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कटेरा के मुरलीधर के बनाये मिट्टी के बर्तन व सजावटी सामान लोगों को आ रहे पसंद
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बालाघाट | 02-नवम्बर-2017
 
  
   कटंगी तहसील के ग्राम कटेरा के कलाकार मुरलीधर टेरेंडे ने माटी कला को नया आयाम दिया है। मुरलीधर मिट्टी की कलाकारी में माहिर है। मिट्टी के बर्तन बनाना मुरलीधर का पुश्तैनी काम है लेकिन समय के साथ मिट्टी के बर्तनों का चलन कम होने से उनका यह व्यवसाय दम तोड़ने लगा और उनकी आजीविका का साधन कमजोर हो गया । मुरलीधर ने समय के साथ चलते हुए अपनी कला को नया रूप देते हुए मिट्टी से सजावटी सामान, गुलदस्ते, गुल्लक, लाफिंग बुद्ध, झूमर, खाना बनाने का कुकर, चाय पीने का मग, सब्जी बनाने की कढ़ाई, रोटी बनाने का तवा और अन्य जरूरी बर्तन बनाना चालू किया है। मुरलीधर द्वारा नये डिजाईन एवं आकर्षक रंगों में बनाये गये मिट्टी बर्तन, मग व अन्य सजावटी सामान आकर्षक होने के साथ ही खूब पसंद भी किये जा रहे है।
    मुरलीधर अपनी पत्नी के साथ मिट्टी के बर्तन बनाने और उनको बेचने का काम करता है। कटंगी में सब्जी मंडी के पास मुरलीधर की पत्नी उर्मिला बाई इन सामानों को बेचने का काम करती है लेकिन उनकी आय बहुत कम हो पाती है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ने के साथ ही मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाना और खाना पसंद किया जाने लगा है। मुरलीधर के बनाए हुए मिट्टी के मग अपनी सुंदरता के साथ चाय के स्वाद में माटी की महक मिलाकर चार चांद लगा देते है। मुरलीधर के बनाये मिट्टी के बर्तन आकर्षक होने के साथ ही कम दाम के भी है और लोगों को खान-पान के प्राकृतिक तरीकों की ओर आने के लिए प्रेरित करते है।
    मुरलीधर अपने कुछ सामानों के साथ शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय बालाघाट के मैदान में मध्यप्रदेश स्थापना दिवस पर लगाई गई प्रदर्शनी में आया हुआ है। उसकी कलाकारी को देखकर लोग चकित हैं कि मिट्टी के ऐसे बर्तन भी बनाए जा सकते हैं इस प्रदर्शनी में लोग उसके सामान को खरीद भी रहे हैं मुरलीधर ने बताया कि वह अपने हाथों से यह काम करता है पूंजी नहीं होने के कारण वह मशीन आदि नहीं खरीद सकता है। यदि उसे बैंक से 50 से 60 हजार रुपये का ऋण मिल जाता तो वह अपने काम को बढ़ा कर बड़े पैमाने पर कर सकता है और इससे उसे मुनाफा भी मिल सकता है मुरलीधर ने बताया कि उसकी खेती बाड़ी नहीं है उसकी आजीविका का साधन यह कला ही है और वह अपने बच्चों को भी इस कला में पारंगत बना रहा है।
(228 days ago)
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