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किसान रबी फसलों का बीमा करायें
अंतिम तिथि 15 जनवरी
टीकमगढ़ | 13-जनवरी-2018
 
   उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास ने बताया है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनान्तर्गत रबी वर्ष 2017-18 में ऋणी तथा अऋणी किसानों के बीमा कराने के संदर्भ में पूर्व में भी निर्देश दिये गये हैं। अऋणी कृषकों के बीमा कराने की अंतिम तिथि 15 जनवरी 2018 है तथा बीमा पोर्टल प्रारंभ हो गया है। उन्होंने सभी ग्रामीण स्तर के अधिकारियों को निर्देशित किया है कि जिस क्षेत्र में रबी फसलों की सघनता हो उस क्षेत्र के किसानों के अधिक से अधिक बीमा कराये जायें। इस हेतु स्थानीय स्तर पर बैंक शाखा स्तर पर विशेष केम्पों का आयोजन कर बीमा सुनिश्चित कर प्रतिवेदन भी उपलब्ध करायें।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
   प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अधिसूचित क्षेत्र की अधिसूचित फसलों हेतु ऋणी फसलों के लिये अनिवार्य एवं अऋणी कृषकों के लिये ऐच्छिक हैं। यह योजना जिले के पटवारी हल्कों में अधिसूचित फसलों के लिये कार्यान्वित की जायेगी। आपदाओं की स्थिति में कृषक द्वारा 72 घंटों में बीमा कम्पनी, संबंधित बैंक एवं जिला प्रशासन को सूचना दी जाना बंधनकारी होगी। क्षति के आकलन हेतु बीमा कम्पनी/क्रियान्वयन एजेन्सी द्वारा प्रतिनिधि नियुक्त किये जायेंगे जो जिले में गठित मूल्यांकन समिति के साथ क्षति के आंकलन के दौरान साथ रहेंगे। टीकमगढ़ जिले में एचडीएफसी इरगो जनरल इंश्योरेंस कम्पनी लिमिटेड को क्रियान्वयन एजेन्सी नियत किया गया है।
अऋणी कृषकों हेतु आवश्यक दस्तावेज
   योजना का लाभ लेने के लिये अऋणी कृषकों को भू अधिकार पुस्तिका, पहचान पत्र (वोटर आईडी/आधार कार्ड की कॉपी/राशन कार्ड, पैन कार्ड), सक्षम अधिकारी द्वारा बुवाई प्रमाण पत्र पटवारी रिर्पोट,फसल का रकबा, बुवाई का ब्यौरा, पटवारी अथवा ग्राम पंचायत द्वारा प्रदान किये जायेगा तथा बैंक एकाउन्ट की समस्त जानकारी देनी होगी। योजनान्तर्गत खरीफ की अनाज तिलहन एवं दलहन फसलों के लिये बीमित राशि का दो प्रतिशत या वास्तविक दर जो भी कम हो। रवी में समस्त अनाज, तिलहन एवं दलहन फसलों के लिये बीमित राशि का डेढ़ प्रतिशत या वास्तविक दर जो भी कम हो लागू होगी। अधिसूचित फसलों क्षेत्रों (जिला, तहसीलदार, पटवारी, हल्का) की सूची वेबसाइड www.govtpress mp.nic.in पर जारी की गई हैं।
   योजना के अंतर्गत विभिन्न फसल अवस्थाओं पर अधिसूचित फसलों हेतु अधिसूचित क्षेत्र में फसल क्षति जोखिम आवंटित किये गये हैं। इसके तहत बुआई/रोपाई/अंकुरण नष्ट होने का जोखिम-वर्षा की कमी या विपरीत परिस्थितियों के कारण नष्ट होना। फसल मौसम के मध्य में हानि-खड़ी फसल (बुआई से कटाई तक) की व्यवस्था में सूखा अंतराल, बाढ़ जलप्लावन, कीट व्याधि, भूस्खलन, प्राकृत आगजानी, तूफान, बिजली गिरना, चक्रवात, आधी, वंवडर के कारण फसल हानि। कटाई उपरांत क्षति- कटाई के उपरांत खेत में कटी हुई एवं बिना बधी, फैली हुई फसल के कटाई के 14 दिवस के भीतर चक्रवात, चक्रवाती वर्षा एवं बेमौसम वर्षा के कारण फसल क्षति तथा क्षेत्रीय आपदा- ओलावृष्टि, भूस्खलन एवं जलाप्लावन के कारण उत्पन्न जोखिम से फसल क्षति शामिल हैं।
 
(96 days ago)
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