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अद्वैत वेदांत में दुनिया की सारी समस्याओं का समाधान - मुख्यमंत्री श्री चौहान
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उज्जैन | 14-जनवरी-2018
 
    मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि अद्वैत वेदांत में दुनिया की सारी समस्याओं का समाधान है। अद्वैत वेदांत के अनुसार एक ही चेतना सभी प्राणियों में है, कोई भेदभाव नहीं है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने गत दिवस भोपाल में एकात्म यात्रा का स्वागत किया।
   मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि एकात्म यात्रा के माध्यम से अद्वैत वेदांत के सिद्धांत को जन-जन तक पहुँचाया जा रहा है। भारत का वर्तमान सांस्कृतिक स्वरूप आदि शंकराचार्य की देन है। भारतीय संस्कृति एकात्मवादी है। इसमें विश्व के कल्याण की बात कही गई है। हमारे यहाँ प्राणियों, पशु-पक्षी, जीव-जन्तु, पेड़-पहाड़ और नदियों में एक ही चेतना होने की बात कही गई है। भारतीय संस्कृति में प्रकृति की पूजा की गई है। आदि शंकराचार्य की ज्ञान भूमि ओंकारेश्वर में आगामी 22 जनवरी को उनकी 108 फीट की अष्टधातु की प्रतिमा का शिलान्यास होगा। साथ ही अद्वैत वेदांत संस्थान और आदि गुरू सांस्कृतिक न्यास स्थापित किया जायेगा।
   कार्यक्रम में आचार्य सुखबोधानंद जी ने कहा कि आदि शंकराचार्य की शिक्षा से जीवन का उत्थान हो सकता है। उन्होंने कहा कि अहंकार के कारण तनाव होता है और उससे विषाद होता है। अहंकार को छोड़कर मन को शांत रखा जा सकता है। परिस्थिति से नहीं मनोस्थिति से कठिनाई होती है। जीवन में सरल होना मुश्किल है परन्तु सरल होकर ही ईश्वर को प्राप्त किया जा सकता है। आदि शंकराचार्य के अद्वैत के संदेश को जन-जन तक पहुँचाना महान कार्य है। प्रसिद्ध नृत्यांगना सुश्री सोनल मानसिंह ने कहा कि अद्वैत भावना का रूप है। आदि शंकराचार्य का दर्शन समस्त मानव जाति के लिये है। कला जगत में उनके स्रोतों का पठन होता है। कला जगत के प्रति मुख्यमंत्री श्री चौहान के भाव प्रशंसनीय है। स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरी जी ने कहा कि दर्शन से अंतरदृष्टि जागृत होती है। दृष्टि ज्ञानमयी हो तो सारा जगत परमात्मामय दिखाई देता है। एकात्म यात्रा इसी उद्देश्य से निकाली जा रही है। कार्यक्रम में महंत श्री चन्द्रमादास जी ने भी संबोधित किया। आर्ट ऑफ लिविंग के ऋषि श्री नित्यप्रज्ञा जी ने भक्ति संगीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में एकात्म यात्रा के ध्वज और चरणपादुका का पूजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने एकात्म यात्रा का संकल्प दिलाया।
(157 days ago)
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