समाचार
|| सुदामा प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना || संस्कृत विद्यालय के लिये विभागीय मान्यता एवं संस्थान से नवीन संबद्धता के लिये आवेदन 31 अगस्त तक || निःशक्त व्यक्तियों को बस किराये में 50 प्रतिशत की छूट रहेगी || लेखा प्रशिक्षण सत्र 1 अगस्त से प्रारंभ होगा || विवाह हेतु सहायता योजना || मुख्यमंत्री ऋण समाधान योजना के प्रावधानों में संशोधन || 24 जुलाई तक जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा मनाया जाएगा || “मिल बांचे मध्यप्रदेश” कार्यक्रम 7 अगस्त को || राजस्व प्रकरण एवं शिकायतें शीघ्र निराकृत करें – कलेक्टर डॉ. खाडे || बालिकाओं के विरूद्ध हो रही हिंसा के विरूद्ध संभाग में जनजागरण अभियान चलाया जायेगा - संभागायुक्त श्री कियावत
अन्य ख़बरें
शिक्षा के व्यावसायीकरण पर लगेगा अंकुश
-
अनुपपुर | 28-नवम्बर-2017
 
   
   निजी शिक्षण संस्थानों की फीस में लगातार हो रही वृद्धि से अभिभावकों को हो रही परेशानियों का संज्ञान लेते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने स्कूलों में फीस वृद्धि के नियमन का विधेयक तैयार किया है। इसके पारित होने पर निजी संस्थान प्रतिवर्ष अधिकतम 10 से 15 प्रतिशत ही फीस में बढ़ोत्तरी कर सकेंगे।
गुणवत्ता का बना रहना भी आवश्यक
   जिले में निजी संस्थानों में अध्ययन कर रहे छात्र-छात्राओं के अभिभावकों ने इसे एक सकारात्मक कदम बताया है। श्री बाल मुकुन्द सेंगर जिनका बच्चा एक निजी संस्थान में अध्ययनरत है, ने कहा कि निःसंदेह इससे निजी संस्थानों की मनमानी में अंकुश लगेगा, लेकिन गुणवत्ता का बना रहना भी जरूरी है। इस हेतु खर्चों का मूल्यांकन भी आवश्यक है।
शासकीय स्कूलों में अगर संपूर्ण शिक्षा उपलब्ध हों निजी संस्थानों के चंगुल से बचा जा सकता है
   शहर के रहवासी एवं प्राकृतिक तरीकों से उपचार देने वाले श्री नवीन नामदेव ने कहा कि अगर शासकीय विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा जिससे कि बच्चों का बौद्धिक, शारीरिक, मानसिक विकास के साथ सर्वांगीण विकास हो सके, उपलब्ध हो, तो निजी संस्थानों की आवश्यकता ही नहीं होगी। आपने कहा कि फीस नियमन से निश्चित रूप से अभिभावकों को लाभ होगा। साथ ही यह भी कहा कि अगर पाठ्यक्रमों का एकीकरण कर दिया जाय एवं विद्यालयों में होने वाली अन्य गतिविधियों को वस्तुनिष्ठ आधार पर परिभाषित किया जाय तो अन्य माध्यमों से अभिभावकों के शोषण के रास्ते भी बंद हो जाएंगे। इनके अलावा बच्चों के अभिभावक श्री राकेश अग्रवाल, श्री ऋषिराज ने इस नियमन को सराहा है। और ये आशा की है कि शिक्षण संस्थान अब अपने वास्तविक लक्ष्य जो कि शिक्षा प्रदाय करना है में ज्यादा ध्यान दे पाएंगे।
   जिले में स्थित निजी शिक्षण संस्थानों के प्रबंधकों एवं प्राचार्यों से चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि अनूपपुर जिले में फीस का स्तर वर्तमान में अन्य विकसित जिलों की अपेक्षा कम है। यहां पर गुणवत्ता बनाए रखने के लिए न्यूनतम फीस का ही आहरण किया जा रहा है। आप सभी ने सरकार के इस नियम का स्वागत किया है और कहा है कि अब वास्तव में ऐसे संस्थान जो कि जन सेवा पर आधारित है, उन्हें बल मिलेगा।
(237 days ago)
डाउनलोड करे क्रुतीदेव फोन्ट में.
डाउनलोड करे चाणक्य फोन्ट में.
पाठकों की पसंद

संग्रह
जूनजुलाई 2018अगस्त
सोम.मंगल.बुध.गुरु.शुक्र.शनि.रवि.
2526272829301
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
303112345

© 2012 सर्वाधिकार सुरक्षित जनसम्पर्क विभाग भोपाल, मध्यप्रदेश             Best viewed in IE 7.0 and above with monitor resolution 1024x768.
Onder's Computer