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लाड़ो अभियान के अंतर्गत बाल विवाह रोकने में सहयोग का अनुरोध
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छिन्दवाड़ा | 05-अप्रैल-2018
 
     कलेक्टर श्री जे.के.जैन द्वारा संचालनालय महिला सशक्तिकरण विभाग के अंतर्गत संचालित लाडो अभियान के अंतर्गत अक्षय तृतीया और विशेष तिथियों के दौरान बाल विवाह की रोकथाम के लिये जिले के सामूहिक विवाह कराने वाले आयोजकों, सभी धर्मगुरू, समाज के मुखिया, हलवाई, केटरर, बैंडवाला, घोड़ीवाला, ट्रांसपोर्ट, प्रिंटिंग प्रेस के प्रबंधक, ब्यूटी पार्लर, संचालक मंगल भवन और अन्य संबंधितों से अनुरोध किया है कि वे किसी विवाह या समारोह में शामिल होने से पहले यह अवश्य देख ले कि कही वो बाल विवाह तो नही है। यदि बाल विवाह हो तो इसे रोकने में शासन को सहयोग प्रदान करें। उन्होंने सभी विभागों को भी इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिये है।
      जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी ने कहा है कि बाल विवाह रोकना या इसे हतोत्साहित करना हर समझदार और कानूनप्रिय व्यक्ति की जिम्मेदारी है, इसलिये यह अवश्य सोचें कि कहीं आप 18 वर्ष से कम उम्र की लाडली बिटिया का विवाह करके उसकी जिदंगी अनजाने जोखिम में डालने तो नहीं जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारत के राजपत्र में 11 जनवरी 2017 को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 प्रकाशित किया गया है जो एक नवंबर 2007 से लागू है। इस अधिनियम में दण्ड प्रावधान के अंतर्गत बालिका की आयु 18 वर्ष और बालक की आयु 21 वर्ष से कम नहीं होना चाहिये। इस अधिनियम से संबंधित प्रकरण की सुनवाई के लिये जिला न्यायालय सक्षम न्यायालय है तथा बाल विवाह किये जाने पर 2 वर्ष के कारवास, एक लाख रूपये का जुर्माना अथवा दोनों से दंडित किया जा सकता है।
      जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी ने बताया कि अधिनियम के अंतर्गत दोषियों में लड़के और लड़की के अभिभावक/माता-पिता, पादरी/पुजारी/मौलवी, दोनों तरफ के रिश्तेदार/परिचित, दोनों पक्षों के पड़ोसी, समुदाय के ऐसे मुखिया जो इस तरह के विवाहों को संरक्षण देते है, मैरिज ब्यूरो/शादियां कराने वाले बिचौलिये, मानव व्यापारी, दूल्हा अगर उसकी उम्र 18 वर्ष से अधिक हो और लड़की नाबालिग हो, केटर्स, घोड़ी वाला, टेंट वाला, हलवाई, बैंड वाला, ब्यूटी पार्लर, मैरिज हॉल वाले, ट्रांसपोर्ट वाले, प्रिटिंग प्रेस के मालिक/प्रबंधक जिन्होंने मुद्रित की जा रही विवाह पत्रिका में यह स्पष्ट उल्लेख नही किया है कि वर-वधू बालिग है, ऐसे संगठन या समूह के सदस्य जो सब कुछ जानते हुये भी बाल विवाह को प्रोत्साहित करते है, स्वीकृति देते है, या उसमें हिस्सा लेते है और उसे रोकने में विफल है, आदि अन्य सेवा प्रदाता को शामिल किया जा सकता है।
      जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी ने जिले के सामूहिक विवाह कराने वाले आयोजकों से अनुरोध किया है कि वे जिला महिला सशक्तिकरण कार्यालय में यह शपथ पत्र प्रस्तुत करें कि वे अपने वैवाहिक आयोजनों में बाल विवाह नहीं करायेंगे। इसी प्रकार सभी धर्मगुरू, समाज के मुखिया, हलवाई, केटरर, बैंडवाला, घोड़ीवाला, ट्रांसपोर्ट, प्रिंटिंग प्रेस के प्रबंधक, ब्यूटी पार्लर, संचालक मंगल भवन और अन्य संबंधितों से अनुरोध किया गया है कि वे संबंधित बालक/बालिका की उम्र संबंधी प्रमाण पत्र प्राप्त कर परीक्षण के उपरांत ही अपनी सेवायें प्रदाय करें या विवाह में शामिल हों तथा यदि ऐसी स्थिति निर्मित होती है तो तत्काल इसकी सूचना संबंधित थाना या विकासखंड स्तर पर संचालित परियोजना अधिकारी एकीकृत बाल विकास सेवा कार्यालय या जिला महिला सशक्तिकरण कार्यालय को अनिवार्य रूप से दें। उन्होंने प्रिटिंग प्रेस के प्रबंधको से भी अनुरोध किया है कि पूरे वर्ष बाल विवाह पर निगरानी रखते हुये सहयोग प्रदान करें और उनके प्रिटिंग प्रेस से मुद्रित की जा रही पत्रिका में स्पष्ट रूप से उल्लेख करें कि वर-वधू बालिग है। उन्होंने कहा है कि बालक और बालिका का प्रति परीक्षण स्कूल की अंकसूची, जन्म प्रमाण पत्र और आंगनवाडी केन्द्र के रिकार्ड से किया जाये। इन दस्तावेजों के अभाव में ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी मेडिकल प्रमाण पत्रों को मान्य किया जाये।  
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