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नौकरी छोड़ बने उद्योगपति दस लोगों को दिया रोजगार "सफलता की कहानी"
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पन्ना | 30-दिसम्बर-2017
 
 
     पन्ना नगर मुख्यालय से लगे ग्राम जनकपुर निवासी श्री अंशुल श्रीवास्तव ने अपनी शिक्षा दीक्षा पूरी कर काम की तलाश शुरू की। उन्हें स्थानीय मेडिकल व्यवसायी द्वारा एमआर का काम दिलाया गया। इस नौकरी की आय से उनके परिवार का गुजारा ठीक से नही हो पाता था। तब उन्होंने अपने स्वयं का रोजगार स्थापित करने की ठानी। उन्होंने स्थानीय उद्योग कार्यालय में सम्पर्क कर प्रधानमंत्री रोजगारसृजन कार्यक्रम के अन्तर्गत आवेदन दिया। उनका आवेदन जिला स्तरीय समिति की अनुशंसा के साथ बैंक भेजा गया। इसके बाद उन्हें बैंक से डिटरजेंट इकाई स्थापित करने के लिए 10 लाख रूपये का ऋण दिया गया। इससे उन्होंने ग्राम जनकपुर में डिटरजेंट इकाई स्थापित कर उत्पादन प्रारंभ कर दिया। इस इकाई से उत्पादित माल को बेंचकर वे महीने में 20 से 30 हजार रूपये की बचत कर रहे हैं।
    इस इकाई के मालिक श्री अंशुल ने बताया कि अभी हमने नई-नई इकाई स्थापित कर उत्पादन शुरू किया है, 40 से 45 क्विंटल का उत्पादन कर लेते हैं। हमें कच्चे माल के बाजार की सही जानकारी न होने के कारण कच्चा माल थोडा महंगा मिला था। अब हमें इस व्यवसाय के संबंध में पूरी जानकारी प्राप्त हो गयी है। अब हम इसी से जुडे हुए अन्य उत्पाद जैसे हार्पिक, फिनाइल, कोलीन आदि का उत्पादन भी शुरू कर रहे हैं। हमारे द्वारा उत्पादित माल स्थानीय बाजार में आसानी से बिक जाता है। अब हम अपने माल को पडोसी जिलों में विक्रय के लिए पहुंचा रहे हैं। जिससे हमारी आय दुगनी हो जाएगी। हमने अपने व्यवसाय को ठीक से चलाने और बाजार में पकड बनाने के लिए 10 कर्मचारी लगा रखे हैं। हमें शासन द्वारा 10 लाख रूपये का ऋण एवं 3 लाख रूपये का अनुदान दिया गया था। हम डिटरजेंट के विक्रय से ही 12 हजार रूपये बैंक की किश्त एवं मजदूरी का भुगतान करते हैं। आगामी आने वाले समय में अपने उत्पादन को बढाकर पडोसी जिलों तक व्यापार को फैला देंगे। जिससे हमें महीने के 50 हजार रूपये तक की बचत हो सकती है। उनका कहना है कि शिक्षित बेरोजगारों को इसी तरह शासन की स्वरोजगार योजनाओं का लाभ लेकर स्वयं को आर्थिक रूप से स्वाबलम्बी बनाना चाहिए। रोजगार की तलाश में यहां-वहां भटककर समय बर्वाद करने से कोई लाभ नही है।
 
(174 days ago)
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