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महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर पद्मा ने अपनी पहचान बनाई (सफलता की कहानी)
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शाजापुर | 13-फरवरी-2018
 
   
 
   राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्व-सहायता समूहों का गठन कर महिलाओं को जोड़ने के कार्य से ग्राम खेड़ावद की श्रीमती पद्मा लावरिया ने अपनी पहचान बनाई। साथ ही पद्मा अब कृत्रिम आभूषण बनाने के कार्य एवं किराना दुकान से 3 हजार रूपये से अधिक की मासिक आमदनी भी प्राप्त कर रही है।
    श्रीमती पद्मा की गांव की अन्य लड़कियों की तरह शादी जल्दी हो गई। जिससे उसे आगे पढ़ने, बढ़ने और कुछ अलग करने का मौका ही नहीं मिला। घर की जिम्मेदारी के कारण वह व्यस्त रहने लगी। उसके मन में कुछ करने की कसक बाकी थी, परन्तु उसे सही मौका और रास्ता नहीं मिल रहा था। ऐसे में उसे अक्टूबर 2015 में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की जानकारी प्राप्त हुई। उसने ग्राम की महिलाओं के साथ मिलकर स्व-सहायता समूह का गठन किया। समूह का नाम तुलसी स्व-सहायता समूह रखा। समूह द्वारा आपसी लेन-देन के साथ गतिविधियां प्रारंभ की। इसके उपरांत मिशन से प्रशिक्षण प्राप्त कर उसने आसपास के ग्रामों की महिलाओं को स्व-सहायता समूह से जोड़ने का काम प्रारंभ किया। इसके लिए उसे 324 रूपये प्रति दिवस का मानदेय माह में कम से कम 10 दिन के लिए मिलने लगा, जिससे उसका आत्मविश्वास बढ़ा। इसके उपरांत उसने कृत्रिम आभूषण निर्माण का प्रशिक्षण प्राप्त किया और बैंक से 50 हजार रूपये का ऋण लिया। साथ ही अपने निवास स्थल पर ही किराना दुकान का काम भी प्रारंभ किया। इससे उसे लगभग 3 हजार रूपये से अधिक की मासिक आमदनी प्राप्त होने लगी है।
    पद्मा अब खुश है क्योकि वह परिवार की देखभाल के साथ-साथ अपनी पहचान बनाने में भी सफल हुई है। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मार्गदर्शन पर आर्थिक गतिविधियां सचालित कर रही है। अब वह अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलवा रही है। उसके प्रत्येक कार्य में उसका पति कमल लावरिया पूरा सहयोग कर रहे है। पद्मा का कहना है कि इच्छाशक्ति के बल पर हर मुश्किल आसान हो सकती है। यदि महिलाएं स्वयं एवं परिवार का आर्थिक विकास चाहती है तो वे राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े।
(184 days ago)
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