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उप संचालक कृषि और सह संचालक आंचलिक अनुसंधान केन्द्र द्वारा प्रगतिशील कृषक के खेत का निरीक्षण
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छिन्दवाड़ा | 13-अक्तूबर-2021
   उप संचालक कृषि श्री जितेन्द्र कुमार सिंह और आंचलिक अनुसंधान केन्द्र चंदनगांव के सह संचालक श्री विजय पराडकर द्वारा आज जिले के  विकासखंड चौरई के ग्राम बाकानांगनपुर में प्रगतिशील कृषक श्री नवीन पटेल के खेत का  निरीक्षण किया गया। कृषक के खेत पर मक्के की फसल से भुट्टे की तुड़ाई करने के बाद मक्का की फसल को रोटावेटर चलाकर खेत तैयार करने की विधि का प्रत्यक्ष रूप से अवलोकन किया गया। कृषक के खेत पर गन्ने की किस्म 8632 एवं अरहर के साथ अदरक की अंतरवर्ती फसल का अवलोकन भी किया गया। निरीक्षण के दौरान अनुविभागीय कृषि अधिकारी छिन्दवाड़ा श्री नीलकंठ पटवारी, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी श्री सुरेन्द्र कुंजाम और ग्राम के अन्य कृषक उपस्थित थे।
   उप संचालक कृषि श्री सिंह ने बताया कि निरीक्षण के दौरान कृषक श्री नवीन पटेल ने अपना अनुभव साझा करते हुये बताया कि उन्होंने मक्का की हाईब्रिड किस्म लगाई है जिसमें 5-6 कि.ग्रा. बीज प्रति एकड़ उपयोग किया है और उन्हे लगभग 25 क्विंटल प्रति एकड़ उपज प्राप्त होने की संभावना है। उप संचालक कृषि एवं सह संचालक अनुसंधान द्वारा ग्राम के उपस्थित कृषकों को तकनीकी मार्गदर्शन देते हुये बताया गया कि वर्तमान में जिले की मक्का की फसल की स्थिति कटाई के लिये तैयार है जिसके लिए कहा जाता है कि मक्का की फसल कार्य की अवस्था पर तैयार है जिसको वैज्ञानिक भाषा में फिजियोलॉजिकल मैच्युरिटी कहा जाता है, पर कटाई की सलाह वैज्ञानिक दृष्टि से दी गई। कृषक मक्का फसल को पूरी तरह पौध सुखाकर भट्टे की तुड़ाई कर कड़वी एकत्रित कर मेड़ पर रख देता है या जगह पर ही आग लगा कर जला देता है जिसे हम नरवाई कहते है। इस पर कृषि अनुसंधान की सलाह के अनुसार मक्का फसल को फिजियोलॉजिकल मैच्युरिटी पर जिसमें पौधा तो हरा रहता है, परन्तु मक्का का भुट्टा भूरा रंग लेकर सूखने की स्थिति में दिखाई देता है इस पौध के लक्षण को स्टे ग्रीन केरेक्टर कहा जाता है। किसान इस अवस्था में भुट्टा की तुड़ाई कर भुट्टे की छूछ निकाले बगैर पौधे से भुट्टा अलग कर सुरक्षित स्थान पर भंडारित कर लें और बाद में इस हरी मक्का फसल को काटकर हरे चारे के रूप में या हे बनाकर या साईलेज के रूप में उपयोग  कर सकते हैं। यदि कृषक को हरे चारे की आवश्यकता नहीं है तो कृषक सीधे मक्का की खड़ी फसल को खेत में रोटावेटर से जुताई कर जमीन में मिला दें। रोटावेटर चलने के बाद पहली बार में ही जमीन बुआई के लिये बनकर तैयार हो जाती है। किसानों को सलाह दी गई कि मक्का फसल के बाद यदि सिंचाई की व्यवस्था न हो तो कृषक खेत खाली नहीं रखकर सरसों, तोरिया, अलसी, कुसुम जैसी फसल लगाकर बिना सिंचाई के या एक या दो सिंचाई देकर दो फसल की उत्पादकता प्राप्त कर सकते हैं। कृषि विभाग के पास प्रत्येक विकासखंड मुख्यालय पर वर्तमान में सरसों का बीज उपलब्ध है, जिसे कृषक आवश्यकता के अनुसार वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कार्यालय से प्राप्त कर सकते हैं।
(51 days ago)
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