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आजीविका मिशन से जुडकर घरेलू काम के साथ अब कंप्यूटर भी चलाती हैं श्रीमती अनीता "कहानी सच्ची है"
आत्मविश्वास से भरी अनीता उचित मूल्य दुकान का भी कर रही हैं संचालन
छिन्दवाड़ा | 13-सितम्बर-2021
    म.प्र.डे राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन प्रदेश की महिलाओं को सशक्त और आत्म निर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। छिन्दवाडा जिले में भी कलेक्टर श्री सौरभ कुमार सुमन व मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री हरेन्द्र नारायण के निर्देशन और ग्रामीण आजीविका मिशन की जिला स्तरीय टीम के सहयोग से जिले की ग्रामीण महिलाएं भी स्व-सहायता समूहों से जुडकर सशक्त और आत्मनिर्भर हो रही हैं। इसी कड़ी में छिंदवाडा जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्र बिछुआ विकासखंड के पिपरियाकला गांव की श्रीमती अनीता कनौजिया भी ग्रामीण आजीविका मिशन से जुडकर आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त हुई हैं और घरेलू कार्यों के साथ ही कंप्यूटर सीखकर ऑनलाईन कंप्यूटर वर्क शॉप और शासकीय उचित मूल्य दुकान का संचालन कर रही है जिससे उनकी एक अलग पहचान बनी है। श्रीमती अनीता कनौजिया अपनी इस नई पहचान के लिये शासन को धन्यवाद करती हैं और अन्य महिलाओं को भी सशक्त और आत्मनिर्भर होने की प्रेरणा दे रही हैं।
        ग्राम पिपरिया कला की श्रीमती अनीता कनौजिया ने बताया कि शुरुआत में जब मेरी शादी हुई और गांव आई तो मेरे पति सिलाई का काम करते थे और मैं केवल 12 वीं कक्षा तक पढी थी। मैं घरेलू काम करती थी। मेरी आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर थी। मेरे घर की आय बहुत कम थी जिसके कारण घर चलाना मुश्किल था। मेरे घर में हमेशा आर्थिक संकट रहता था। मैं मानसिक रूप से भी परेशान रहती थी। ग्रामीण आजीविका मिशन बिछुआ द्वारा ग्राम में महिलाओं के स्‍व-सहायता समूह गठन का काम किया जा रहा था, यह जानकारी मिलने पर मैंने अधिकारियों से संपर्क किया और उन्होंने जागृति स्व-सहायता समूह ग्राम पिपरिया कला का गठन कराया। स्व-सहायता समूह में शामिल होने के बाद, ग्रामीण आजीविका मिशन के द्वारा मुझे बेसिक कंप्यूटर कोर्स कराया गया यह एक महीने का कोर्स मैने  आर.सेटी. सेंटर छिंदवाड़ा में पूर्ण किया। कंप्यूटर प्रशिक्षण के बाद मुझे पचास हजार रुपये का ऋण मिला। इस राशि से मैंने एक ऑनलाइन कंप्यूटर वर्क शॉप खोली जिससे मुझे वित्तीय लाभ मिलना शुरू हो गया और धीरे-धीरे मेरी आर्थिक स्थिति में सुधार होने लगा। फिर मुझे अपने ग्राम पिपरिया कला की शासकीय उचित मूल्य दुकान के संचालन का कार्य मिला जिसमें मैं प्रबंधक के रूप में काम करती हूं। इस कार्य से मुझे 8 हजार 500 रुपये की अतिरिक्त मासिक आय प्राप्त होने लगी जिससे मैंने मेरे बेटी और बेटे को उच्‍च शिक्षा दिलाई। अब मेरी बेटी नर्स और बेटा ऑपरेटर है। मैंने खुद अपनी उच्‍च शिक्षा एम.ए.बी.एड. तक कर ली है। कोरोना काल के दौरान मैंने स्व-सहायता समूहों के सदस्यों और उनके परिवारों को कोविड-19 से बचाव के लिए प्रशिक्षण दिया। मेरे द्वारा 40 हजार मास्क बनाए गए जिससे मुझे 50 हजार रूपये की आय प्राप्‍त हुई। मेरे द्वारा सैनिटाइज़र व मास्क  विक्रय के लिये मिनी विक्रय सेंटर खोला गया, जिससे मुझे आर्थिक लाभ मिला और मैं आत्म-निर्भर बनी। समाज में मेरा सामाजिक और आर्थिक स्‍तर बढ़ गया है।              

 
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