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आदिवासी महिला पार्वती कोल किराना की दुकान से हुई आत्मनिर्भर ''''सफलता की कहानी''''
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अनुपपुर | 31-दिसम्बर-2017
 
   
    कम शिक्षा कई बार प्रगति में बाधा बन जाती है। शिक्षा के कमी के कारण कई बार इच्छा शक्ति के बावजूद विकास में अनेक बाधायें आती है। पर यदि लगन हो तो उससे भी पार पाया जा सकता है।
    अनूपपुर जिले की आदिवासी महिला श्रीमती पार्वती कोल की कहानी भी कुछ इसी तरह बयां करती है। ग्राम तिपान खोली में रहने वाली श्रीमती पार्वती कोल ने कक्षा 8वी तक शिक्षा प्राप्त की थी। उनके पति श्री चन्द्रभान कोल ड्राइवर का काम करते है। परिवार के भरण पोषण के लिए पर्याप्त आये नही होने से उन्हें मजदूरी की सरण भी लेनी पड़ती थी। इनका गांव जिला मुख्यालय से लगे होने के कारण उन्हें मजदूरी करना बहुत अखरता था। उनके मन में सदैव विचार आते थे कि ऐसा क्या करू जिससे मजदूरी करने से मुक्ति मिल जाये तथा परिवार का संचालन भी भली भांति होने लगे। पति का कार्य ऐसा था, जिसमें विभिन्न कार्यालयों के अधिकारियों से सम्पर्क करने का अवसर मिल  ही जाता था। एक दिन उन्होंने संकोच करते हुए अपनी यह व्यथा आदिवासी विकास निगम के कार्यालय में पदस्थ अधिकारी से बतायी। संबंधित अधिकारी ने पूरा सहयोग करते हुए उन्हें विभाग के योजनाओं की जानकारी दी तथा बताया कि आदिवासी परिवारों के लिए राज्य सरकार द्वारा स्वरोजगार हेतु ऋण एवं अनुदान दिया जाता है। उन्होंने यह जानकारी अपनी पत्नि को  दी, पत्नि तो इस अवसर के तलास में ही बैठी थी।
    डूबते को सहारा मिल गया, आदिवासी वित्त विकास निगम द्वारा किराना व्यवसाय हेतु मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना से ऋण प्रकरण तैयार कर जिला मुख्यालय के बैंक ऑफ इंडिया अनूपपुर को भेज दिया गया। दो लाख रूपये का ऋण जिसमें 60 हजार रूपये का अनुदान भी शामिल था, मिलने के बाद उन्होंने किराने की दुकान संचालित करने किराना की दुकान चल निकली। अब वे प्रति माह पाँच हजार रूपये बैंक ऋण अदा करती है। साथ ही परिवार के पालन-पोषण हेतु 7 से 8 हजार रूपये बचा लेतीं है। अब बच्चे नियमित स्कूल जा रहें हैं। मजदूरी की समस्या से भी निजात मिल चुकी है। पूरा परिवार सुख चैन से चलने लगा है। उनका कहना है कि यदि सरकार ने इस तरह के योजनायें नहीं बनायी होती, तो हम जैसे गरीब लोगों का जीवन मजदूरी में ही कट जाता। दुनिया की खुशियों से दूर गरीबी में ही पैदा होकर गरीबी में ही मर जाते। प्रदेश सरकार द्वारा चलाई गई, इन योजनाओं का लाभ हम जैसे अन्य गरीबों को भी मिले यही मेरी इच्छा है।
(175 days ago)
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