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जल बचायें, आने वाला कल बचायें - कमिश्नर श्री अवस्थी
जल संरक्षण एवं सूखे से निपटने हेतु संभागस्तरीय कार्यशाला सम्पन्न, जलाभिषेक अभियान-18 के क्रियान्वयन के लिए संभाग के सभी जिला सीईओ और कृषि विभाग के उपसंचालकों को कमिश्नर श्री अवस्थी ने दी हिदायत, हर जिले में अधिकाधिक तालाबों सहित हर गांव में 1-1 गेबियन संरचना भी बनायें
सागर | 29-दिसम्बर-2017
 
   
    पानी नहीं, तो कुछ नहीं। पानी के बिना जीवन की कल्पना भी बेमानी है। इसलिये हम सभी को समय रहते संभलने और वर्षा जल बचाकर अपना आने वाला कल बचाने की जरूरत है। यदि हम आज जल की उपयोगिता और इसके महत्व को नहीं समझ पाये, तो भविष्य में हम सबको भीषण जल संकट से सामना करना पडेगा़। कमिश्नर श्री आशुतोष अवस्थी ने यह विचार व्यक्त किये। कमिश्नर श्री अवस्थी शुक्रवार को कमिश्नर कार्यालय में जल संरक्षण एवं सूखे से निपटने के लिए कमिश्नर कार्यालय में आयोजित संभागस्तरीय उन्मुखी कार्यशाला का संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला सुबह 11 बजे से प्रारंभ होकर दोपहर 2 बजे तक चली। इस मैराथन कार्यशाला में कमिश्नर श्री अवस्थी ने संभाग की सभी जिला पंचायतों के सीईओ को निर्देशित किया कि वे जलाभिषेक अभियान-2018 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अभी से जी-जान से जुट जायें और 31 मार्च 2018 तक अपने-अपने जिले में अधिकाधिक सार्वजनिक तालाबों के निर्माण के साथ-साथ अपने जिले के हर गांव में एक-एक नाले में गेबियन संरचना (पानी रोकने की एक विशेष पद्धति) का निर्माण भी अवश्य करायें। कमिश्नर श्री अवस्थी ने जिला पंचायत सीईओ को क्रमशः सागर जिले में 2500 तालाब, दमोह जिले में 1500 तालाब, टीकमगढ़ जिले में 800 तालाब, छतरपुर जिले में 18000 तालाब और पन्ना जिले में 1000 तालाब बनाने का लक्ष्य दिया। उन्होंने कृषि विभाग के उपसंचालकों क्रमशः सागर को 800, दमोह को 1000, पन्ना को 500, टीकमगढ़ को 700 और छतरपुर को 605 खेत तालाबों का निर्माण कार्य 31 मार्च 2018 तक पूरा कर लेने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि सभी प्रकार के तालाब और गेबियन संरचनाओं का निर्माण कार्य हरहाल में 15 जनवरी 18 तक प्रारंभ हो जाये। उन्होंने जनपद पंचायतों के सीईओ से कहा कि वे अपने अधीन हर ग्राम पंचायतों में 2 या इससे अधिक तालाबों का निर्माण कराये। कमिश्नर श्री अवस्थी ने कहा कि चूंकि बलराम तालाबों के निर्माण हेतु सरकार से अनुदान भी मिलता है और 30 गुणा 25 गुणा 03 मीटर का 1629 घनमीटर मिट्टी वाला तालाब सवा से डेढ़ लाख रूपये की लागत से बन जाता है, अतः संभाग के सभी जिलों में हर आर.ए.ई.ओ. अपने-अपने क्षेत्र में 5-5 बलराम तालाबों का निर्माण करायें। वे चाहें तो, एक ही गांव में ही 5 या इससे अधिक बलराम तालाब बना सकते हैं।
    कमिश्नर श्री अवस्थी ने सागर संभाग क्षेत्र में निरन्तर कम होती वर्षा पर गहन चिंता जाहिर करते हुए कहा कि हमें अभी से संभल जाने की जरूरत है। कम वर्षा होने से न केवल उत्पादन कम होता है वरन् खेती का रकबा कम होता जाता है। जल बचाने के लिए हमें छोटे-छोटे तालाबों/जलाशयों का निर्माण करना होगा। गांव का पानी गांव में और खेत का पानी खेत में की अवधारणा पर काम करना होगा। हमें फसलों के साथ-साथ पानी की भी खेती करनी होगी। इसके लिए हर किसान के खेत में खेत तालाब बनाने होंगे। उन्होंने जिला पंचायतों के सीईओ से कहा कि वे जिलों में जलाभिषेक अभियान को सार्थक बनाने के लिए वातावरण निर्माण हेतु जिलास्तर, ब्लॉकस्तर, ग्राम पंचायत स्तर और ग्रामस्तर तक जल सम्मेलन करायें। यह जल सम्मेलन राज्य सरकार के मंत्रीगणों, स्थानीय विधायक व अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी और उनके नेतृत्व में करायें। लोगों को जल की महत्ता बताने के लिए कलश यात्राएं, संकल्प पत्र भरवाने के अलावा उन्हें अपने क्षेत्र में जलसंरक्षण के लिए काम करने में सहयोग देने हेतु संकल्पित करायें। अपने-अपने जिले की स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप पानी के महत्व को दर्शाते हुए हमें जल क्यों बचाना चाहियें, इस ज्वलन्त विषय पर आधारित लघु वृत्तचित्र, लघु फिल्म, आडियो-विज्युअल विज्ञापन, पोस्टर, बैनर, फ्लैक्स, पाम्पलेट्स आदि के अलावा अब तो जागो, वर्षा जल थामो जैसे जिंगल्स के जरिये गांव-गांव में जल बचाने के अभियान का व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार करें। उन्होंने कहा कि जल बचाने के लिए बेहद निचले स्तर तक जाकर लोगों को प्रेरित करने और उन्हें अपने खेतों में खेत तालाब बनाने के लिए तैयार करें।                            
जलाभिषेक अभियान-2018 का समयबद्व कार्यक्रम
    इस अभियान के तहत 29 दिसम्बर को संभागस्तरीय उन्मुखीकरण कार्यशाला सम्पन्न हुई। तीन जनवरी 18 को संभाग के सभी जिलों में जिलास्तरीय उन्मुखीकरण कार्यशालायें आयोजित की जायेंगी। पांच से 12 जनवरी के दौरान सभी जिलों में विकासखण्डस्तरीय कार्यशालायें होंगी। इसके बाद 15 से 25 जनवरी के दौरान ग्राम पंचायत स्तर पर कार्यक्रम और खेत तालाब निर्माण हेतु आवेदकों को मंजूरी आदि जारी की जायेंगी। कमिश्नर श्री अवस्थी ने सभी अधिकारियों को उपरोक्त समस्त कार्य तय समय-सीमा में ही पूरा कर लेने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि जल बचाने के इस अभियान को माईक्रो लेवल तक ले जायें। गांव-गांव में सघन जागरूकता कार्यक्रम चलायें। अभियान के तहत कम लागत वाली जल संरचनायें, खेत तालाब, बलराम तालाब, सार्वजनिक तालाब, चेक डेम्स, स्टाप डेम्स के अलावा गेबियन संरचनायें भी बनवायें। गेबियन संरचनाओं के बारे में कमिश्नर श्री अवस्थी ने कहा कि ये संरचनायें जल बचाने की दिशा में क्रांति ला सकती है। उन्होंने कार्यशाला में मौजूद ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के संभागीय एसई और जिलों में पदस्थ ईई को निर्देशित किया कि वे गेबियन संरचनाओं के निर्माण के लिए विभाग में नवपदस्थ एई और सब इंजीनियर्स के अलावा अन्य मैदानी व तकनीकी अमले को प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दिलायें। कार्यशाला में कमिश्नर श्री अवस्थी ने कहा कि हर गांव के एक-एक नाले गेबियन पद्वति से बांधे। उन्होंने इस संरचना को बनाने की विधि और इसके लाभों की जानकारी देते हुए बताया कि इसे 50 से 500 मीटर हैक्टेयर जलग्रहण क्षेत्र वाले नालों पर बनाया जाता है। इसके लिए पहले कैचमेंट एरिया का ट्रीटमेंट कराना होता है। आरईएस के ईई पहले अपने सब इंजीनियर्स को ट्रेन्ड करें, इसके बाद सब इंजीनियर्स ग्राम पंचायतों में जाकर सचिव, ग्राम रोजगार सहायक व मेट को इसकी ट्रेनिंग दें। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास, किसान कल्याण एवं कृषि विकास एवं ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग अपनी लगन, मेहनत और समर्पण भाव से इस अभियान को अच्छे तरीके से क्रियान्वित करें। उन्होंने कहा कि अच्छे कामों की खुशबू खुद ही फैलती है। इसलिये यदि किसी गांव में जल बचाने का कोई मॉडल तैयार होता है तो बाकी लोग स्वयं ही इसकी ओर आकर्षित होंगे। उन्होंने कहा कि सागर संभाग के सभी जिलों में पुराने तालाबों में हुए अतिक्रमणों को सख्ती से हटाया जाये। इन सार्वजनिक तालाबों के गहरीकरण के लिये किसानों को यहां की भूमि खनन की अनुमति दे दी जाये, ताकि तालाब का गहरीकरण भी हो सके और किसानों को अपने खेतों के लिए तालाब की उपजाऊ मिट्टी भी मिल सके।
    बायोगैस प्लांट निर्माण कार्य की समीक्षा में कमिश्नर श्री अवस्थी ने पूरे संभाग में इस कार्य में बेहद धीमी प्रगति पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि संभाग के हर जिले के हर गांव में फरवरी 18 के अंत तक 10-10 बायोगैस प्लांट का निर्माण कर लिया जाये। सभी जिला पंचायत सीईओ नमसा (नेशनल मिशन फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर) योजना की समीक्षा करें। अपने-अपने जिले के अधिकाधिक गांवों में जैविक खेती को बढ़ावा दें। प्रगतिशील किसानों के घरों में वर्मी कम्पोस्ट यूनिट स्थापित करायें।
    कार्यशाला के अंत कमिश्नर श्री अवस्थी ने सभी अधिकारियों और मैदानी अमले को टीमवर्क से काम करने की हिदायत देते हुए कहा कि पूरे अभियान के अंतर्गत सभी प्रकार के निर्माण कार्य, मंजूरी, मूल्यांकन व कार्य का अभिलेखीकरण कार्य 31 मई 2018 तक पूरा कर लिया जाये।
अभियान की अवधारणा
    गांव का पानी गांव में, खेत का पानी खेत में सिंद्वात पर जिन अंचलों/गांवों में काम हुआ है, वहां की तस्वीर और तकदीर दोनों ही बदल गई हैं। पर्यावरण समृद्व हो गया है और गांव के लोग आज पानी पर राज कर अपनी आर्थिक समृद्वि बढ़ाकर सुखपूर्वक अपना जीवन-यापन कर रहे हैं। इसी तथ्य के मद्देनजर सागर कमिश्नर श्री आशुतोष अवस्थी ने पूरे संभाग में जलाभिषेक अभियान-18 हेतु रणनीति तैयार कर संभाग के सभी कलेक्टर्स, जिला पंचायत सीईओ और कृषि विभाग के उपसंचालकों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने जिले में अभियान हेतु स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप व्यवस्थित रणनीति बनाकर प्रभावी क्रियान्वयन करें। इस हेतु खेत तालाब, गेबियन व लूज बोल्डर चैक डेम, कम लागत की संरचनाओं का निर्माण के साथ-साथ जनजागरण हेतु जिंगल्स, नारों का चयन एवं लेखन, पोस्टर प्रदर्शन, शिक्षा हेतु लघु फिल्म प्रदर्शन- जैसे पानी की खेती और खेत तालाब निर्माण पर आधारित फिल्म तैयार करायें।                 
सघन क्रियान्वयन हेतु ग्रामों का चयन करें
    इसके लिए प्रत्येक विकासखण्ड के 10 ग्रामों में न्यूनतम प्रति ग्राम 20 खेत तालाब हेतु ग्रामों का चिन्हांकन। प्रत्येक ग्राम पंचायत में न्यूनतम 02 खेत तालाबों का निर्माण। विकासखण्डवार लक्ष्यों का निर्धारण। ग्राम से निकलने वाले कम से कम एक नाले पर जगह-जगह श्रृंखलाबद्ध तरीके से बोल्डर एवं गेबियन बांध बनाने से पानी थमेगा और रिसकर जमीन में समाएगा।
    जल सम्मेलनों का आयोजन- जिला, विकासखण्ड एवं ग्राम (केवल सघन क्रियान्वयन हेतु चयनित ग्रामों में) स्तरीय सम्मेलनों को आयोजन जनप्रतिधियों की भागीदारी एवं सक्रिया भूमिका सुनिश्चित करना। जल सम्मेलन के दिन कलश यात्रा आयोजन करना। साहित्य, पोस्टर, बड़े पर्दे पर फिल्म प्रदर्शन, खेत तालाबों के फायदें पर पूर्व में अपने खेत में तालाब बनाकर लाभ लें रहे कृषकों का उद्बोधन। खेत तालाब बनाने हेतु सहमत किसानों एवं सरपंचों को संकल्प स्वरूप तांबे के पात्र भेंट कर संकल्प दिलाना। (संकल्प का प्रारूप तैयार कर लें) तांबे का कलश (गंगा, नर्मदा, केन, व्यारमा, सुनार, बेतवा, धसान) के जल से भरा हुआ जल सम्मेलन में सौंप कर सम्मानित करें। यह संकल्प पात्र उन्हें तालाब बनाने की तब तक प्रेरणा देता रहेगा, जब तक कि तालाब बन नहीं जाये।
    क्रियान्वयन- तकनीकी एवं प्रशासिक स्वीकृतियां, ले-आउट देना, कार्य स्वीकृत करना, समय पर मूल्यांकन एवं तकनीकी मार्गदर्शन, राशि का समय पर भुगतान, कार्य 31 मई 2018 तक पूर्ण कराना।
जल बचाने हेतु कुछ विशेष पद्धतियां
गेबियन स्ट्रक्चर
    नाले को एक किनारे से दूसरे किनारे तक गेबियन संरचना द्वारा बांधा जा सकता है। गोबियन संरचना नाले में ऐसे स्थान पर बनाना चाहिए जहां नाले के किनारे मजबूत तथा पर्याप्त ऊंचाई के हो। नाले को बांधने के लिये गांव में ही उपलब्ध पत्थरों के बोल्डर से दीवार बनाकर उसे लोहे की जाली से कस दिया जाता है। गोबियन संरचना की नीचे की चौड़ाई 2.60 मीटर, ऊपर की चौड़ाई 0.60 मीटर एवं ऊंचाई 1.00 मीटर रहती है। निर्माण लागत 7000/- रूपये प्रति रनिंग मीटर आती है। ऊंचे ढलान व भारी वर्षा के इलाकों में जहां लगातार भू-स्खलन का खतरा बना रहता है वहां गोबियन संरचना का उपयोग किया जा सकता है। बुरी तरह से कटे हुये किनारों को सुदृढ़ करने के लिये गेबियन संरचना का निर्माण किया जाता है।
ब्रुश वुड स्ट्रक्चर
    बांस एवं बल्लियों से इस संरचना का निर्माण किया जाता है। दो लूज बोल्डर स्ट्रक्चर के मध्य एक ब्रुश वुड चैक डेम बनाया जा सकता है। जिन स्थानों पर बांस एवं बल्लियां सामान्य रूप से कृषकों के यहां उपलब्ध होती है वहां अत्यंत कम लागत में इस संरचना का निर्माण स्थानीय रूप से किया जा सकता है।
ड्रम स्ट्रक्चर
    यह एक अत्यंत ही सस्ती तकनीकी है पहाड़ी के छोटे नालों पर जहां पर पत्थर उपलब्ध नहीं है वहां ड्रम संरचना को बनाया जा सकता है। अनुपयोगी डामर के खाली ड्रमों एवं स्थानीय रूप से उपलब्ध सामग्री को ड्रमों में भरकर इस संरचना को बनाया जाता है। ड्रम स्ट्रक्चर के पीछे वर्षा का पानी एकत्र होने से प्राकृतिक नमी का संरक्षण होता है साथ ही भूमि का क्षरण रूकर अमूल्य मिट्टी का सिल्टेशन भी होता है।
फर्शी स्ट्रक्चर
    जिन स्थानों पर प्राकृतिक रूप से एवं सस्ती दरों पर फर्शी उपलब्ध होती है उन स्थानों पर फर्शी संरचना को अत्यंत कम लागत में बनाया जा सकता है। फर्षी संरचना में दोनों ओर फर्शियों को इस तरह से लगाया जाता है कि दो फर्शियों के बीच में स्थानीय रूप से उपलब्ध सामग्री जैसे मिट्टी, मुरम एवं पत्थरों को भरा जा सकें।
लूज बोल्डर स्ट्रक्चर (पत्थर बंधाना)
    लूज बोल्डर स्ट्रक्चर (पत्थर बंधान) का निर्माण पहाड़ी एवं नालों के ऊपरी स्थान पर किया जाता है। जिससे मिट्टी का कटाव रूकता है। स्थानीय रूप से इधर उधर बीखरे हुये उपलब्ध पत्थरों को इस तरह से जमाया जाता है जिससे कि वर्षा जल के बेग को कम किया जा सके। बोल्डर चैक बनाने से नीचले क्षेत्रों में स्थित वर्षा जल संग्रहण संरचनाओं में गाद जमा होने की गति में कमी आती है।
परकोलेशन पोंड कम आर.एम.एस
    परकोलेशन पोंड कम आर.एम.एस. छोटे नालों में बनाया जाता है इसमें एक तरफ पक्की संरचना होती है जो पानी को रोकती है जिससे जल संग्रहित होकर जमीन के अन्दर उतरता है। जिससे भूमिगत जल का स्तर बढ़ता है। यह संरचना उथले एवं चौड़े नालों में बनाना उचित होता है। आवश्यकतानुसार इसमें एप्रान भी बनाया जाता है। यह संरचना भूमि क्षरण को रोकती है, साथ ही पानी की गति को कम करके भूमि की नमीं को भी बनाये रखती है।
(177 days ago)
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