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वाहन चालक की बेटी बनी अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी ''''अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष'''' (कहानी सच्ची है)
स्वीप आइकॉन के रूप में जिले का मतदान प्रतिशत बढ़ाने में निभाई सक्रिय भूमिका , छिन्दवाड़ा जिले की बेटी विनीता नेटी बनना चाहती हैं अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल कोच
छिन्दवाड़ा | 07-मार्च-2021
      जब परिस्थितियां अनुकूल और सारे साधन सहज सुलभ उपलब्ध हों, तो कोई उपलब्धि हासिल करना बड़ी बात नहीं, लेकिन जब विषम परिस्थितियों के बीच कड़े परिश्रम और लगन से कोई बड़ी उपलब्धि हासिल करता है तो वह सभी का प्रेरणा स्रोत बन जाता है। इसका जीता जागता उदाहरण छिंदवाडा जिले की बेटी फुटबॉल की अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी कुमारी विनीता नेटी है जो अब युवाओं की प्रेरणा स्रोत बन उन्हें प्रेरित कर रही हैं। अपने हौसले व सभी के सहयोग से उन्हें एक नई पहचान मिली है और वह अपने पिता के सपने को पूरा कर पाई हैं। उसे बहुत खुशी होती है जब जिले के युवा खेल के क्षेत्र में उनसे मार्गदर्शन लेकर तैयारी करते हैं। विनीता ने जहां फुटबॉल खेल के क्षेत्र में उपलब्धि हासिल की है, वहीं जिले में विधानसभा और लोकसभा निर्वाचन/उप निर्वाचन के दौरान लोगों को मतदान के प्रति प्रेरित कर जिले का मतदान प्रतिशत सर्वाधिक बनाने में अपना सहयोग भी प्रदान किया है। वह नई उमंग और जोश से लबरेज है और निरंतर नवाचार करते हुये कार्य करना चाहती है।
            छिंदवाड़ा में जन्मी विनीता पिछले 10 सालों से फुटबॉल खेल रही है। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय मैचों में कैप्टन के रूप में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया है। विनीता के पिता स्वर्गीय श्री भगत सिंह नेटी वन विभाग में वाहन चालक थे। विनीता बताती है कि फुटबॉल खेलने की प्रेरणा उन्हें उनके पिता से ही मिली। कई बार उनके पिता उन्हें अपने साथ घुमाने ले जाने के दौरान दौड़ लगाने को कहते थे। विनीता का फिजिकल स्टैमिना देखकर उनके पिता को पूरा भरोसा था कि वह एक अच्छी फुटबॉल प्लेयर बन सकती है। शुरुआत में विनीता ने जिले की टीम से खेला, लेकिन राज्य स्तर की टीम के लिये चयन नहीं होने पर उसे महसूस हुआ कि उसे इस खेल में कड़ी मेहनत की जरूरत है। वर्ष 2007 में “चक दे इंडिया” मूवी रिलीज हुई, जो विनीता के लिए महिला खिलाड़ी बनने कि दिशा में प्रेरणा स्रोत साबित हुई। इस मूवी को देखकर विनीता ने ठान लिया की वह कड़ी मेहनत करेगी और सभी को नेशनल प्लेयर बनकर दिखाएगी। इस दौरान उसके पिता ने भी विनीता का पूरा साथ दिया। नौकरी के बाद जब भी उन्हें समय मिलता तो वह विनीता की प्रैक्टिस देखने जरूर आते और विशेषकर उसे उसकी गलतियां बताते। जब विनीता आठवीं-नौवीं कक्षा में थी तो वह स्कूल टीम से सिलेक्ट हुई और विभिन्न स्तरों पर फुटबॉल खेलते हुये उसे कई जगह बेस्ट प्लेयर और बेस्ट कैप्टन का अवार्ड भी मिला। उनके कोच की प्रेरणा पर विनीता ने नागपुर में एक एकेडमी ज्वाइन कर ली जिसके माध्यम से पहली बार उसका चयन इण्डिया टीम के लिये हुआ, लेकिन उसके लिये दु:ख कि बात यह हुई की उसके पहले ही कैम्प के दौरान उसके पिता का देहावसान हो गया। इससे विनीता के ह्दय को गहरा आघात लगा, क्योंकि उसके प्रेरणा स्त्रोत, उसके पिता अब उसके साथ नहीं थे और वह जीते जी उनका सपना पूरा नहीं कर पायी जिसका उसे आज भी अफसोस है । विनीता के लिये यह समय निर्णय की घडी थी कि वह फुटबॉल  खेले या खेलना छोड़ दें। उसने फुटबॉल नहीं खेलने का मन बना लिया था, किंतु उसकी मॉ, भाई और अन्य दोस्तों ने उसकी हिम्मत को सहारा दिया और अपने पिता के सपने को पूरा करने के लिये प्रेरित किया। इस प्रेरणा से उसने बाकी कैम्प पूरा किये और भारत की तरफ से टीम का प्रतिनिधित्व करते हुये साउथ अमेरिका के चिली में फुटबॉल मैच खेला। इस मैच में उसे “फेयर प्लेयर” का अवॉर्ड मिला। वापिस होने के बाद विनीता आत्मविश्वास से ओत-प्रोत थी और लोग उन्हें रोल मॉडल की तरह लेने लगे थे। विनीता को साउथ अमेरिका के चिली में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल मैच में “फेयर प्लेयर अवॉर्ड”, मुंबई में आयोजित राष्ट्रीय मैच में “बेस्ट प्लेयर अवॉर्ड”,  इंटर यूनिवसिर्टी वेस्ट जोन फुटबॉल टूर्नामेण्ट पूणे में “बेस्ट मिडफील्डर अवॉर्ड”, स्कूल राज्य स्तरीय प्रतियोगिता नीमच में “बेस्ट प्लेयर अवॉर्ड” और स्कूल राज्य स्तरीय प्रतियोगिता छिंदवाडा में “बेस्ट डिफेन्सर अवॉर्ड” के अलावा अन्य अवार्ड मिल चुके हैं। उसे आदिवासी महासम्मेलन के सम्मान समारोह में, डिस्ट्रिक्ट ओलम्पिक एसोसिऐशन छिंदवाडा, वर्ष 2011 में लाल बहादुर शास्त्री सम्मान तथा वर्ष 2017 के वीरमाता जीजाबाई सम्मान समारोह में सम्मानित किया गया है। अभी हाल ही में विनीता के नेतृत्व में मध्यप्रदेश स्टेट वूमेन फुटबॉल लीग (खरगोन ) में छिंदवाड़ा की टीम ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया है। पिता के नहीं रहने से उसके घर की माली हालत दयनीय होने पर उसे एकेडमी छोडकर वापस छिंदवाडा आना पडा। यहां आकर उन्होंने छिंदवाडा में ही अपनी प्रेक्टिस शुरू की तथा अपने कोचों और दोस्तों के आर्थिक सहयोग ने उन्हें संबल प्रदान करते हुये कॉलेज की फीस, खेल पोशाक, खेल किट आदि खरीदने में मदद की। आज भी वे मध्यप्रदेश टीम की प्रतिनिधि बनकर खेल रही हैं और उन्होंने मध्यप्रदेश का 8-9 बार राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व किया है। कॉलेज में उन्होंने एनसीसी भी ज्वाइन किया और रॉक क्लाइंबिंग कैंप ग्वालियर में बेस्ट कैडेट रहीं।
    विनीता की उपलब्धियों के कारण युवाओं के बीच उसकी लोकप्रियता को देखते हुए उसे विधानसभा चुनाव 2018, लोकसभा चुनाव 2019 और विधानसभा उपचुनाव छिंदवाड़ा 2019 के दौरान जिला स्वीप आईकॉन बनाया गया। जिले के युवाओं को मताधिकार के प्रति जागरूक करने और उन्हें अपने मत का प्रयोग अनिवार्य रूप से करने की प्रेरणा देने के लिये विनीता ने जिले के गांव-गांव और शहर-शहर जाकर लोगों को जागरूक किया। उल्लेखनीय बात यह है कि इस दौरान विनीता ने भी वर्ष 2018-19 में 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग किया। मतदान के प्रति युवाओं को प्रेरित करने का परिणाम यह हुआ कि छिंदवाड़ा जिले का मतदान प्रतिशत प्रदेश में सर्वाधिक रहा, जिसमें युवा आइकॉन विनीता नेटी का सराहनीय योगदान रहा। विनीता ने शासकीय राजमाता सिंधिया कन्या महाविद्यालय छिन्दवाड़ा से स्नातक की पढ़ाई पूरी कर ली है। वह पी.एस.सी. की तैयारी कर सरकारी अधिकारी बनना चाहती है और अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल कोच बनने का सपना भी देखती हैं। यहां तक पहुंचने के सफर में वह हर वक्त सहयोग करने के लिए अपने कोच श्री विशाल वर्मा और श्री विक्रांत यादव के साथ ही अपने सभी दोस्तों के प्रति आभार व्यक्त करती हैं। विनीता चाहती है कि जिले की खेल प्रतिभायें न केवल छिन्दवाड़ा जिले, बल्कि मध्यप्रदेश, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपना नाम रोशन करें। इसके लिये वे खेल प्रतिभाओं को हर समय अपना मार्गदर्शन, सहयोग और समय देने को तैयार रहती हैं।
 
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