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महाविद्यालय में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की कार्यशाला संपन्न
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उमरिया | 17-सितम्बर-2021
    शासकीय महाविद्यालय उमरिया में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत नए प्रवेशित विद्यार्थियों हेतु 15 सितम्बर 2021 से 25 सितम्बर 2021 तक कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य- शिक्षा वो जो ज्ञान दे कौशल दें, भाषाओं का ज्ञान दें, इतिहास का ज्ञान दे. इस नई शिक्षा नीति में सम्पूर्ण ज्ञान  का मतलब संम्पूर्ण विकास होना चाहिए।
    कार्यशाला में डॉ. सी.बी. सोदिया प्राचार्य, शासकीय महाविद्यालय उमरिया ने कहा कि विद्यार्थियों में संस्कार होना बहुत जरूरी है। विद्यार्थियों को दिशा दे दी तो वह महान विद्वान बनेंगे, देश-प्रदेश और दुनिया की समृद्धि व विकास में योगदान देंगे। अगर दिशा गलत पकड़ ली तो समाज के लिए विनाशकारी होंगे। ये हमारी जिम्मेदारी है कि बच्चों में नागरिकता के संस्कार हों। उन्होंने आगे बताया कि नई शिक्षा नीति इस बात की अनुमति देती है कि छात्र फिजिक्स, केमेस्ट्री पढ़ते हुए भी हिंदी का विद्वान बन सके, संस्कृत का ज्ञान प्राप्त कर सके, इतिहास का अध्ययन कर सके। शिक्षा एकांगी नही होती। ज्ञान का मतलब है संपूर्ण ज्ञान। उन सभी विषयों का ज्ञान जो विद्यार्थी चाहते हैं। स्वामी विवेकानंद ने एक पंक्ति में शिक्षा का उद्देश्य बता दिया। शिक्षा वह है जो मनुष्य को मनुष्य बना दे। इसमें सारी चीजें अंतर्निहित हैं। इसके और विस्तार में जाये तो शिक्षा ऐसी हो जो ज्ञान दे, कौशल दे और नागरिकता के संस्कार भी दे।
   राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभारी प्रो. तुलसी रानी पटेल ने विद्यार्थियों को नई शिक्षा नीति के संबंध में प्रोजेक्टर के माध्यम से संपूर्ण जानकारी दी गई। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभारी ने नए प्रवेशित विद्यार्थियों को बताया कि इस साल स्नातक स्तर पर प्रवेश लेने वाले नए उम्मीदवारों की एनईपी के मुताबिक कैरिकुलम होगा, लेकिन सेकंड व अगले साल के छात्रों के लिए इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. छात्रों के लिए सर्टिफिकेट, डिप्लोमा कोर्स भी ऑफर किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि बी.एससी. का छात्र इस नई शिक्षा के अंतर्गत कला एवं वाणिज्य का विषय का चयन भी कर सकता है, इसी तरह कला संकाय एवं वाणिज्य संकाय के छात्र-छात्राएं भी विज्ञान, कला एवं वाणिज्य विषय से पढ़ाई कर सकता है तथा रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम को भी रखा गया, जिससे बच्चे अपने रूचि के अनुसार स्वरोजगार हेतु शिक्षा प्राप्त कर सकते है। परीक्षा प्रणाली में बदलाव भी किए गए हैं, जिसके अंतर्गत 25 अंकों का आंतरिक मूल्यांकन तथा 75 अंकों का लिखित परीक्षा रखी गई है, जो 2 घण्टें की होगी।
   कार्यशाला में महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक एवं नव प्रवेशि़त छात्र-छात्राएं उपस्थित रहीं। कार्यशाला के अंत में महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. संजीव शर्मा ने आभार प्रकट करते हुए कार्यशाला के आज दूसरे दिन सफल समापन किया।

 
(33 days ago)
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