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अपनी सुरक्षा-अपने हाथ पिछली बार गांव में एक दर्जन पॉजिटिव थे, इस बार सतर्कता बरती तो किसी को छू भी नहीं सका कोरोना (खुशियों की दास्तां)
संक्रमण की पहली लहर कमजोर पडने के बाद भी यहां के लोग बेवजह घर से बाहर नहीं निकलते, मास्क और सोशल डिस्टेसिंग के साथ बैठे गांव के लोग, 8-काम के दौरान भी मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन।
मुरैना | 04-मई-2021
    अंबाह. के ग्राम लोलकी में कोरोना संक्रमण की पहली लहर का असर कई गांवों तक भी हुआ था, लेकिन उन्होंने शहरों जैसी गलती नहीं की और सबक सीखा। परिणाम यह रहा कि दूसरी लहर में कोरोना का संक्रमण उनको छू तक नहीं पाया। यह लड़ाई अब तक उन्होंने स्व-अनुशासन से जीती है और आगे भी दृढ संकल्प है।
एक हजार की आबादी वाले गांव लोलकी में पिछली लहर में 12 कोरोना संक्रमित सामने आए थे, लेकिन गांव वालों से कोरोना गाइड लाइन को अपनी ढाल बनाया और अब 13 माह में एक भी कोरोना पॉजिटिव उनके गांव में नहीं आया है। ग्राम पंचायत रूअर के गांव लोलकी ने शहरों के लिए भी मिसाल प्रस्तुत की है। कोरोना संक्रमण के लिए पहला अनुशासन तो बिना वजह घर और गांव से बाहर नहीं जाने का लागू किया गया है। इसके अलावा सभी लोग घर से बाहर गांव में भी निकलते हैं तो मास्क का उपयोग नहीं भूलते हैं। वहीं सार्वजनिक कार्य के दौरान भी सोशल डिस्टेसिंग का बखूबी पालन कर रहे हैं। गांव में चौपाल पर या किसी छप्पर में भी बैठते हैं तो कोरोना गाइड लाइन का पूरा पालन करते हैं। गांव के लोग सतर्कता और संयम रूपी हथियार से लैस हैं और इसी वजह से कोरोना वायरस इस गांव में घुस नहीं सका है। गांव के लोगों ने बाहर से आने वाले लोगों को भी खास तरजीह देना बंद कर दिया है। बाहर काम करने वाले गांव के लोग भीद यदि वापस लौटते हैं तो उनके लिए कडे नियम बनाए गए हैं। उन्‍हें पहले गांव के बाहर स्कूल, निजी नलकूप या अन्य ऐसी ही एकांत जगह पर क्वारंटीन किया जाता है। तीन से पांच दिन में कोई लक्षण नजर नहीं आने पर उन्हें गांव में आने दिया जाता है और लक्षण नजर आने पर जांच कराई जाती है। क्योंकि पिछली बार यह लापरवाही बरती थी और बाहर से आए एक दर्जन लोग कोरोना संक्रमित मिले थे।
इस बार बरती सतर्कता नतीजा गांव कोरोना मुक्त
पिछले साल लॉकडाउन के दौरान ग्रामवासियों ने काफी लापरवाही बरती। नतीजा यह रहा कि गांव में 12 से अधिक कोरोना के मरीज मिले। इस बार ग्रामीणों ने पिछली गलतियों से सबक लेते हए कोविड-19 पार्ट टू के नियमों का पालन बखूबी से किया। संक्रमण की पहली लहर कमजोर पडने के बाद भी यहां के लोगों ने बेवजह घर से बाहर नहीं निकलने के नियम का पालन किया। अगर कहीं जाते भी थे तो सावधानी और सतर्कता के साथ रहते थे। यही नहीं गांव में आने वाले हर लोगों पर ग्रामीणों की पैनी नजर रहती है और बिना मास्क के गांव में प्रवेश नहीं दिया जाता है।
गांव के लोग सोशल डिस्टेंस और मास्क का पालन करते हैं, इसलिए अभी तक बचे हुए हैं। गांव के बाहर स्कूल व कुएं की तिवरियों पर क्वारंटीन सेंटर बनाया है। यदि कोई बाहर से आता है, तो पहले उसे वहीं रहना होता है। यह सभी की सुरक्षा के लिए है। हम लोग लगातार मास्क पहनते हैं। समय-समय पर हाथों को सैनिटाइज करते रहते हैं।
ऋषि तोमर, 24 वर्षीय युवा
संक्रमण के दौर में गांव को सुरक्षित करने के लिए गांव के लोगों ने शहर के लोगों से दूरी बना ली है। सभी ने अपने-अपने रिश्तेदारों को फिलहाल इस समय में उनके गांव न आने के लिए कहा है। साथ ही, गांव से लोगों ने अभी तक शादियों और बारात में जाने से भी परहेज किया है।

 
(2 days ago)
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