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भावांतर भुगतान योजना से मंडियों में आवक बढ़ी, किसानों को मिल रहे अच्छे दाम
जनजातीय समुदाय के लोग अपनी जमीन के मालिक थे और हमेशा रहेंगे, भावांतर योजना किसानों को ऐतिहासिक न्याय दिलायेगी - मुख्यमंत्री श्री चौहान, पंजीयन नहीं करा पाये किसान 15 से 22 नवम्बर तक करा सकेंगे पंजीयन
देवास | 14-नवम्बर-2017
 
   
   मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने गत दिवस मंत्रालय में वीडियों कांफ्रेंसिंग के जरिये भावांतर भुगतान योजना के क्रियान्वयन के संबंध में संभागायुक्तों और कलेक्टरों से मैदानी स्तर की जानकारी ली। कलेक्टरों ने बताया कि भावांतर भुगतान योजना के प्रारंभ में जो भ्रम बने हुए थे, अब दूर हो गये हैं। परिणामस्वरूप मंडियों में आवक बढ़ रही है। फसलों का अच्छा दाम मिलने पर किसान संतुष्ट हैं। जनजातीय जिलों के दूरस्थ क्षेत्रों में 20 साप्ताहिक हाट बाजारों में भी फसल की आवक हो रही है। बढती आवक को देखते हुए इन हाट बाजारों को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा 51 उप मंडियों को भी क्रियाशील कर दिया गया है जहाँ किसान अच्छी मात्रा में अनाज लेकर आ रहे हैं। अब तक 171 लाख मीट्रिक टन अनाज की आवक मंडियों में हो चुकी है। मात्र एक महीने में मंडियों को पिछले साल के मुकाबले 28 करोड़ रूपये की आय हुई है।
   मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टरों की किसानों के हित में आगे बढ़कर काम करके योजना को सफल बनाने की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह समय किसानों का साथ देने का समय है, वे संकट में हैं। भावांतर भुगतान योजना किसानों की सेवा करने का माध्यम है। इससे किसानों को ऐतिहासिक न्याय दिलाने में सफलता मिलेगी। उन्होंने किसानों को उनकी फसल का पूरा दाम दिलवाने के लिये निगरानी दलों को और ज्यादा सक्रिय और सचेत बनाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि योजना को बदनाम करने वालों को मौका न दें।
   श्री चौहान ने कहा कि जिन किसानों ने 16 से 31 अक्टूबर तक अपनी फसल बेच दी थी, उनको भी अंतर की राशि का भुगतान देना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि भुगतान की प्रक्रियाओं में पूरी तरह पारदर्शिता बरतें। किसानों को सहारा देकर उनकी सेवा करें और किसान विरोधी लोगों को किसान हितैषी इस योजना को बदनाम करने का कोई मौका नहीं दें।
   मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कलेक्टरों से कहा कि वे 16 से 31 अक्टूबर की अवधि में मंडियों में फसल बेचने वाले एक लाख 55 हजार पंजीकृत किसानों को एसएमएस के माध्यम से योजना में कितना भुगतान किया जा रहा है, इसकी सूचना 20 नवंबर तक आवश्यक रूप से दें। मुख्यमंत्री ने जिला और संभाग स्तरीय निगरानी दलों को मंडियों का दौरा करने के निर्देश दिये।
   श्री चौहान ने सभी किसानों के बैंक खातों का सत्यापन सुनिश्चित करवाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि बैंक खातों के अलावा बोनी का रकबा, उत्पादन आदि का सत्यापन भी सावधानी से करें। सभी पंजीकृत किसानों का बैंक खातों का ब्यौरा मंडियों को उपलब्ध कराने और वहां से किसानों के खातों में डालने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि किसानों को किसी भी प्रकार की शिकायत होने पर अपनी बात कहने का भी मौका मिलेगा।
   मुख्यमंत्री ने कहा कि 20 नवम्बर को उज्जैन में आयोजित होने वाले किसान सम्मेलन में 15 दिनों की भावांतर की राशि किसानों के खातों में डाल दी जायेगी। उन्होंने कहा कि किसानों का विश्वास भावांतर भुगतान योजना में बढ़ रहा है। सभी भ्रम दूर हो गये हैं। उन्होंने कहा कि कुछ तथाकथित किसान विरोधी लोगों ने योजना के बारे में भ्रम फैलाने की कोशिश की थी, वे कामयाब नहीं हुए।
   श्री चौहान ने कहा कि किसानों को मालूम होना चाहिये कि उन्हें कितना दाम मिला है। प्रत्येक किसान को इस योजना का फायदा मिलना चाहिये। यदि वास्तविक किसान किसी कारण अपना पंजीयन करवाने से चूक गये हैं या किसी कारण नहीं करवा पाये हैं तो उनका पूरा ब्यौरा लेकर उसे सत्यापित कर पंजीयन करवायें। ऐसे किसानों के लिये पोर्टल पर पंजीयन की सुविधा 15 से 22 नवम्बर तक रहेगी। उन्होंने कपास उत्पादक जिलों के कलेक्टरों को निर्देश दिये कि कपास की खरीदी के लिये विशेष इंतजाम करें और इस पर निगरानी रखें। इस अवसर पर बताया गया कि प्रदेश के 8 केन्द्रों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 15 हजार 500 क्विंटल कपास की खरीदी हुई है।
   मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों से कहा कि वे किसानों को भण्डारण अनुदान योजना का लाभ लेने के लिये भी प्रेरित करें। गोडाउन अनुदान योजना में अनुदान राशि सात रूपये से बढ़ाकर 9 रूपये 90 पैसे प्रति क्विंटल प्रति माह किया गया है। उन्होंने कहा कि पंजीकरण के लिये आफलाइन आवेदनों को जल्दी ही आनलाइन दर्ज करायें।
आदिवासियों की जमीन के संबंध में भ्रम फैलाने वालों पर कार्रवाई करें
   मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने संभागायुक्तों और कलेक्टरों से अन्य विषयों पर चर्चा करते हुए अवगत कराया कि कुछ समाज विरोधी व्यक्ति और समूह आदिवासी समुदायों में भ्रम फैला रहे हैं कि सरकार उनकी जमीन गैर आदिवासी लोगों को बेचने का कानूनी प्रावधान कर रही है।
   श्री चौहान ने संभागायुक्तों और कलेक्टरों से कहा कि ऐसे लोगों पर नजर रखें और भ्रम फैलाने पर उनके विरूद्ध कड़ी कार्रवाई करें। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार ऐसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं कर रही है और न ही ऐसा करने की कोई मंशा है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय के लोग अपनी जमीन के मालिक थे और हमेशा रहेंगे। उन्होंने कहा कि असामाजिक और समाज विरोधी तत्व आदिवासी बहुल जिलों में भ्रामक सूचनाएँ फैला रहे हैं, उन पर ध्यान नहीं दें। उन्होंने कलेक्टरों से कहा कि वे आदिवासी समुदाय के लोगों को सचेत करें और उन्हें ऐसे लोगों के बहकावे में नहीं आने के लिये लगातार सावधान करें। वीडियो कांफ्रेंसिंग में मुख्य सचिव श्री बी.पी.सिंह एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
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