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चार बहनों ने घर को लगाया चार चांद "सफलता की कहानी"
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अनुपपुर | 13-जनवरी-2018
 
   संकुल राजेन्द्रग्राम अन्तर्गत ग्राम बसनिहा में बब्बू सिंह और विमला बाई सैयाम का परिवार बदहाली में जीवन यापन कर रहा था, जिसका मुख्य कारण परिवार का बड़ा होना था। परिवार में चार लड़कियां एवं दो लड़के थे, कृषि योग्य भूमि भी नही थी, परिवार पूर्ण रूप से मजदूरी पर निर्भर था। परिवार की बिगड़ती स्थिति देख सुशीला और उसकी बहनें भी पढ़ाई छोड़ मजदूरी करने लगी। निरंतर मजदूरी न मिलने से वे और भी निराश हो गई थीं।  
   वर्ष 2013-14 में राजेन्द्रग्राम में आजीविका मिशन के माध्यम से आयोजित होने वाले रोजगार मेले में तीनो बहनों का चयन सलूजा स्पिनिंग इंडस्ट्रीज भोपाल में हुआ, तीनों बहनो ने कंपनी में प्रशिक्षु मशीन आपरेटर के पद पर ज्वाइन किया, तब सैलरी रू 7500/-थी। चार माह बाद उन्होंने जयदीप स्पिनिंग कंपनी इंदौर में ज्वाइन किया, जहां उनके कार्य को देखते हुए सैलरी बढा कर दी जाने लगी, निरन्तर कार्य एवं आगे बढ़ने की ललक एवं खुशहाल जिन्दगी जीने की चाह ने उन्हें एक बार फिर एक अवसर दिया। अब चारो बहनें-सपना, पार्वती, सुशीला,और महेश्वरी अब सिन्टेक्स इंडस्टी अमरेली गुजरात में 12750 रूपये मासिक वेतन पर कार्य कर रही है।
   चारो बहनों ने पूरी मेहनत एवं लगन के साथ काम किया और आज उन्होने कल को बहुत पीछे छोड़ दिया है। पुराना कच्चा घर अब पक्का हो गया है, पिता और भाई के लिए बहनों ने मिलकर अपनी कमाई से आठ लाख की टैक्सी ‘‘बोलेरो‘‘ बैंक से ऋण लेकर खरीद दी है, जो कि गांव में चलती है और अब बैंक का ऋण भी एक लाख पचास हजार ही शेष बचा है। चार माह पहले बड़ी बहन सपना की शादी हो जाने के कारण अभी वह काम पर नहीं जा रही है, बाकी तीनों बहने अभी भी काम कर रही हैं। बड़े भाई की भी शादी  हो गई है, छोटे भाई को प्राईवेट स्कूल में अच्छी शिक्षा मिल रही है। छोटे भाई को पढ़ा लिखा कर डाक्टर बनाना अब बहनों का सपना है। जो भी बब्बू सिंह के घर के रास्ते गुजरता है, बस यही कहता है चारो बहनों ने लडको को मात दे दिया घर में चार चांद लगा दिया।
(162 days ago)
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