिकार का उल्लंघन होगा- जिला एवं सत्र न्यायाधीश
उमरिया | 14-सितम्बर-2017
 
  
   मानव अधिकार संरक्षण के संबंध में श्री के पी सिंह जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अध्यक्षता में बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में मानव अधिकार के संरक्षणों पर विशेष चर्चा की गई। श्री सिंह ने कहा कि मानव अधिकारों से अभिप्राय प्राण, स्वतंत्रता, समानता और व्यक्ति की गरिमा से संबंधित ऐसे अधिकार है जो संविधान द्वारा प्राप्त है।
   बैठक में एडीजे श्री सुरेंद्र कुमार, ज्यूडीशियल मजिस्ट्रेट श्री लोकेंद्र सिंह, अपर कलेक्टर जी एस धुर्वे, अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष पुष्पराज सिंह, आयोग मित्र श्रीषचंद्र भट्ट, एम ए सिद्धकी, राहुल अग्निहोत्री, कीर्ति सोनी, अधिवक्ता जयलाल राय, रिजवान अहमद, कपुरियाबाई विश्वकर्मा, उमा महोबिया, जिला विधिक अधिकारी प्रदीप सिंह सहित अन्य सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहें।
   बैठक में जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री के पी सिंह के समक्ष विभिन्न समस्याओ के प्रति ध्यान आकृष्ट किया गया जिसमें  जिला अस्पताल स्थित ड्रामा यूनिट को चालू कराने, अस्पताल में विधिक साक्षरता शिविर आयोजित करने, अवारा पशुओ एवं सुअरो के आतंक को समाप्त करने, स्टेशन एवं गांधी चौराहा मे आवारा किस्म के लडके खड़े रहते है जिन पर अंकुश लगाने, अस्पताल में नियत समय पर मरीजों को भोजन दिलाने, जिला जेल में महिला वार्ड नही होने, बाल संम्प्रेषण गृह न होना, बस्ती से शराब की दुकान हटाना शामिल है।
   श्री के पी सिंह ने कहा है कि जिले में अवारा पशुओ से होने वाले नुकसान एवं कठिनाईयों से निजात पाने के लिए पशु मालिकों को समझाइश दिए जाने एवं न मानने पर उनके विरूद्ध प्रकरण दर्ज कराया जाए, वहीं कांजी हाउस की व्यवस्था सुनिश्चित की जाकर ऐसे अवारा पशुओ को संरक्षित किया जाए ताकि नगर का आवागमन व्यवस्थित तरीके से हो सके। उन्होने कहा कि उमरिया जिले को अवारा पशुओ से मुक्त किया जाकर प्रदेश में एक नई पहल की शुरूआत की जाएगी, इसमें पशु मालिकों, जिले के वरिष्ठ अधिकारियों, नगर पालिका एवं ग्राम पंचायतों की महती भूमिका होनी चाहिए।
   श्री सिंह ने कहा कि शासन की योजनाओ का लाभ पाना नागरिकों का हक एवं अधिकार है जैसे अस्पताल में दी जा रही समस्त सेवाएं, नगर पालिका द्वारा पेयजल, साफ सफाई एवं अन्य विभागों की योजनाएं शामिल है। यदि इसमें कोई वंचित रह जाता है तो वैधानिक रूप से जन उपयोगी लोक अदालत में प्रकरण दर्ज कराएं ताकि उन्हें हक दिलाया जा सके।
   जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कहा कि नागरिकों को हक और अधिकार दिलाने के लिए कानून काम करता है ।इसी भावनाओ के अनुरूप न्यायालय द्वारा आगामी दिनों में मोबाइल कोर्ट लगाने की भी बात कही गई। सत्र न्यायाधीश ने कहा कि मानव अधिकार अधिनियम 1993 का विस्तृत अध्ययन करें और मानव अधिकार के संरक्षण की दिशा में जन जागरूकता फैलाएं ताकि लोग जागरूक होकर समाज को मुख्य धारा से जोड़ने में अपनी महती भूमिका अदा कर सके।
   इस अवसर पर उपस्थित जनों ने विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए अपेक्षा की है कि प्रत्येक माह मानव अधिकार संरक्षण के संबंध में जिला न्यायालय में बैठक बुलाई जाए ।  
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