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पिपरमेंट की खेती गुलाब सिंह को बनी मुनाफे का धंधा - खुशियों की दास्तां
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दतिया | 16-जून-2021
   दतिया जिले के किसान भलीभांति समझने लगे है कि अगर कृषि को लाभ का धंधा बनाना है तथा कम लागत में अधिक मुनाफा लेना है। इसके लिए परम्परागत फसलों की अपेक्षा नगदी फसले लेनी होगी। नगदी फसले लेने से मुनाफा भी अधिक होगा।
    जिले के सेवढ़ा जनपद पंचायत के ग्राम बागपुर के किसान श्री गुलाब सिंह कुशवाहा ने बताया कि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर किसानों द्वारा पिपरमेंट की खेती ले रहे है। लेकिन मार्केट न होने एवं प्लांट न होने के कारण उसका सही दाम नहीं मिल पाता था। उनके मन में विचार आया कि पिपरमेंट की खेती को देखते हुए प्लांट लगाया जाए। फरवरी 2021 में श्री गुलाब सिंह ने लगभग 12 लाख की लागत का पिपरमेंट का (अर्क) तेल निकालने का संयंत्र (प्लांट) लगाया था। उन्होंने बताया कि पिपरमेंट का तेल निकालने हेतु प्रति ट्रॉली 2 हजार रूपये पिराई के मिल जाते है। एक ट्रॉली पिपरमेंट की फसल से लगभग 40 लीटर पिपरमेंट का तेल मिलता है। एक हजार रूपये प्रति लीटर के भाव से समथर एवं भाण्ड़ेर में व्यापारी खरीद लेते है। श्री गुलाब सिंह ने बताया कि पिपरमेंट का तेल आर्युवेदिक दवा के निर्माण हेतु कई देशों को निर्यात भी किया जाता है। उन्होंने बताया कि पिपरमेंट प्लांट से वह लगभग 10 लोगों को रोजगार भी उपलब्ध करा रहे है।
   श्री गुलाब सिंह ने बताया कि पिपरमेंट का एक बार पौधा लगाने से तीन बार पिपरमेंट का उत्पादन ले सकते है। पिपरमेंट की खेती पौधे की जड़ एवं कलम लगाकर ली जाती है।  और फसल 90 दिन में तैयार हो जाती है। पिपरमेंट जड़ से फसल लेने हेतु फरवरी में जड़ लगाई जाती है। जबकि कलम से फसल लेने हेतु जुलाई एवं अगस्त माह में पिररमेंट की कलम लगाई जाती है। उनहोंने बताया कि पिपरमेंट की खास विशेषता यह है कि इसे गाय, भैंस भी नुकसान नहीं करती है और फसल चोरी की कम संभवना रहती है। ओला वृष्टि एवं अति वर्षा का असर नहीं पड़ता है। श्री गुलाब सिंह ने बताया कि सेवढ़ा तहसील के तहत् बागपुर में 400, जौरा गांव में 100 कृषक पिपरमेंट की खेती ले रहे हे। पिपरमेंट की खेती पर 5 हजार रूपये प्रति बीघा खर्चा आता है। एक बीघा फसल से 20 लीटर पिपरमेंट का तेल निकलता है। जो एक हजार रूपये प्रति लीटर मिलता है।
(42 days ago)
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