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फूलों की खेती कर बनाया सपनों का घर (कहानी सच्‍ची है)
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गुना | 29-नवम्बर-2021
  श्रीमति चन्दन बाई गुना ज़िले के मावन संकुल में अपने परिवार में पाँच बच्चों तथा पति श्रीमान भगवान सिंह संग रहती हैं। कम उम्र में शादी हो जाने के कारण उनकी पढ़ाई केवल पाँचवी कक्षा तक सीमित रह गयी थी। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति कुछ अच्छी नहीं थी। रोज़मर्रा की ज़िंदगी में अपने परिवार के जरूरतों को पूरा करना उनके लिए कठिन होता जा रहा था। समय का चक्र ऐसा चला की चन्दन बाई जी को अपना 7 बीघा ज़मीन बेचना पड़ा अपने ससुर के इलाज के लिए। इसके पश्चात उनके परिवार को खाने के लिए अनाज भी कम पड़ने लगा था। श्रीमान भगवान सिंह अपने चार भाइयों सहित बैंक से ऋण लेकर ट्रैक्टर खरीदे थे। जिसकी मासिक किश्त भरना उनके परिवार को भारी पड़ने लगा था। जिसके कारण उन्‍होंने अपना ट्रैक्टर बेच दिया। इसके उपरांत उनके बाकी बची खेती की ज़मीन पर फसल उगाना मुश्किल होने लगा था। परिवार की ऐसी स्थिति को देखते हुये चन्दन बाई जी ने 2016 में समूह से जुडने का निर्णय लिया।
समूह से जुडने के बाद–
   श्रीमति चंदन बाई ने हर्षिता समूह से जुडने के बाद 60000 रुपये का ऋण लिया। जिसे उन्होंने अपने खेत में ट्यूबबेल स्थापित करने हेतु इस्तेमाल किया। खेत में ट्यूबबेल की स्थापना करने के पश्चात उन्होने फूलों की खेती करनी शुरू की। फूलों की खेती करने हेतु वे बाज़ार से कम दामों में बीज लातीं तथा फूलों का खास ध्यान रखती। एक सीज़न के उपरांत जब उन्हें 10,000 रुपये का मुनाफा मिला तब उन्होंने अपनी फूलों की खेती को बड़े स्तर पर बढ़ाने का निर्णय लिया तथा 1.5 बीघा ज़मीन पर फूलों को लगाने का कार्य प्रारम्भ किया। इससे उनकी आर्थिक स्थिति में वृद्धि होने लगी। कम पढ़ाई करने के बावजूद श्रीमति चन्दन बाई पढ़ाई का महत्व अच्छे से जानती थीं। इसलिए परिवार पर गरीबी का बादल मंडराया हुआ था तब भी उन्‍होंने अपने बच्चों की पढ़ाई में कोई कमी नहीं रखी थी और उन्होने अपने पांचों बच्चों को पढ़ाकर अपने पैरों पर खड़ा कर दिया। आज के समय में एक वर्ष में श्रीमति चन्दन बाई 35000-40000 रुपये फूलों की खेती कर कमा रही हैं तथा सिलाई का कार्य और सब्जी की खेती कर उन्होने अपना नाम लखपतियों में जोड़ लिया है। आर्थिक स्थिति में हुये सुधार को देखते हुये चंदन बाई ने हर्षिता स्वयं सहायता समूह से फिर 80000 रुपये का ऋण लिया। इस राशि से उन्होंने अपने सपनों के घर की नींव रखी तथा देखते ही देखते उन्होने अपना घर बना लिया।
    श्रीमति चन्दन बाई ने न केवल फूलों की खेती शुरू की बल्कि वे अब गेंदा के फूलों की मालाएँ बनाकर बेचने का कार्य कर रही हैं। जिससे अब उन्हें दुगना मुनाफा हो रहा है। आजीविका मिशन से प्रेरणा मिलने के उपरांत अब चन्दन बाई ने अपनी बहुओं के संग सिलाई का कार्य शुरू किया है। जिससे वे प्रतिदिन न्यूनतम 300 रुपये कमा रही हैं। आज चन्दन बाई के परिवार की आर्थिक स्थिति काफी अच्छी है। जिसके लिए उन्होंने आजीविका मिशन का तहे दिल से धन्यवाद किया।
 
(58 days ago)
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